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Sirmour News: अदालत, एक्सक्लूसिव खबर..
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मेडिकल लापरवाही पर आरटीआई में सूचना रोकने
पर राज्य आयोग ने जताई नाराजगी, लगाई फटकार
- साल 2021 में नाहन मेडिकल कॉलेज का मामला, मरीज की मौत के मामले में 15 दिन में मांगी पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट
- राज्य आयुक्त की टिप्पणी, सूचना रोकना गलत : भविष्य में आरटीआई मामलों को गंभीरता से निपटाने की दी चेतावनी
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने नाहन मेडिकल कॉलेज में कथित मेडिकल लापरवाही से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी रोकने पर नाराजगी जताते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारी (पीआईओ-कम-सुपरिंटेंडेंट) को फटकार लगाई है। आयोग ने आदेश दिया है कि आरटीआई के तहत मांगी गई पूरी जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए।
यह मामला साल 2021 में डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक मरीज की मौत से जुड़ा है। आरोप लगे हैं कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई थी। इस संबंध में अधिवक्ता अशोक शर्मा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अस्पताल प्रशासन से विभागीय कार्रवाई और जांच रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच गया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त डॉ. एसएस गुलेरिया ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारी की ओर से ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित जानकारी व्यक्तिगत सूचना नहीं मानी जा सकती। इसलिए इसे आरटीआई के तहत देने से इन्कार करना उचित नहीं है। यदि किसी मामले में कार्रवाई की गई है तो उसकी पूरी रिपोर्ट और रिकॉर्ड उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
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आयोग ने आदेश में संबंधित विभाग को भविष्य में आरटीआई मामलों को गंभीरता से निपटाने की भी चेतावनी दी। आयोग ने कहा कि निर्धारित समय में आदेशों का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरटीआई अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी आरटीआई कानून के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इस आदेश के बाद मामले में जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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मरीज को अकेले छोड़ देना आचार संहिता के खिलाफ : आयोग
29 अप्रैल 2021 को एक मरीज की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे नाहन मेडिकल कॉलेज में (आइसोलेशन वार्ड) भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अनिकेता शर्मा ने गंभीर हालत में भर्ती मरीज का शारीरिक परीक्षण नहीं किया और सुबह के समय फोन पर ही इलाज के निर्देश (परामर्श) दिए। अगले दिन मुकेश की मौत हो गई। इस दौरान परिजनों ने समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण जांच की मांग की थी। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार सीसीटीवी फुटेज से यह भी सामने आया कि डॉक्टर ने मरीज को वार्ड में जाकर नहीं देखा और उसे अकेला छोड़ दिया गया था, जो चिकित्सा आचार संहिता के खिलाफ माना गया।
संवाद
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पर राज्य आयोग ने जताई नाराजगी, लगाई फटकार
- साल 2021 में नाहन मेडिकल कॉलेज का मामला, मरीज की मौत के मामले में 15 दिन में मांगी पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट
- राज्य आयुक्त की टिप्पणी, सूचना रोकना गलत : भविष्य में आरटीआई मामलों को गंभीरता से निपटाने की दी चेतावनी
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने नाहन मेडिकल कॉलेज में कथित मेडिकल लापरवाही से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी रोकने पर नाराजगी जताते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारी (पीआईओ-कम-सुपरिंटेंडेंट) को फटकार लगाई है। आयोग ने आदेश दिया है कि आरटीआई के तहत मांगी गई पूरी जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए।
यह मामला साल 2021 में डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक मरीज की मौत से जुड़ा है। आरोप लगे हैं कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई थी। इस संबंध में अधिवक्ता अशोक शर्मा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अस्पताल प्रशासन से विभागीय कार्रवाई और जांच रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच गया।
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इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त डॉ. एसएस गुलेरिया ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारी की ओर से ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित जानकारी व्यक्तिगत सूचना नहीं मानी जा सकती। इसलिए इसे आरटीआई के तहत देने से इन्कार करना उचित नहीं है। यदि किसी मामले में कार्रवाई की गई है तो उसकी पूरी रिपोर्ट और रिकॉर्ड उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
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आयोग ने आदेश में संबंधित विभाग को भविष्य में आरटीआई मामलों को गंभीरता से निपटाने की भी चेतावनी दी। आयोग ने कहा कि निर्धारित समय में आदेशों का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरटीआई अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी आरटीआई कानून के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इस आदेश के बाद मामले में जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।
मरीज को अकेले छोड़ देना आचार संहिता के खिलाफ : आयोग
29 अप्रैल 2021 को एक मरीज की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे नाहन मेडिकल कॉलेज में (आइसोलेशन वार्ड) भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अनिकेता शर्मा ने गंभीर हालत में भर्ती मरीज का शारीरिक परीक्षण नहीं किया और सुबह के समय फोन पर ही इलाज के निर्देश (परामर्श) दिए। अगले दिन मुकेश की मौत हो गई। इस दौरान परिजनों ने समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण जांच की मांग की थी। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार सीसीटीवी फुटेज से यह भी सामने आया कि डॉक्टर ने मरीज को वार्ड में जाकर नहीं देखा और उसे अकेला छोड़ दिया गया था, जो चिकित्सा आचार संहिता के खिलाफ माना गया।
संवाद