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Sirmour News: बीमार गाय की कर संभाल, परिवार ने पेश की मिसाल
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उम्मीद की मशाल : दूध देना कर दिया बंद, उठने में लाचार फिर भी सेवा में जुटा है परिवार
कमजोर आर्थिकी के बावजूद नहीं छोड़ी गाय, कर रहे दवा बूटी, लगा चुके हजारों
गाय के बच्चे को बाजार से खरीद कर पिला रहे दूध, मानवता की पेश की मिसाल
पंकत तन्हा
नाहन (सिरमौर)। नाहन विधानसभा क्षेत्र की बनकला पंचायत के भूड़ गांव के ओम प्रकाश का परिवार उन लोगों के लिए प्रेरणा बना है, जो गाय के दूध बंद कर देने पर उसे सड़कों पर दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ देता है। कमजोर आर्थिकी वाले ओम प्रकाश का परिवार एक ऐसी बीमार गाय की लगातार सेवा कर रहा है, जिससे अब कभी दूध भी नहीं मिलना है। इस गाय की सेवा में वे अब तक हजारों रुपए खर्च कर चुके हैं। उनकी खुद की आर्थिक दशा इस गाय की सेवा में गड़बड़ा चुकी है, इसके बावजूद इनकी गो सेवा लगातार जारी है।
जानकारी अनुसार, भूड़ गांव निवासी ओम प्रकाश के घर पर पल रही बूढ़ी हो चुकी गाय की प्रसूति दो महीने पहले हुई थी। बछड़ी को जन्म देने से एक महीने पहले गाय ने खड़े होना छोड़ दिया। जब गाय की प्रसूति हुई तब गाय की पूरी बच्चेदानी बाहर आ गिरी। पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उसे अंदर डाला। इससे गाय में इंफेक्शन हो गया और पस पड़ गई। जिसे नियमित उपचार के बाद ठीक कर दिया गया, लेकिन यह गाय अपनी टांगों पर खड़ी नहीं हो पा रही है। पिछली दोनों टांगे बेकार हो चुकी है। इस गाय से अब दूध भी नहीं मिलना है। इस गाय को ठीक करने के लिए ओम प्रकाश का परिवार जी जान से जुटा है। गाय को जितनी तरह की दवाइयां लिखी गई हैं। उसके हटके मटका, खल, बनोले, गुड, देसी खांड भी गाय को बाजार से खरीद कर दी है, लेकिन बात नहीं बनी। यहां तक कि ओम प्रकाश, उनकी पत्नी कौशल्या, पुत्र हरीश कुमार और बहू पूजा ने गाय की टांगों की नियमित गर्म पानी से सिकाई भी की, लेकिन सब व्यर्थ। अब इस गाय को लोहे के शिकंजे के जरिये बीच-बीच में खड़ा किया जाता है ताकि नहला-धुला सकें।
बेटे की कमाई पर चल रहा घर
हैरानी की बात यह है कि दो बच्चों समेत छह सदस्यों का यह परिवार बेटे हरीश कुमार की कमाई के अधीन है। हरीश कुमार से निजी कंपनी में ड्राइवर है। कम तनख्वाह और अधिक खर्चे के बावजूद यह परिवार न केवल गाय की लगातार सेवा करके दूसरों के लिए प्रेरणा बना है। वहीं, गाय के बच्चे को बाजार से रोजाना दूध खरीदकर अपनी हैसियत के अनुसार पिला भी रहा है। यह गो सेवा आज भी जारी है।
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आर्थिकी कम फिर भी बावजूद गो सेवा में जुटा परिवार
यह परिवार उन लोगों के लिए आईना है जो अच्छी आर्थिक स्थिति के बावजूद अपनी गायों को दूध बंद करने के बाद सड़कों पर दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ देता है। ओम प्रकाश ने बताया कि परिवार के पास कमाई का एकमात्र जरिया उसके पुत्र की ड्राइवरी से होने वाली कमाई है। इस कमाई पर छह सदस्य निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के साथ पूरा परिवार गाय की भी सेवा कर रहा है। जो आगे भी जारी रहेगी। -संवाद
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कमजोर आर्थिकी के बावजूद नहीं छोड़ी गाय, कर रहे दवा बूटी, लगा चुके हजारों
गाय के बच्चे को बाजार से खरीद कर पिला रहे दूध, मानवता की पेश की मिसाल
पंकत तन्हा
नाहन (सिरमौर)। नाहन विधानसभा क्षेत्र की बनकला पंचायत के भूड़ गांव के ओम प्रकाश का परिवार उन लोगों के लिए प्रेरणा बना है, जो गाय के दूध बंद कर देने पर उसे सड़कों पर दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ देता है। कमजोर आर्थिकी वाले ओम प्रकाश का परिवार एक ऐसी बीमार गाय की लगातार सेवा कर रहा है, जिससे अब कभी दूध भी नहीं मिलना है। इस गाय की सेवा में वे अब तक हजारों रुपए खर्च कर चुके हैं। उनकी खुद की आर्थिक दशा इस गाय की सेवा में गड़बड़ा चुकी है, इसके बावजूद इनकी गो सेवा लगातार जारी है।
जानकारी अनुसार, भूड़ गांव निवासी ओम प्रकाश के घर पर पल रही बूढ़ी हो चुकी गाय की प्रसूति दो महीने पहले हुई थी। बछड़ी को जन्म देने से एक महीने पहले गाय ने खड़े होना छोड़ दिया। जब गाय की प्रसूति हुई तब गाय की पूरी बच्चेदानी बाहर आ गिरी। पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उसे अंदर डाला। इससे गाय में इंफेक्शन हो गया और पस पड़ गई। जिसे नियमित उपचार के बाद ठीक कर दिया गया, लेकिन यह गाय अपनी टांगों पर खड़ी नहीं हो पा रही है। पिछली दोनों टांगे बेकार हो चुकी है। इस गाय से अब दूध भी नहीं मिलना है। इस गाय को ठीक करने के लिए ओम प्रकाश का परिवार जी जान से जुटा है। गाय को जितनी तरह की दवाइयां लिखी गई हैं। उसके हटके मटका, खल, बनोले, गुड, देसी खांड भी गाय को बाजार से खरीद कर दी है, लेकिन बात नहीं बनी। यहां तक कि ओम प्रकाश, उनकी पत्नी कौशल्या, पुत्र हरीश कुमार और बहू पूजा ने गाय की टांगों की नियमित गर्म पानी से सिकाई भी की, लेकिन सब व्यर्थ। अब इस गाय को लोहे के शिकंजे के जरिये बीच-बीच में खड़ा किया जाता है ताकि नहला-धुला सकें।
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बेटे की कमाई पर चल रहा घर
हैरानी की बात यह है कि दो बच्चों समेत छह सदस्यों का यह परिवार बेटे हरीश कुमार की कमाई के अधीन है। हरीश कुमार से निजी कंपनी में ड्राइवर है। कम तनख्वाह और अधिक खर्चे के बावजूद यह परिवार न केवल गाय की लगातार सेवा करके दूसरों के लिए प्रेरणा बना है। वहीं, गाय के बच्चे को बाजार से रोजाना दूध खरीदकर अपनी हैसियत के अनुसार पिला भी रहा है। यह गो सेवा आज भी जारी है।
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आर्थिकी कम फिर भी बावजूद गो सेवा में जुटा परिवार
यह परिवार उन लोगों के लिए आईना है जो अच्छी आर्थिक स्थिति के बावजूद अपनी गायों को दूध बंद करने के बाद सड़कों पर दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ देता है। ओम प्रकाश ने बताया कि परिवार के पास कमाई का एकमात्र जरिया उसके पुत्र की ड्राइवरी से होने वाली कमाई है। इस कमाई पर छह सदस्य निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के साथ पूरा परिवार गाय की भी सेवा कर रहा है। जो आगे भी जारी रहेगी। -संवाद