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कोलवा गांव में पांच माह से पेयजल संकट
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:35 PM IST
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- फोटो : getty
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संगड़ाह (सिरमौर)। उपमंडल संगड़ाह की ग्राम पंचायत दाना घाटों के ग्राम कोलवा में पिछले पांच महीने से पेयजल संकट गहराया हुआ है। पानी की सप्लाई न आने के कारण गांव के लोग पानी की बूंद बूंद को तरस रहे हैं। ग्रामीणों को नाले का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। इस वजह से गांव के लोगों का अधिकतर समय पानी लाने में ही व्यतीत हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी मवेशियों को पानी पिलाने में आ रही है। अधिकतर मवेशियों को नाले पर ले जाकर पानी पिलाया जा रहा है। लेकिन, खूंटे पर बंधे पशुओं के लिए भी पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
गांव के विवेक मेशवान, विजय सिंह वशिष्ठ, खजान सिंह, रामानंद, कल्याण सिंह, रतन सिंह, पृथ्वी सिंह राजेंद्र ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 15 घरों वाले इस गांव के लोगों को पिछले लंबे समय से यह परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि गांव के लिए बिछाई गई पाइप लाइन जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी कोई सुध नहीं ली जा रही।
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ग्रामीणों को विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पंचायत प्रधान जय प्रकाश ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर गत 26 नवंबर को कोलवा गांव में लोगों के साथ बैठक कर पानी की समस्या के समाधान के लिए पंचायत ने एक पत्र सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में सौंपा था, लेकिन इसके बावजूद भी समस्या ज्यों की त्यों है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक पाठशाला कोलवा में भी पेयजल संकट बरकरार है। हालांकि, पाठशाला के लिए अलग से पाइप लाइन बिछाई हुई है। फिर भी यहां पानी नहीं आ रहा।
उधर, आईपीएच के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि पाइप लाइन काफी पुरानी है। कर्मचारियों की कमी के चलते इस प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। फिर भी इस लाइन को ठीक करने के लिए कर्मचारियों को भेजा जाएगा।
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ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। इस वजह से गांव के लोगों का अधिकतर समय पानी लाने में ही व्यतीत हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी मवेशियों को पानी पिलाने में आ रही है। अधिकतर मवेशियों को नाले पर ले जाकर पानी पिलाया जा रहा है। लेकिन, खूंटे पर बंधे पशुओं के लिए भी पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
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गांव के विवेक मेशवान, विजय सिंह वशिष्ठ, खजान सिंह, रामानंद, कल्याण सिंह, रतन सिंह, पृथ्वी सिंह राजेंद्र ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 15 घरों वाले इस गांव के लोगों को पिछले लंबे समय से यह परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि गांव के लिए बिछाई गई पाइप लाइन जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी कोई सुध नहीं ली जा रही।
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ग्रामीणों को विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पंचायत प्रधान जय प्रकाश ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर गत 26 नवंबर को कोलवा गांव में लोगों के साथ बैठक कर पानी की समस्या के समाधान के लिए पंचायत ने एक पत्र सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में सौंपा था, लेकिन इसके बावजूद भी समस्या ज्यों की त्यों है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक पाठशाला कोलवा में भी पेयजल संकट बरकरार है। हालांकि, पाठशाला के लिए अलग से पाइप लाइन बिछाई हुई है। फिर भी यहां पानी नहीं आ रहा।
उधर, आईपीएच के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि पाइप लाइन काफी पुरानी है। कर्मचारियों की कमी के चलते इस प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। फिर भी इस लाइन को ठीक करने के लिए कर्मचारियों को भेजा जाएगा।