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Sirmour News: पुन्नरधार में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
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पुन्नरधार में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
बूढ़ी दिवाली को लेकर शुरू हुए रंगारंग कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार (सिरमौर)। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली पर्व को लेकर जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है।
बता दें कि गिरिपार क्षेत्र मेें दिवाली के एक महीने बाद यह पर्व का आयोजन होता है। हाटी समुदाय के लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
मंगलवार की रात को इस पर्व को लेकर पुन्नरधार गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। यहां नाटी किंग सुरेश शर्मा, सुनील चौहान, मीनाक्षी चौहान व तारा कोमल ने एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीत गाकर दर्शकों का रात भर मनोरंजन किया।
बता दें कि गिरिपार की 125 पंचायतों में बूढ़ी दिवाली को ‘मशराली’ के नाम से मनाया जाता है। ग्रामीण परोकड़िया गीत, विरह गीत भयूरी, रासा, नाटियां, स्वांग के साथ-साथ हुलक नृृत्य करके जश्न मनाते हैं।
कुछ गांवों में बूढ़ी दिवाली के त्योहार पर बढ़ेचू नृत्य करने की परंपरा आज भी है। जबकि कई गांव में अर्ध रात्रि के समय एक समुदाय के लोगों द्वारा बुड़ियाच नृत्य करके देव परंपरा को निभाया जाता है।
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-- -- -संवाद
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बूढ़ी दिवाली को लेकर शुरू हुए रंगारंग कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार (सिरमौर)। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली पर्व को लेकर जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है।
बता दें कि गिरिपार क्षेत्र मेें दिवाली के एक महीने बाद यह पर्व का आयोजन होता है। हाटी समुदाय के लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
मंगलवार की रात को इस पर्व को लेकर पुन्नरधार गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। यहां नाटी किंग सुरेश शर्मा, सुनील चौहान, मीनाक्षी चौहान व तारा कोमल ने एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीत गाकर दर्शकों का रात भर मनोरंजन किया।
बता दें कि गिरिपार की 125 पंचायतों में बूढ़ी दिवाली को ‘मशराली’ के नाम से मनाया जाता है। ग्रामीण परोकड़िया गीत, विरह गीत भयूरी, रासा, नाटियां, स्वांग के साथ-साथ हुलक नृृत्य करके जश्न मनाते हैं।
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कुछ गांवों में बूढ़ी दिवाली के त्योहार पर बढ़ेचू नृत्य करने की परंपरा आज भी है। जबकि कई गांव में अर्ध रात्रि के समय एक समुदाय के लोगों द्वारा बुड़ियाच नृत्य करके देव परंपरा को निभाया जाता है।
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