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महिला मरीजों का टूटा सब्र का बांध, एमएस दफ्तर का घेराव
Updated Fri, 03 Aug 2018 11:21 PM IST
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नाहन मेडिकल कॉलेज में एमएस कार्यालय का घेराव करती गर्भवती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला ब्य़ूरो
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नाहन (सिरमौर)। डॉ, वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में शुक्रवार को महिला मरीजों के सब्र का बांध आखिर टूट ही गया। सुबह से लेकर गायनी ओपीडी के बाहर बारी का इंतजार कर रही महिलाएं मेडिकल अधीक्षक कार्यालय पहुंच गईं और घेराव कर दिया। इस दौरान मरीजों ने कॉलेज की अव्यवस्थाओं को लेकर प्रबंधन को जमकर कोसा। डेढ़ दर्जन से अधिक महिला मरीजों ने कहा कि पिछले कई दिन से वह गायनी ओपीडी के चक्कर काट रही हैं लेकिन आज तक चेकअप नहीं हो पाया। गायनी डाक्टरों के मरीजों से बर्ताव पर भी महिलाओं ने गुस्सा निकाला। मरीजों ने कहा कि डॉक्टरों का मरीजों से व्यवहार बिल्कुल सही नहीं है। मरीजों को अच्छे से समझाने की बजाय उन्हें फटकार लगाई जा रही है। ओपीडी के बाहर सिक्योरिटी गार्ड भी मरीजों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं। मरीजों ने यह भी कहा कि पहुंच रखने वाले मरीजों को उसी वक्त जांच के लिए अंदर बुला लिया जाता है जबकि दुर्गम क्षेत्र के मरीजों की कोई पूछ नहीं हो रही है। ऐेसे में गर्भवती महिलाएं काफी परेशानी झेल रही हैं। आर्थिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मरीज परेशान हो रहे हैं। कई मरीजों ने तो यहां तक कह दिया कि अच्छा होता कि यदि यह क्षेत्रीय अस्पताल ही रहता। जब से मेडिकल कॉलेज बना है, तब से व्यवस्थाएं सुधरने की बजाय और बिगड़ती जा रही हैं। खासकर मरीजों को इस मेडिकल कॉलेज से कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
एक सप्ताह से काट रहे ओपीडी के चक्कर
संगड़ाह उपमंडल के रणफुआ से पहुंची पूनम देवी, कालाअंब से लक्ष्मी, विक्रमबाग के पनपा की ममता, रेणुका के खूड़ द्राबिल की मीरा देवी, सैनवाला की पूनम व कृष्णा और मोगीनंद की आरती ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वह गायनी ओपीडी के चक्कर काट रही हैं। हर रोज ओपीडी के बाहर बैठकर वापस जाना पड़ रहा है। नाहन में ठहरने के लिए प्रबंध करना भी उनकी मजबूरी हो गई है। डॉक्टरों का न व्यवहार सही है और न ही व्यवस्थाएं। हर तरह से परेशानी ही हाथ लग रही है।
उधर, एमएस डॉ. केके पराशर और डॉ. सुनील कक्कड़ ने मरीजों की परेशानी सुनी और मौके पर ही गायनी के डॉक्टरों को मरीजों से अच्छा व्यवहार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशानी झेल रहे हैं। फिर भी अपने स्तर पर व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं।
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एक सप्ताह से काट रहे ओपीडी के चक्कर
संगड़ाह उपमंडल के रणफुआ से पहुंची पूनम देवी, कालाअंब से लक्ष्मी, विक्रमबाग के पनपा की ममता, रेणुका के खूड़ द्राबिल की मीरा देवी, सैनवाला की पूनम व कृष्णा और मोगीनंद की आरती ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वह गायनी ओपीडी के चक्कर काट रही हैं। हर रोज ओपीडी के बाहर बैठकर वापस जाना पड़ रहा है। नाहन में ठहरने के लिए प्रबंध करना भी उनकी मजबूरी हो गई है। डॉक्टरों का न व्यवहार सही है और न ही व्यवस्थाएं। हर तरह से परेशानी ही हाथ लग रही है।
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उधर, एमएस डॉ. केके पराशर और डॉ. सुनील कक्कड़ ने मरीजों की परेशानी सुनी और मौके पर ही गायनी के डॉक्टरों को मरीजों से अच्छा व्यवहार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशानी झेल रहे हैं। फिर भी अपने स्तर पर व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं।
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