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खुले में रखी जा रही जीवनरक्षक दवाइयां
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:20 PM IST
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online medicine
- फोटो : FILE PHOTO
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हितेश शर्मा
नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के हर स्वास्थ्य केंद्र को जाने वाली सरकारी दवाइयों को खुले बरामदे में रखा जा रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत करोड़ों रुपये की दवाइयों की आपूर्ति उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर पीएचसी, सीएचसी, सिविल व अन्य बड़े अस्पतालों में हो रही है लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाइयां पहुंचने से पहले इन्हें किस स्टेज से गुजरना पड़ रहा है, यह बड़ा सवाल है।
नाहन में सीएमओ कार्यालय के साथ ही दवाओं का भी स्टोर रूम है, जहां बरामदे में जहां-तहां दवाइयों की पेटियां बिखरी पड़ी हैं। नियमानुसार दवाओं को उनके तापमान के अनुसार सुरक्षित रखना जरूरी है। सही तापमान न मिलने के कारण दवाइयां खराब भी हो सकती हैं। यदि खराब दवाइयां अस्पतालों तक पहुंची तो इससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती है।
हैरत यह है कि जिस भवन में यह दवाइयां रखी जा रही है वह भी असुरक्षित घोषित हुआ है। स्टोर रूम में जगह न होने के कारण दवाइयों को बंद पेटियों में बरामदे में टीन की छत के नीचे रखा गया है। ऐसे में दवाइयों को न तो ठंडा स्थान मिल रहा है और न ही शुष्क वातावरण। भवन को असुरक्षित घोषित किए काफी वक्त बीत चुका है। नए भवन के निर्माण का मामला अभी तक लंबित पड़ा है।
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बाक्स--
असुरक्षित भवन, बैठने तक जगह नहीं
स्टोर रूम समेत एनएचएम स्टाफ व दूसरे कार्यालय भी असुरक्षित भवन में चल रहे हैं। यहां पर फूड सेफ्टी, ड्रग विभाग के कार्यालय भी हैं। यह दोनों ऐसे विभाग हैं जो हर समय वैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। कई सालों तक सैंपल सुरक्षित रखने के साथ-साथ दोनों विभागों को कोर्ट संबंधी प्रक्रियाओं से भी गुजरजा पड़ता है लेकिन यह भवन बैठने तक भी सुरक्षित नहीं है। सैंपल व सीज किए गए सामान को इस भवन में सुरक्षित रख पाना बेहद ही मुश्किल है।
सप्लाई के लिए रखी जाती हैं दवाइयां-
स्टोर रूम तक पहुंचाने व अस्पतालों को सप्लाई के समय ही दवाएं बाहर रखी जाती हैं। स्टोर रूम के बाहर ज्यादातर कॉटन आदि रखा जाता है। यह जरूर है कि स्टोर रूम में जगह की कमी खल रही है। भवन असुरक्षित घोषित किया गया है। नए भवन के निर्माण संबंधी प्रक्रिया चल रही है।
- डॉ. संजय शर्मा, सीएमओ सिरमौर
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नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के हर स्वास्थ्य केंद्र को जाने वाली सरकारी दवाइयों को खुले बरामदे में रखा जा रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत करोड़ों रुपये की दवाइयों की आपूर्ति उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर पीएचसी, सीएचसी, सिविल व अन्य बड़े अस्पतालों में हो रही है लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाइयां पहुंचने से पहले इन्हें किस स्टेज से गुजरना पड़ रहा है, यह बड़ा सवाल है।
नाहन में सीएमओ कार्यालय के साथ ही दवाओं का भी स्टोर रूम है, जहां बरामदे में जहां-तहां दवाइयों की पेटियां बिखरी पड़ी हैं। नियमानुसार दवाओं को उनके तापमान के अनुसार सुरक्षित रखना जरूरी है। सही तापमान न मिलने के कारण दवाइयां खराब भी हो सकती हैं। यदि खराब दवाइयां अस्पतालों तक पहुंची तो इससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती है।
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हैरत यह है कि जिस भवन में यह दवाइयां रखी जा रही है वह भी असुरक्षित घोषित हुआ है। स्टोर रूम में जगह न होने के कारण दवाइयों को बंद पेटियों में बरामदे में टीन की छत के नीचे रखा गया है। ऐसे में दवाइयों को न तो ठंडा स्थान मिल रहा है और न ही शुष्क वातावरण। भवन को असुरक्षित घोषित किए काफी वक्त बीत चुका है। नए भवन के निर्माण का मामला अभी तक लंबित पड़ा है।
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असुरक्षित भवन, बैठने तक जगह नहीं
स्टोर रूम समेत एनएचएम स्टाफ व दूसरे कार्यालय भी असुरक्षित भवन में चल रहे हैं। यहां पर फूड सेफ्टी, ड्रग विभाग के कार्यालय भी हैं। यह दोनों ऐसे विभाग हैं जो हर समय वैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। कई सालों तक सैंपल सुरक्षित रखने के साथ-साथ दोनों विभागों को कोर्ट संबंधी प्रक्रियाओं से भी गुजरजा पड़ता है लेकिन यह भवन बैठने तक भी सुरक्षित नहीं है। सैंपल व सीज किए गए सामान को इस भवन में सुरक्षित रख पाना बेहद ही मुश्किल है।
सप्लाई के लिए रखी जाती हैं दवाइयां-
स्टोर रूम तक पहुंचाने व अस्पतालों को सप्लाई के समय ही दवाएं बाहर रखी जाती हैं। स्टोर रूम के बाहर ज्यादातर कॉटन आदि रखा जाता है। यह जरूर है कि स्टोर रूम में जगह की कमी खल रही है। भवन असुरक्षित घोषित किया गया है। नए भवन के निर्माण संबंधी प्रक्रिया चल रही है।
- डॉ. संजय शर्मा, सीएमओ सिरमौर