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54 स्कूलों को झोंपड़ी तक नसीब नहीं
ब्यूराो, नाहन (सिरमौर)।
Updated Mon, 20 Jun 2016 11:02 PM IST
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नाहन (सिरमौर)। जंबूखाला स्कूल को झोपड़ी तो नसीब हो गई लेकिन जिला में कई स्कूल ऐसे भी हैं जिनके पास झोपड़ी तक नहीं। जिला सिरमौर में 54 मिडल व प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जो किराये के मकानों में चल रहे हैं या फिर गांव की महिला मंडल व अन्य सार्वजनिक भवनों में चल रहे हैं।
नाहन शिक्षा खंड के तहत आने वाला चकरेड़ा प्राथमिक स्कूल 1967 से चल रहा है। यह स्कूल 1152 रुपये प्रतिमाह किराये पर चल रहा है। इसके बाद पांवटा शिक्षा खंड के अंतर्गत जंबूखाला स्कूल 1992 में अस्तित्व में आया। इसे भी आज तक झोंपड़ी ही नसीब हो पाई।
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2009 से अपग्रेड हुआ मिडल स्कूल हीरपुर आज भी स्थानीय प्राथमिक पाठशाला हीरपुर के दो कमरों में चल रहा है। माजरा के मटक माजरी स्कूल को आज तक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई। यह भी 2009 से चल रहा है। इसके बाद 2012 से 2016 तक जितने भी स्कूल खुले या अपग्रेड हुए, वह किराये के मकानों में चल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने जगह-जगह स्कूल तो खोल दिए हैं मगर स्कूल खोलने के बाद भवन निर्माण संबंधी औपचारिकताएं आज तक अधूरी ही रह गई हैं।
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ये हैं बिना भवन के स्कूल
बकरास शिक्षा खंड के तहत आने वाले प्राथमिक स्कूलों में दरेच, माइला शिमाना, मोराच धार, कठमली, जामना व डाडो, ददाहू के तिलधार, शिरु माइला, मतियाला, मलान, शिक्षा खंड माजरा के मटक माजरी व गढ़ीवाला, नाहन के थापल, पनिया मंडोली, चकरेड़ा, नारग के सरहोज व रिवाडला, नौहराधार के बसाली, मंडियान कुमाना, बड़ा खनारा, काइरा व बड़वाना, पांवटा के जंबूखाला, भुंगरनी, पतीनथा, भुड्डी, चलोई, फूलपुर शमशेरपुर, गुरुवाला व कंडोन, राजगढ़ शिक्षा खंड के पजरेली, धार, दियूटा, चान बसहेच, शारुग व रुग, सराहां के पट्टा कूफड, चड़यार व दधोग, सतौन के बाना, भिपटवाड़, शिलाई के बधार, सुरला के कोटड़ी, नायरो, मोगीनंद-2 के पास कोई भवन नहीं है।
वहीं मिडल स्कूलों में भटयूड़ी, नाडनोटी, मलाहन, भेनु, शैउबाग, कटाह शीतला, चकनाल, दाना, डाबरा, कांडो च्योग, शिरी कठवाड, मेहत, नुरंगाबाद, भगवानपुर, मेहरार माजरी, कोटड़ी, बनकला-2, सैर बड़ोन, भरेंजी, लाना मच्छेर, नेरी नावण, कालाघाट, मोहर, डिलमन, शोगी, चाडना-2, नाइचना, मंडोली, भोन करियाना, कशलोग, हीरपुर, अमरकोट, भेड़ेवाला, भाटनवाली, बांगरन, थारु, पालू, रुग बखोटा, शिलांजी, कुफरपाल, जघीर, कुफरधार, पाब, टिक्करी, जनोट, रजालग, ढंगयार, टिंडू, किलाकलांच, शरोग, बौंच, खाउंचा व देवनी आदि शामिल हैं।
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जमीन उपलब्ध नहीं
उधर, ओएसडी एलीमेंट्री एजूकेशन बिनती मनूजा ने बताया कि कई स्कूलों में भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिन स्कूलों का अपना भवन नहीं हैं वह नान रेंटिड कमरों में चल रहे हैं। विभाग ने उच्चाधिकारियों व सरकार को सारी स्थिति से अवगत कराया है।