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पापा इंतजार कर रही काव्या, पर आई मौत की खबर
Updated Mon, 05 Feb 2018 10:21 PM IST
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वेद प्रकाश ठाकुर
राजगढ़ (सिरमौर)।
तीन साल की अबोध बच्ची काव्या अपने पापा के आने का इंतजार कर रही है लेकिन इस बच्ची को क्या पता कि अब उसके पापा नहीं आएंगेे। शिमला के कुंडू-रोहड़ू मार्ग पर टनल के निर्माण कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में काव्या के पिता दया राम की मौत ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है।
बूढ़ी मां से उसका लाल छिन गया तो पत्नी की मांग उजड़ गई। हादसे की खबर के बाद पुरे रासुमांदर क्षेत्र में मातम का माहौल है। दया राम के पिता की मृत्यु भी ढांक से गिरकर एक हादसे में ही हुई थी। अब दया की मौत ने परिवार के पुराने जख्म भी हरे कर दिए हैं।
गौरतलब है कि राजगढ़ उपमंडल के रासुमांदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटी पधोग के कुफ्फर मौंड निवासी 35 वर्षीय दयाराम मेहता की सावड़ा कुंडू-रोहडू मार्ग में एक टनल निर्माण के दौरान हुई दुर्घटना में रविवार को मौत हो गई। दयाराम मेहता इस प्रोजेक्ट में पिछले करीब पंद्रह वर्षों से फोरमैन के पद पर कार्यरत था।
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बताया जा रहा है कि रविवार सायं तीन बजे ड्युटी के दौरान टनल के अंदर मशीन की चपेट में आने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई। दया राम अपने पीछे एक बूढ़ी मां, अठाइस वर्षीय पत्नी रंजना व तीन वर्षीय मासूम बच्ची काव्या को छोड़ गया है।
हाटकोटी पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए रोहड़ू सिविल अस्पताल से दयाराम मेहता के शव को उसके परिजनों को सौंप दिया है। देर सायं तक शव उसके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। दया राम की तीन बहनें और दो भाई हैे। इसके पिता ज्ञान सिंह मेहता की करीब दस साल पहले ढांक में गिरने से मौत हो गई थी। मृतक दयाराम मेहता ने जमा दो तक शिक्षा ली थी। 15 वर्षों से फोरमैन के पद पर कंपनी में कार्य कर रहा था। गरीब किसान के बेटे दयाराम मेहता का जीवन संघर्षों भरा रहा। छोटी से आयु में ही पिता की मौत हो गई। परिवार के लोग कृषि व्यवसाय से ही गुजर बसर कर रहे हैं। एकमात्र निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले दयाराम मेहता की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। अबोध तीन वर्षीय बच्ची अपने पापा के इंतजार में है। उसे कोई यह नहीं समझा पा रहा है कि अब अंतिम बार उसके पापा का शव ही घर आएगा। बूढ़ी मां को लोग ढांढस बधाते हैं तो स्वयं रो रहे हैं।
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राजगढ़ (सिरमौर)।
तीन साल की अबोध बच्ची काव्या अपने पापा के आने का इंतजार कर रही है लेकिन इस बच्ची को क्या पता कि अब उसके पापा नहीं आएंगेे। शिमला के कुंडू-रोहड़ू मार्ग पर टनल के निर्माण कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में काव्या के पिता दया राम की मौत ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है।
बूढ़ी मां से उसका लाल छिन गया तो पत्नी की मांग उजड़ गई। हादसे की खबर के बाद पुरे रासुमांदर क्षेत्र में मातम का माहौल है। दया राम के पिता की मृत्यु भी ढांक से गिरकर एक हादसे में ही हुई थी। अब दया की मौत ने परिवार के पुराने जख्म भी हरे कर दिए हैं।
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गौरतलब है कि राजगढ़ उपमंडल के रासुमांदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटी पधोग के कुफ्फर मौंड निवासी 35 वर्षीय दयाराम मेहता की सावड़ा कुंडू-रोहडू मार्ग में एक टनल निर्माण के दौरान हुई दुर्घटना में रविवार को मौत हो गई। दयाराम मेहता इस प्रोजेक्ट में पिछले करीब पंद्रह वर्षों से फोरमैन के पद पर कार्यरत था।
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बताया जा रहा है कि रविवार सायं तीन बजे ड्युटी के दौरान टनल के अंदर मशीन की चपेट में आने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई। दया राम अपने पीछे एक बूढ़ी मां, अठाइस वर्षीय पत्नी रंजना व तीन वर्षीय मासूम बच्ची काव्या को छोड़ गया है।
हाटकोटी पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए रोहड़ू सिविल अस्पताल से दयाराम मेहता के शव को उसके परिजनों को सौंप दिया है। देर सायं तक शव उसके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। दया राम की तीन बहनें और दो भाई हैे। इसके पिता ज्ञान सिंह मेहता की करीब दस साल पहले ढांक में गिरने से मौत हो गई थी। मृतक दयाराम मेहता ने जमा दो तक शिक्षा ली थी। 15 वर्षों से फोरमैन के पद पर कंपनी में कार्य कर रहा था। गरीब किसान के बेटे दयाराम मेहता का जीवन संघर्षों भरा रहा। छोटी से आयु में ही पिता की मौत हो गई। परिवार के लोग कृषि व्यवसाय से ही गुजर बसर कर रहे हैं। एकमात्र निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले दयाराम मेहता की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। अबोध तीन वर्षीय बच्ची अपने पापा के इंतजार में है। उसे कोई यह नहीं समझा पा रहा है कि अब अंतिम बार उसके पापा का शव ही घर आएगा। बूढ़ी मां को लोग ढांढस बधाते हैं तो स्वयं रो रहे हैं।