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रेणुका झील में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
Updated Mon, 19 Nov 2018 11:12 PM IST
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ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के उपलक्ष्य पर हरीप्रबोधनी एकादशी के दिन सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान का सिलसिला सोमवार सुबह से ही शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा।
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए थे। सबसे पहले रेणुका जी तीर्थ के संत महात्माओं ने ब्रह्ममहूर्त में शाही स्नान किया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से ऐतिहासिक रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाई। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रेणुका झील में स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन ऐतिहासिक रेणुका झील में स्नान करने से जहां पाप नष्ट होते हैं, वहीं मनोकामना पूरी होती है। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने रेणुका झील की परिक्रमा की और भगवान परशुराम और मां रेणुका मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान रेणुका तीर्थ में स्थित निर्वाण आश्रम, सन्यास आश्रम व ब्रह्मचारी आश्रम में भंडारे लगाए गए।
रेणुका जी तीर्थ में स्नानघाट के समीप रेहड़ी-फड़ी वालों ने अतिक्रमण करके श्रद्धालुओं के लिए परेशानी खड़ी कर दी। इस वर्ष आश्रमों तक रेहड़ी-फड़ी लगाकर सामान बेचते दिखाई दिए। इस कारण श्रद्धालुओं को स्नानघाट तक पहुंचने में भारी असुविधा हुई। लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए थे। सबसे पहले रेणुका जी तीर्थ के संत महात्माओं ने ब्रह्ममहूर्त में शाही स्नान किया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से ऐतिहासिक रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगाई। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रेणुका झील में स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन ऐतिहासिक रेणुका झील में स्नान करने से जहां पाप नष्ट होते हैं, वहीं मनोकामना पूरी होती है। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने रेणुका झील की परिक्रमा की और भगवान परशुराम और मां रेणुका मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान रेणुका तीर्थ में स्थित निर्वाण आश्रम, सन्यास आश्रम व ब्रह्मचारी आश्रम में भंडारे लगाए गए।
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रेणुका जी तीर्थ में स्नानघाट के समीप रेहड़ी-फड़ी वालों ने अतिक्रमण करके श्रद्धालुओं के लिए परेशानी खड़ी कर दी। इस वर्ष आश्रमों तक रेहड़ी-फड़ी लगाकर सामान बेचते दिखाई दिए। इस कारण श्रद्धालुओं को स्नानघाट तक पहुंचने में भारी असुविधा हुई। लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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