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Sirmour News: अदालत 2
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दवाइयों का कब्जे में पाया जाना अपराध
सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं : अदालत
प्रतिबंधित स्पास्मो प्रॉक्सीवोन कैप्सूल मामले में दो आरोपी बरी
, 152 कैप्सूल बरामदगी के थे आरोप
-16 सितंबर 2017 पांवटा साहिब थाना का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
अदालत ने अवैध दवाइयों की बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निर्णय में कहा कि केवल दवाइयों का कब्जे में पाया जाना अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष आवश्यक कानूनी तत्वों को सिद्ध करने में विफल रहा है। अदालत ने पांवटा सहित निवासी अशोक कुमार और जसविंदर सिंह को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत सभी आरोपों से बरी कर दिया।
यह मामला 16 सितंबर 2017 को पांवटा साहिब थाने में दर्ज है। पुलिस ने बहराल चेक पोस्ट पर नाका लगाया हुआ था। इस दौरान यमुनानगर की ओर से आ रहे एक मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को जांच के लिए रोका गया। तलाशी के दौरान उनके पास से स्पास्मो प्रॉक्सीवोन प्लस की छह स्ट्रिप और एक छोटी स्ट्रिप बरामद की गई। इनमें 152 कैप्सूल थे। पुलिस ने इसकी सूचना ड्रग्स इंस्पेक्टर को दी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर दवाइयों को कब्जे में लिया। अभियोजन के अनुसार आरोपी दवाइयों के संबंध में कोई वैध लाइसेंस, बिल या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और न ही यह बता पाए कि दवाइयां कहां से प्राप्त की गईं थीं। इसके बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बरामदगी की प्रक्रिया, समय और दस्तावेजों में कई विरोधाभास हैं। गवाहों के बयानों में भी आपसी तालमेल नहीं पाया गया। इसके अलावा, यह भी प्रमाणित नहीं हो सका कि आरोपी दवाइयों को बिक्री या वितरण के उद्देश्य से ले जा रहे थे। दवाइयों की केमिकल जांच भी नहीं करवाई गई थी।
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सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं : अदालत
प्रतिबंधित स्पास्मो प्रॉक्सीवोन कैप्सूल मामले में दो आरोपी बरी
, 152 कैप्सूल बरामदगी के थे आरोप
-16 सितंबर 2017 पांवटा साहिब थाना का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
अदालत ने अवैध दवाइयों की बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निर्णय में कहा कि केवल दवाइयों का कब्जे में पाया जाना अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष आवश्यक कानूनी तत्वों को सिद्ध करने में विफल रहा है। अदालत ने पांवटा सहित निवासी अशोक कुमार और जसविंदर सिंह को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत सभी आरोपों से बरी कर दिया।
यह मामला 16 सितंबर 2017 को पांवटा साहिब थाने में दर्ज है। पुलिस ने बहराल चेक पोस्ट पर नाका लगाया हुआ था। इस दौरान यमुनानगर की ओर से आ रहे एक मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को जांच के लिए रोका गया। तलाशी के दौरान उनके पास से स्पास्मो प्रॉक्सीवोन प्लस की छह स्ट्रिप और एक छोटी स्ट्रिप बरामद की गई। इनमें 152 कैप्सूल थे। पुलिस ने इसकी सूचना ड्रग्स इंस्पेक्टर को दी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर दवाइयों को कब्जे में लिया। अभियोजन के अनुसार आरोपी दवाइयों के संबंध में कोई वैध लाइसेंस, बिल या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और न ही यह बता पाए कि दवाइयां कहां से प्राप्त की गईं थीं। इसके बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बरामदगी की प्रक्रिया, समय और दस्तावेजों में कई विरोधाभास हैं। गवाहों के बयानों में भी आपसी तालमेल नहीं पाया गया। इसके अलावा, यह भी प्रमाणित नहीं हो सका कि आरोपी दवाइयों को बिक्री या वितरण के उद्देश्य से ले जा रहे थे। दवाइयों की केमिकल जांच भी नहीं करवाई गई थी।
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