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Sirmour News: सड़क हादसे के पीड़ित को 16.28 लाख रुपये मुआवजा
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मार्च 2022 का मामला, एमएसीटी कपिल शर्मा ने सुनाया फैसला
दोसड़का चौक माजरा के पास सड़क दुर्घटना में वीरेंद्र कुमार हो गए थे घायल, उपचार के दौरान काटना पड़ा था पैर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे के पीड़ित वीरेंद्र कुमार को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 16.28 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी कपिल शर्मा ने सुनाया। आदेश दिया है कि 16,28,821 रुपये की मुआवजा राशि चोलमंडलम मैसर्ज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अदा करनी होगी। साथ ही याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 3,000 रुपये खर्च देने के भी निर्देश दिए गए हैं। पीड़ित व्यक्ति राजमिस्त्री के रूप में कार्यरत था। यह मामला 13 मार्च 2022 का है। तहसील पांवटा साहिब निवासी याचिकाकर्ता वीरेंद्र कुमार अपनी मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। दोसड़का चौक माजरा के पास एक वाहन (बोलेरो पिकअप) और उनकी मोटरसाइकिल में दुर्घटना हो गई। हादसे में याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं। इसके कारण उनका बायां पैर काटना पड़ा। पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 337 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। आरोप थे कि वाहन चालक की तेज और लापरवाही के कारण हादसा पेश आया। न्यायालय में पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधिकरण ने पाया कि भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की बनती है।
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दोसड़का चौक माजरा के पास सड़क दुर्घटना में वीरेंद्र कुमार हो गए थे घायल, उपचार के दौरान काटना पड़ा था पैर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे के पीड़ित वीरेंद्र कुमार को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 16.28 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी कपिल शर्मा ने सुनाया। आदेश दिया है कि 16,28,821 रुपये की मुआवजा राशि चोलमंडलम मैसर्ज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अदा करनी होगी। साथ ही याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 3,000 रुपये खर्च देने के भी निर्देश दिए गए हैं। पीड़ित व्यक्ति राजमिस्त्री के रूप में कार्यरत था। यह मामला 13 मार्च 2022 का है। तहसील पांवटा साहिब निवासी याचिकाकर्ता वीरेंद्र कुमार अपनी मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। दोसड़का चौक माजरा के पास एक वाहन (बोलेरो पिकअप) और उनकी मोटरसाइकिल में दुर्घटना हो गई। हादसे में याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं। इसके कारण उनका बायां पैर काटना पड़ा। पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 337 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। आरोप थे कि वाहन चालक की तेज और लापरवाही के कारण हादसा पेश आया। न्यायालय में पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधिकरण ने पाया कि भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की बनती है।