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Sirmour News: 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त मामले में हरियाणा और राजस्थान के तीनों आरोपी बरी
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कोर्ट ने कहा-अभियोजन की कहानी में गंभीर विरोधाभास, दो स्वतंत्र गवाहों के मुकरने से संदेह गहराया
माजरा थाना क्षेत्र में कार से बरामद हुआ था 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त, आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में नाहन की विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई पर संदेह है और अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
मामला थाना माजरा में दर्ज एफआईआर से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 14 सितंबर 2023 को पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि एक सफेद क्रेटा कार में भारी मात्रा में चूरापोस्त ले जाया जा रहा है। मेलियो के पास नाका लगाकर कार को रोका गया। तलाशी के दौरान तीन बोरियों से कुल 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त बरामद होने का दावा किया गया। मामले में जितेंद्र कुमार (जिंद, हरियाणा) सहित विशाल शर्मा और शंभू लाल, दोनों निवासी जिला चित्तौड़गढ़, राजस्थान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 15 और 29 के तहत आरोप तय किए गए थे। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार अभियोजन ने कुल 18 गवाह पेश किए।
अदालत के सामने अभियोजन की ओर से पेश किए गए स्वतंत्र गवाह तसवर अली और आबिद अली अपने पहले के कथित बयानों से मुकर गए। दोनों ने कहा कि पुलिस ने उनसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे और उनके सामने आरोपियों से कोई आपत्तिजनक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। अदालत ने इन गवाहों के बयानों को मामले के लिए महत्वपूर्ण माना। विशेष अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद तीनों आरोपियों को दंडनीय आरोपों से बरी कर दिया गया।
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अदालत ने कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास थे। वाहनों की जांच की संख्या को लेकर अलग-अलग गवाहों के बयान अलग थे। अदालत ने इन परिस्थितियों को अभियोजन के मामले के लिए गंभीर माना। संवाद
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माजरा थाना क्षेत्र में कार से बरामद हुआ था 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त, आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में नाहन की विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई पर संदेह है और अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
मामला थाना माजरा में दर्ज एफआईआर से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 14 सितंबर 2023 को पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि एक सफेद क्रेटा कार में भारी मात्रा में चूरापोस्त ले जाया जा रहा है। मेलियो के पास नाका लगाकर कार को रोका गया। तलाशी के दौरान तीन बोरियों से कुल 54.402 किलोग्राम चूरापोस्त बरामद होने का दावा किया गया। मामले में जितेंद्र कुमार (जिंद, हरियाणा) सहित विशाल शर्मा और शंभू लाल, दोनों निवासी जिला चित्तौड़गढ़, राजस्थान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 15 और 29 के तहत आरोप तय किए गए थे। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार अभियोजन ने कुल 18 गवाह पेश किए।
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अदालत के सामने अभियोजन की ओर से पेश किए गए स्वतंत्र गवाह तसवर अली और आबिद अली अपने पहले के कथित बयानों से मुकर गए। दोनों ने कहा कि पुलिस ने उनसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे और उनके सामने आरोपियों से कोई आपत्तिजनक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। अदालत ने इन गवाहों के बयानों को मामले के लिए महत्वपूर्ण माना। विशेष अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद तीनों आरोपियों को दंडनीय आरोपों से बरी कर दिया गया।
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अदालत ने कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास थे। वाहनों की जांच की संख्या को लेकर अलग-अलग गवाहों के बयान अलग थे। अदालत ने इन परिस्थितियों को अभियोजन के मामले के लिए गंभीर माना। संवाद