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गिरिपार में पांजवी पर्व की धूम, हुआ पवित्र स्नान
Updated Thu, 13 Sep 2018 10:57 PM IST
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गिरिपार में पांजवी पर्व की धूम, प्रतिमाओं का पवित्र स्नान
म्हासू देवता के सम्मान में मनाया जाता है उत्सव
शिलाई (सिरमौर)। समूचे गिरिपार क्षेत्र में धार्मिक आस्था के प्रतीक महासू देवता का स्नान मेला शुरू हो गया है। बुधवार को हरितालिका तृतीया के शुभ मुहूर्त में देवता की पालकियों और छड़ियों का शृंगार कर उन्हें भंडार से बाहर निकाल कर देवालय में रखा गया। जबकि, वीरवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर देव पालकियों और प्रतिमाओं का पवित्र स्नान हुआ। शुक्रवार को पुन: विधिवत रूप से देव पालकियों को पुन: भंडार में स्थापित किया जाएगा। गिरिपार क्षेत्र के षिल्ला, शमाह टिटियाणा, कोटी उतरऊ, पशमी, बंशवा, कंडियारी, ऐराना, कोटी, द्राविल, भटवाड़, लाणी, बाहराड़, भोहड़, मोहराड़, मशवाड़ सहित टौस नदी पार के जौनसार इलाका और महासू तीर्थ हनोल में भी स्नान मेला बुधवार को शुरू हो गया है। पहले दिन उपासणी, दूसरे दिन को नायण तथा अंतिम दिन को ढाल के रूप पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस स्नान मेले को स्थानीय बोली में पांजवी कहा जाता है। कोटी मंदिर के पुजारी मुंशीराम शर्मा, द्रविल के रामभज शर्मा, मोहराड़ के धनीराम शर्मा, मशवाड़ के बीजा राम, देव कारिंदे कंडियारी निवासी जाती राम नेगी, कांडी निवासी धर्म सिंह नेगी का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली हा रही है। तीन दिन तक चलने वाले इस पर्व में माहसू देवता का प्रसिद्ध गायन बीरसू भी गाया जाएगा जो पांजवी पर्व का आकर्षण रहता है। वीरवार को देव चिन्ह पालकियों और छड़ियों का विधिवत स्नान हुआ। देव कारिंदे उपवास रखकर पूरी रात जागरण भी करेंगे।
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म्हासू देवता के सम्मान में मनाया जाता है उत्सव
शिलाई (सिरमौर)। समूचे गिरिपार क्षेत्र में धार्मिक आस्था के प्रतीक महासू देवता का स्नान मेला शुरू हो गया है। बुधवार को हरितालिका तृतीया के शुभ मुहूर्त में देवता की पालकियों और छड़ियों का शृंगार कर उन्हें भंडार से बाहर निकाल कर देवालय में रखा गया। जबकि, वीरवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर देव पालकियों और प्रतिमाओं का पवित्र स्नान हुआ। शुक्रवार को पुन: विधिवत रूप से देव पालकियों को पुन: भंडार में स्थापित किया जाएगा। गिरिपार क्षेत्र के षिल्ला, शमाह टिटियाणा, कोटी उतरऊ, पशमी, बंशवा, कंडियारी, ऐराना, कोटी, द्राविल, भटवाड़, लाणी, बाहराड़, भोहड़, मोहराड़, मशवाड़ सहित टौस नदी पार के जौनसार इलाका और महासू तीर्थ हनोल में भी स्नान मेला बुधवार को शुरू हो गया है। पहले दिन उपासणी, दूसरे दिन को नायण तथा अंतिम दिन को ढाल के रूप पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस स्नान मेले को स्थानीय बोली में पांजवी कहा जाता है। कोटी मंदिर के पुजारी मुंशीराम शर्मा, द्रविल के रामभज शर्मा, मोहराड़ के धनीराम शर्मा, मशवाड़ के बीजा राम, देव कारिंदे कंडियारी निवासी जाती राम नेगी, कांडी निवासी धर्म सिंह नेगी का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली हा रही है। तीन दिन तक चलने वाले इस पर्व में माहसू देवता का प्रसिद्ध गायन बीरसू भी गाया जाएगा जो पांजवी पर्व का आकर्षण रहता है। वीरवार को देव चिन्ह पालकियों और छड़ियों का विधिवत स्नान हुआ। देव कारिंदे उपवास रखकर पूरी रात जागरण भी करेंगे।