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जल पक्षियों के कलरव से खींचे आ रहे पर्यटक
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:18 PM IST
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सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)।
हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर स्थित प्रसिद्घ वेटलैंड आसन बैराज में हजारों जल पक्षियों के पहुंचने से पर्यटन खूब आकर्षित हो रहे हैं। रंग-बिरंगे हजारों पक्षियों के कलरव व अटखेलियों से पर्यटक खूब आनंदित हो रहे हैं। मेहमान परिंदों के प्रवास पर किसी तरह की खलल न पड़े, इसके लिए झील में मोटर बोट को बंद करवा दिया गया है। केवल पैडल बोट ही तय सीमा के भीतर चलाने की अनुमित वन विभाग ने दी है।
सर्दियों के मौसम में आसन वेटलैंड में 6 से 8 हजार तक जल पक्षियों की संख्या पहुंचती है। वन विभाग के अनुसार 13 नवंबर तक देश-विदेश से करीब 4 हजार जल पक्षी पहुंच चुके हैं।
हिमाचल व उत्तराखंड सीमा क्षेत्र पर आसन वेटलैंड में निरंतर प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है जिनमें मैलार्ड, लार्ज कारमोरेंटस, सुर्खाव, टिक्कड़ी, नील बतख, बेजूर, डूबकीमार बतख, बड़ी-छोटी मुरगाबी, पिनटेल्स, छोटी कारमोरेंटस, हेरानस, डुबडुबी, पियारुन, कामन पोचार्ड, गेडवेल, नार्दन शावलर, कामन मोरगन, कामन क्रूट, ग्रेट इगरेल, इंडियन पोंड हीरान, गेडवाल, कामन पोचार्ड, वुडबीकर, किंगफिशर व मेलार्ड आदि शामिल हैं। हर वर्ष आसन बैरान में सर्दियों के मौसम में 6 से 8 हजार के बीच रंग-बिरंगे पक्षी पहुंचते हैं। आसन वेटलैंड में पक्षी प्रेमियों व पर्यटकों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है।
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हिमाचल, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से लोग पर्यटन स्थल पर इन जल पक्षियों को निहारने पहुंचते हैं।
उधर, उत्तराखंड वन प्रभाग चकराता के तहत पड़ने वाले स्थानीय आरओ जेएस तोमर ने कहा कि हर वर्ष 6 से 8 हजार तक देश विदेश से जल पक्षी बैराज में पहुंचते हैं। अब तक बैराज में 4 हजार पक्षी पहुंच चुके हैं।
बाक्स...
सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें गठित
हिमाचल सीमा से लगते आसन बैराज में तैनात उत्तराखंड वन विभाग के आरओ जेएस तोमर ने कहा कि निरंतर पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेहमान जल पक्षियों की सुरक्षा को वन विभाग द्वारा टीमें गठित की गई हैं। जल पक्षी बैराज से कई बार आसपास क्षेत्रों में उड़ कर पहुंच जाते हैं। उन स्थलों पर पक्षियों के शिकार का ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए वन विभाग की 5 टीमें मेहमान परिंदों की सुरक्षा को दिन रात पहरा दे रही हैं।
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पांवटा साहिब (सिरमौर)।
हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर स्थित प्रसिद्घ वेटलैंड आसन बैराज में हजारों जल पक्षियों के पहुंचने से पर्यटन खूब आकर्षित हो रहे हैं। रंग-बिरंगे हजारों पक्षियों के कलरव व अटखेलियों से पर्यटक खूब आनंदित हो रहे हैं। मेहमान परिंदों के प्रवास पर किसी तरह की खलल न पड़े, इसके लिए झील में मोटर बोट को बंद करवा दिया गया है। केवल पैडल बोट ही तय सीमा के भीतर चलाने की अनुमित वन विभाग ने दी है।
सर्दियों के मौसम में आसन वेटलैंड में 6 से 8 हजार तक जल पक्षियों की संख्या पहुंचती है। वन विभाग के अनुसार 13 नवंबर तक देश-विदेश से करीब 4 हजार जल पक्षी पहुंच चुके हैं।
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हिमाचल व उत्तराखंड सीमा क्षेत्र पर आसन वेटलैंड में निरंतर प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है जिनमें मैलार्ड, लार्ज कारमोरेंटस, सुर्खाव, टिक्कड़ी, नील बतख, बेजूर, डूबकीमार बतख, बड़ी-छोटी मुरगाबी, पिनटेल्स, छोटी कारमोरेंटस, हेरानस, डुबडुबी, पियारुन, कामन पोचार्ड, गेडवेल, नार्दन शावलर, कामन मोरगन, कामन क्रूट, ग्रेट इगरेल, इंडियन पोंड हीरान, गेडवाल, कामन पोचार्ड, वुडबीकर, किंगफिशर व मेलार्ड आदि शामिल हैं। हर वर्ष आसन बैरान में सर्दियों के मौसम में 6 से 8 हजार के बीच रंग-बिरंगे पक्षी पहुंचते हैं। आसन वेटलैंड में पक्षी प्रेमियों व पर्यटकों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है।
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हिमाचल, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से लोग पर्यटन स्थल पर इन जल पक्षियों को निहारने पहुंचते हैं।
उधर, उत्तराखंड वन प्रभाग चकराता के तहत पड़ने वाले स्थानीय आरओ जेएस तोमर ने कहा कि हर वर्ष 6 से 8 हजार तक देश विदेश से जल पक्षी बैराज में पहुंचते हैं। अब तक बैराज में 4 हजार पक्षी पहुंच चुके हैं।
बाक्स...
सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें गठित
हिमाचल सीमा से लगते आसन बैराज में तैनात उत्तराखंड वन विभाग के आरओ जेएस तोमर ने कहा कि निरंतर पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेहमान जल पक्षियों की सुरक्षा को वन विभाग द्वारा टीमें गठित की गई हैं। जल पक्षी बैराज से कई बार आसपास क्षेत्रों में उड़ कर पहुंच जाते हैं। उन स्थलों पर पक्षियों के शिकार का ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए वन विभाग की 5 टीमें मेहमान परिंदों की सुरक्षा को दिन रात पहरा दे रही हैं।