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Sirmour News: चुनाव ड्यूटी में खाना बनाने के आदेश पर भड़कीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन(सिरमौर)। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन (सीटू) ने निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव ड्यूटी पर तैनात पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के आदेशों पर कड़ा एतराज जताया है। यूनियन की राज्य कमेटी ने इन आदेशों को तर्कहीन बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।
यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने मंगलवार को एक संयुक्त प्रेस बयान जारी कर कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों पर पहले से ही काम का अतिरिक्त बोझ है। चुनाव के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित होता है, ऐसे में कर्मियों को ड्यूटी पर बुलाना न्यायसंगत नहीं है।
यूनियन ने महिला कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी में शतप्रतिशत महिला कर्मचारी हैं, जबकि पोलिंग पार्टियों में अधिकतर पुरुष होते हैं। पोलिंग टीमें एक दिन पहले ही बूथ पर पहुंच जाती हैं। ऐसे में महिलाएं उनके लिए खाना बनाएंगी, तो उन्हें रात 10 से 11 बजे तक रुकना पड़ेगा। इतनी रात को महिला कर्मी सुरक्षित घर कैसे पहुंचेंगी, यह एक बड़ा सवाल है। यूनियन की नेताओं ने दो टूक कहा कि इससे पहले कभी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी रात के समय नहीं लगाई गई है। यूनियन ने सरकार और निर्वाचन आयोग से निवेदन किया है कि इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और महिला कर्मचारियों से जबरन ऐसा कोई काम न करवाया जाए जो उनकी सुरक्षा और गरिमा के खिलाफ हो।
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-- -संवाद
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नाहन(सिरमौर)। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन (सीटू) ने निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव ड्यूटी पर तैनात पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के आदेशों पर कड़ा एतराज जताया है। यूनियन की राज्य कमेटी ने इन आदेशों को तर्कहीन बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है।
यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने मंगलवार को एक संयुक्त प्रेस बयान जारी कर कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों पर पहले से ही काम का अतिरिक्त बोझ है। चुनाव के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित होता है, ऐसे में कर्मियों को ड्यूटी पर बुलाना न्यायसंगत नहीं है।
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यूनियन ने महिला कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी में शतप्रतिशत महिला कर्मचारी हैं, जबकि पोलिंग पार्टियों में अधिकतर पुरुष होते हैं। पोलिंग टीमें एक दिन पहले ही बूथ पर पहुंच जाती हैं। ऐसे में महिलाएं उनके लिए खाना बनाएंगी, तो उन्हें रात 10 से 11 बजे तक रुकना पड़ेगा। इतनी रात को महिला कर्मी सुरक्षित घर कैसे पहुंचेंगी, यह एक बड़ा सवाल है। यूनियन की नेताओं ने दो टूक कहा कि इससे पहले कभी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी रात के समय नहीं लगाई गई है। यूनियन ने सरकार और निर्वाचन आयोग से निवेदन किया है कि इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और महिला कर्मचारियों से जबरन ऐसा कोई काम न करवाया जाए जो उनकी सुरक्षा और गरिमा के खिलाफ हो।
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