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बकरा चुराकर मारने पर तीन वर्ष की कैद
Updated Mon, 30 Oct 2017 07:38 PM IST
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बकरा चुराकर मारने पर तीन वर्ष की कैद
नाहन की अदालत ने सुनाया अहम फैसला
दोनों आरोपियों पर 20 हजार जुर्माना भी ठोका
15 हजार रुपये बादी पक्ष का देना होगा मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
बकरे की चोरी कर उसे मौत के घाट उतारना दो व्यक्तियों के लिए महंगा साबित हो गया। बकरे की चोरी कर मारने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने दो युवकों को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. अबिरा बासू की अदालत ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया। सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने अदालत में गवाह और सबूतों की बिनाह पर यह अभियोग साबित कर दिखाया।
सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने बताया कि 20 जुलाई 2016 को पंजाहल के ओनखादरी निवासी दो बच्चे सतपाल और मोहित बकरियां चराने गए हुए थे। शाम करीब सात बजे बकरियां लेकर घर वापस लौट आए लेकिन एक बकरा घर नहीं पहुंचने पर दोनों बच्चे पुन: जंगल की ओर गए। बकरे को ढूंढते हुए दोनों बच्चों ने लेख राज और बलिंद्र सिंह को एक पुलिया से बाहर निकलते हुए देखा। बच्चे पुलिया में गए तो देखा कि उनका बकरा मार दिया गया था।
रघुवीर पुत्र रत्न सिंह निवासी ओनखादरी ने दोनों दोषियों को घर बुलाया था, मगर दोनों धमकी देकर चले गए। इसके बाद रघुवीर ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया। तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। गीतांजली ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने लेख राज व बलिंद्र सिंह निवासी खादरी को दोषी पाया। इसके बाद दोनों को भादंसं की धारा 379 के तहत तीन साल कैद, 506 के तहत दो साल कैद, 429 के तहत तीन साल का साधारण कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपियों को 15000 रुपये वादी पक्ष को बतौर मुआवजा भी देना पड़ेगा।
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बॉक्स के लिए-----
बाल मजदूरी करवाने पर तीन वर्ष कैद
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. अबिरा बासू की अदालत ने राजेंद्र कुमार निवासी अकबरपुर तहसील नारायणगढ़ (हरियाणा) को बाल मजदूरी का दोष साबित होने पर दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने बताया कि पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर राजेंद्र कुमार के ढाबे में दबिश दी थी। वहां पर बालक राज किशोर को मालिक बाल मजदूरी करवाता था। पुलिस ने किशोर को अपने संरक्षण में लेकर छानबीन आरंभ की जिसकी सुनवाई के बाद उक्त सजा सुनाई गई।
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नाहन की अदालत ने सुनाया अहम फैसला
दोनों आरोपियों पर 20 हजार जुर्माना भी ठोका
15 हजार रुपये बादी पक्ष का देना होगा मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
बकरे की चोरी कर उसे मौत के घाट उतारना दो व्यक्तियों के लिए महंगा साबित हो गया। बकरे की चोरी कर मारने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने दो युवकों को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. अबिरा बासू की अदालत ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया। सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने अदालत में गवाह और सबूतों की बिनाह पर यह अभियोग साबित कर दिखाया।
सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने बताया कि 20 जुलाई 2016 को पंजाहल के ओनखादरी निवासी दो बच्चे सतपाल और मोहित बकरियां चराने गए हुए थे। शाम करीब सात बजे बकरियां लेकर घर वापस लौट आए लेकिन एक बकरा घर नहीं पहुंचने पर दोनों बच्चे पुन: जंगल की ओर गए। बकरे को ढूंढते हुए दोनों बच्चों ने लेख राज और बलिंद्र सिंह को एक पुलिया से बाहर निकलते हुए देखा। बच्चे पुलिया में गए तो देखा कि उनका बकरा मार दिया गया था।
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रघुवीर पुत्र रत्न सिंह निवासी ओनखादरी ने दोनों दोषियों को घर बुलाया था, मगर दोनों धमकी देकर चले गए। इसके बाद रघुवीर ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया। तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। गीतांजली ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने लेख राज व बलिंद्र सिंह निवासी खादरी को दोषी पाया। इसके बाद दोनों को भादंसं की धारा 379 के तहत तीन साल कैद, 506 के तहत दो साल कैद, 429 के तहत तीन साल का साधारण कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपियों को 15000 रुपये वादी पक्ष को बतौर मुआवजा भी देना पड़ेगा।
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बाल मजदूरी करवाने पर तीन वर्ष कैद
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. अबिरा बासू की अदालत ने राजेंद्र कुमार निवासी अकबरपुर तहसील नारायणगढ़ (हरियाणा) को बाल मजदूरी का दोष साबित होने पर दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सहायक जिला न्यायवादी गीतांजली ने बताया कि पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर राजेंद्र कुमार के ढाबे में दबिश दी थी। वहां पर बालक राज किशोर को मालिक बाल मजदूरी करवाता था। पुलिस ने किशोर को अपने संरक्षण में लेकर छानबीन आरंभ की जिसकी सुनवाई के बाद उक्त सजा सुनाई गई।
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