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चिपको आंदोलन लोगों को देता है वृक्षों के महत्व की सीख : भट्ट
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
हिमालय क्षेत्र में मानवीय क्रियाकलापों से हो रहे परिवर्तन के दुष्प्रभावों व वन्य प्राणियों के संरक्षण और विकास के उद्देश्यों से लोगों में जागरूकता लाने के लिए सोमवार को नाहन में एक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया। राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिमला द्वारा नाहन के एसएफडीए हॉल में आयोजित लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला की अध्यक्षता संयुक्त सदस्य सचिव हिमकोस्ट कुणाल सिद्घार्थ ने की।
इस अवसर पर उन्होंने कहाकि हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को संचालित कर रहा है जिनमें जलवायु परिवर्तन केंद्र, सुदूर संवेदी केंद्र, पेटेंट सूचना केंद्र, जैव विविधता बोर्ड आदि प्रमुख हैं।
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उपस्थित विद्यार्थियों को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विद्यार्थी विज्ञान को सरल तरीके से समझें और अपने जीवन में व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाएं। इस मौके पर पर्यावरणविद पद्मश्री, पद्मभूषण, गांधी शांति पुरस्कार विजेता चंडी प्रसाद भट्ट ने हिमालय पर्यावरण एवं विकास के बारे में अपने विचार रखे।
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उन्होंने कहा कि वृक्षों का कटान नदियों में बाढ़ आने का प्रमुख कारण है। उन्होंने चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग पेड़ों को बचाने के लिए उनसे चिपक गए क्योंकि वह वृक्षों के महत्व को जानते थे। उन्होंने बताया कि देश की 45 प्रतिशत भूमि हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा सिंचित होती है। हिमालय देश को जल जीवन और उपजाऊ मिट्टी प्रदान करता है। उन्होंने हिमालय में स्थित ग्लेशियरों के कम होने पर चिंता जाहिर की और घटते ग्लेशियरों से गंगा व ब्रह्मपुत्र पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रोफेसर पीके माथुर ने संरक्षण और विकास के विषय पर व्याख्यान करते हुए कहा कि भारत एक विविध जलवायु वाला प्रदेश है जिस कारण यहां जैव विविधता पाई जाती हैं। विकास के साथ-साथ हमें जैव विविधता एवं विकास की तरफ ध्यान देना चाहिए।
इस अवसर पर अरण्यपाल वन वाईपी गुप्ता, डीएफओ निशांत मंढोत्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक शशिधर, स्नात्कोतर महाविद्यालय की प्रधानाचार्य वीना राठौर, विज्ञान समन्वयक शालू परमार के अलावा विभिन्न स्कूलों के छात्र व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
----चिपको आंदोलन लोगों को देता है वृक्षों के महत्व की सीख : भट्ट
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