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Sirmour News: ट्रांसगिरि की शरली पंचायत से बिशु मेलों का आगाज
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-एक महीने तक चलेगा पारंपरिक उत्सवों का दौर
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। ट्रांसगिरि क्षेत्र में बैशाख संक्रांति के अवसर पर 14 अप्रैल से बिशु मेलों का शुभारंभ हो गया है। शिरगुल देवता मंदिर के कपाट खुलते ही क्षेत्र में पारंपरिक मेलों की शृंखला शुरू हो गई, जो आगामी एक माह तक लगातार जारी रहेगी।
कफोटा उपमंडल की शरली पंचायत में मंगलवार को इस वर्ष का पहला बिशु मेला आयोजित किया गया, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव का आगाज हुआ। शरली गांव से शिरगुल देवता की पालकी मेला स्थल तक लाई गई, जहां श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बिशु मेलों की यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार क्षेत्र के देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए इन मेलों का आयोजन किया जाता है। मेले की विशेष आकर्षण ठोडा तीरंदाजी का पारंपरिक खेल रहता है, जिसमें शाठी और पांशी समुदाय के लोग भाग लेते हैं। यह खेल न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।
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ट्रांसगिरि क्षेत्र अपनी अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां वर्षभर विभिन्न त्योहार और मेले आयोजित होते रहते हैं। जनवरी में माघी, बैशाख में बिशु मेले, सावन में हरियाली मेले और भादों माह में पंचमी के साथ बूढ़ी दिवाली जैसे पर्व पूरे उत्साह से मनाए जाते हैं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। ट्रांसगिरि क्षेत्र में बैशाख संक्रांति के अवसर पर 14 अप्रैल से बिशु मेलों का शुभारंभ हो गया है। शिरगुल देवता मंदिर के कपाट खुलते ही क्षेत्र में पारंपरिक मेलों की शृंखला शुरू हो गई, जो आगामी एक माह तक लगातार जारी रहेगी।
कफोटा उपमंडल की शरली पंचायत में मंगलवार को इस वर्ष का पहला बिशु मेला आयोजित किया गया, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव का आगाज हुआ। शरली गांव से शिरगुल देवता की पालकी मेला स्थल तक लाई गई, जहां श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बिशु मेलों की यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है।
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स्थानीय मान्यताओं के अनुसार क्षेत्र के देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए इन मेलों का आयोजन किया जाता है। मेले की विशेष आकर्षण ठोडा तीरंदाजी का पारंपरिक खेल रहता है, जिसमें शाठी और पांशी समुदाय के लोग भाग लेते हैं। यह खेल न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।
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ट्रांसगिरि क्षेत्र अपनी अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां वर्षभर विभिन्न त्योहार और मेले आयोजित होते रहते हैं। जनवरी में माघी, बैशाख में बिशु मेले, सावन में हरियाली मेले और भादों माह में पंचमी के साथ बूढ़ी दिवाली जैसे पर्व पूरे उत्साह से मनाए जाते हैं। संवाद