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युवाओं को खोखला कर रही नशे की लत
Updated Sat, 04 Aug 2018 10:25 PM IST
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युवाओं को खोखला कर रही नशे की बढ़ती लत
चरस, स्मैक समेत नशीली दवाइयों का कर रहे सेवन
संबंधित फोटो 8 से 13 तक
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पिछले कुछ दशकों से पांवटा साहिब के कई युवा नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और यूपी में बढ़ते नशे के प्रचलन का प्रभाव यहां भी देखने को मिल रहा है। एक दशक से युवाओं में नशे की प्रवृति बढ़ रही है, जिसमें स्मैक और नशीली दवाइयों जैसे खतरनाक एवं घातक नशे के मामले भी शामिल हैं। नशे की लत में पड़कर युवा अपनी जान तक गंवा रहे हैं। कुछ अरसे पहले नशे का सेवन करने वाले युवक की मौत हुई थी। अब नशे की लत में फंसे युवक ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी है। लिहाजा, नशे को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।
नगर परिषद पांवटा के मनोनीत पार्षद अजीत पाल सिंह, पूर्व मनोनीत पार्षद शहबाज खान और युवा व्यवसायी पुनीत शर्मा का कहना है कि पंजाब और हरियाणा राज्यों में फैला नशे का जाल हिमाचल तक पहुंच रहा है। सीमांत क्षेत्रों में इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। नशा माफिया पर शिकंजा कसने के लिए एकजुट होना जरूरी है। क्षेत्र के कई होनहार युवाओं को नशे की बुरी लत लगने के कारण हमेशा के लिए खो दिया है।
जनता को नशे के खिलाफ लड़नी होगी लड़ाई
गिरिपार निवासी वीरेंद्र शर्मा, अनिल अत्री, कपिल तोमर, मामराज शर्मा और वरुण शर्मा का कहना है कि गिरिपार के सतौन, तिलौरधार, कफोटा, टिंबी और रोहनाट तक नशे के कारोबार की जड़ें फैलने लगी हैं। इसमें नशे की दवाई, इंजेक्शन, चूरा-पोस्त, चरस और स्मैक जैसे घातक नशों का कारोबार हो रहा है। तीन वर्ष पहले पांवटा में कुछ संस्थाओं ने नशे को रोकने के प्रयास किए थे। कुछ नशा माफिया सलाखों के पीछे भी पहुंचे। एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के साथ जनता को नशे के खिलाफ खड़ा होना होगा।
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पांवटा में चल रहा नशा मुक्ति केंद्र
नशामुक्ति केंद्र संचालक अंशुल शर्मा ने कहा कि क्षेत्र के दस युवक मिलकर केंद्र चला रहे हैं। पिछले छह वर्षों से नशामुक्ति केंद्र से जुड़े हैं। पहले विकासनगर केंद्र था लेकिन अब ढाई वर्षों से पांवटा में केंद्र संचालन कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से यहां चिट्टा के पीड़ित पहुंच रहे हैं। जबकि, हिमाचल के अधिकतर युवा स्मैक, नशीले इंजेक्शन और दवाई की लत छुड़ाने को यहां पहुंचते हैं।
डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने कहा कि नशे का कारोबार करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। दो सालों में एनडीपीएस एक्ट के सौ से अधिक मामले पकड़े गए हैं। इसमें एक दर्जन के करीब मामले स्मैक के ही हैं। पांवटा के विभिन्न संदिग्ध नशा बिक्री स्थलों पर पुख्ता सूचना जुटाने पर कार्रवाई की जाती रही है। देवीनगर में दो साल पहले स्मैक का नशा करने के नदी किनारे बने ठिकाने ही नष्ट कर दिए थे।
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चरस, स्मैक समेत नशीली दवाइयों का कर रहे सेवन
संबंधित फोटो 8 से 13 तक
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पिछले कुछ दशकों से पांवटा साहिब के कई युवा नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और यूपी में बढ़ते नशे के प्रचलन का प्रभाव यहां भी देखने को मिल रहा है। एक दशक से युवाओं में नशे की प्रवृति बढ़ रही है, जिसमें स्मैक और नशीली दवाइयों जैसे खतरनाक एवं घातक नशे के मामले भी शामिल हैं। नशे की लत में पड़कर युवा अपनी जान तक गंवा रहे हैं। कुछ अरसे पहले नशे का सेवन करने वाले युवक की मौत हुई थी। अब नशे की लत में फंसे युवक ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी है। लिहाजा, नशे को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।
नगर परिषद पांवटा के मनोनीत पार्षद अजीत पाल सिंह, पूर्व मनोनीत पार्षद शहबाज खान और युवा व्यवसायी पुनीत शर्मा का कहना है कि पंजाब और हरियाणा राज्यों में फैला नशे का जाल हिमाचल तक पहुंच रहा है। सीमांत क्षेत्रों में इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। नशा माफिया पर शिकंजा कसने के लिए एकजुट होना जरूरी है। क्षेत्र के कई होनहार युवाओं को नशे की बुरी लत लगने के कारण हमेशा के लिए खो दिया है।
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जनता को नशे के खिलाफ लड़नी होगी लड़ाई
गिरिपार निवासी वीरेंद्र शर्मा, अनिल अत्री, कपिल तोमर, मामराज शर्मा और वरुण शर्मा का कहना है कि गिरिपार के सतौन, तिलौरधार, कफोटा, टिंबी और रोहनाट तक नशे के कारोबार की जड़ें फैलने लगी हैं। इसमें नशे की दवाई, इंजेक्शन, चूरा-पोस्त, चरस और स्मैक जैसे घातक नशों का कारोबार हो रहा है। तीन वर्ष पहले पांवटा में कुछ संस्थाओं ने नशे को रोकने के प्रयास किए थे। कुछ नशा माफिया सलाखों के पीछे भी पहुंचे। एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के साथ जनता को नशे के खिलाफ खड़ा होना होगा।
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पांवटा में चल रहा नशा मुक्ति केंद्र
नशामुक्ति केंद्र संचालक अंशुल शर्मा ने कहा कि क्षेत्र के दस युवक मिलकर केंद्र चला रहे हैं। पिछले छह वर्षों से नशामुक्ति केंद्र से जुड़े हैं। पहले विकासनगर केंद्र था लेकिन अब ढाई वर्षों से पांवटा में केंद्र संचालन कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से यहां चिट्टा के पीड़ित पहुंच रहे हैं। जबकि, हिमाचल के अधिकतर युवा स्मैक, नशीले इंजेक्शन और दवाई की लत छुड़ाने को यहां पहुंचते हैं।
डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने कहा कि नशे का कारोबार करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। दो सालों में एनडीपीएस एक्ट के सौ से अधिक मामले पकड़े गए हैं। इसमें एक दर्जन के करीब मामले स्मैक के ही हैं। पांवटा के विभिन्न संदिग्ध नशा बिक्री स्थलों पर पुख्ता सूचना जुटाने पर कार्रवाई की जाती रही है। देवीनगर में दो साल पहले स्मैक का नशा करने के नदी किनारे बने ठिकाने ही नष्ट कर दिए थे।