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दो-तीन दिन से लग रहे चक्कर, जांच फिर भी नहीं
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:26 PM IST
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संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)। नाम मनीषा...। स्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन की गायनी ओपीडी। ओपीडी में दरवाजे के बाहर खड़ी यह महिला तीन दिन से मेडिकल अस्पताल के चक्कर काट रही है लेकिन जांच का नंबर नहीं लग रहा। अस्पताल में आने वाली कई महिलाओं की यही कहानी है।
जांच के लिए महिलाएं सुबह सात बजे अस्पताल के गेट के पास पहुंच रही हैं लेकिन फिर भी कइयों को निराश होकर बिना जांच के वापस लौटना पड़ रहा है। बुधवार को भी ऐसा ही आलम देखने को मिला। ओपीडी में भारी संख्या में पहुंची महिलाओं के उपचार के लिए महज एक ही चिकित्सक तैनात थी। ऐसे में शाम तक सबकी जांच हुई, इसकी संभावना न के बराबर है।
जिला अस्पताल को खत्म कर नाहन में मेडिकल कॉलेज तो बना दिया गया लेकिन सुविधाएं सरकार मुहैया नहीं करवा रही। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की भारी कमी चल रही है। वर्तमान में यहां महज दो ही चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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इनमें से नाइट ऑफ के चलते बुधवार को एक ही चिकित्सक ड्यूटी पर तैनात रहे जिससे ओपीडी के बाहर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। कुछ महिलाओं की जांच के बाद इमरजेंसी के चलते वह वार्ड में चले गए। ऐसे में महिलाएं घंटों तक इंतजार करती रहीं। लाइन में खड़ी महिलाओं ने अपने नाम बताने से तो इंकार कर दिया लेकिन कई महिलाओं ने बताया कि वह दो-तीन दिनों से लगातार आ रही हैं। जांच के लिए नंबर नहीं लग रहा।
बॉक्स के लिए--
कोई लाइन में तो कोई फर्श पर बैठीं रहीं
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी के बाहर महिलाओं के बैठने तक की माकूल व्यवस्था नहीं है। गायनी में अधिकतर गर्भवती महिलाएं ही पहुंचती हैं। ऐसे में कुछ फर्श पर बैठी अपनी बारी का इंतजार करती रहीं तो कुछ खड़े-खड़े लाइनों में डटी रहीं।
--
क्या कहते हैं चिकित्सक
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर का कहना है कि अस्पताल में वर्तमान में दो ही स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। नाइट ऑफ के चलते बुधवार को एक ही तैनात रहीं। एक चिकित्सक ने त्यागपत्र दे दिया है तो एक अस्वस्थ चल रहे हैं। जबकि एक चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के बारे में आला अधिकारियों को भी पत्राचार किया गया है।
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नाहन (सिरमौर)। नाम मनीषा...। स्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन की गायनी ओपीडी। ओपीडी में दरवाजे के बाहर खड़ी यह महिला तीन दिन से मेडिकल अस्पताल के चक्कर काट रही है लेकिन जांच का नंबर नहीं लग रहा। अस्पताल में आने वाली कई महिलाओं की यही कहानी है।
जांच के लिए महिलाएं सुबह सात बजे अस्पताल के गेट के पास पहुंच रही हैं लेकिन फिर भी कइयों को निराश होकर बिना जांच के वापस लौटना पड़ रहा है। बुधवार को भी ऐसा ही आलम देखने को मिला। ओपीडी में भारी संख्या में पहुंची महिलाओं के उपचार के लिए महज एक ही चिकित्सक तैनात थी। ऐसे में शाम तक सबकी जांच हुई, इसकी संभावना न के बराबर है।
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जिला अस्पताल को खत्म कर नाहन में मेडिकल कॉलेज तो बना दिया गया लेकिन सुविधाएं सरकार मुहैया नहीं करवा रही। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की भारी कमी चल रही है। वर्तमान में यहां महज दो ही चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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इनमें से नाइट ऑफ के चलते बुधवार को एक ही चिकित्सक ड्यूटी पर तैनात रहे जिससे ओपीडी के बाहर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। कुछ महिलाओं की जांच के बाद इमरजेंसी के चलते वह वार्ड में चले गए। ऐसे में महिलाएं घंटों तक इंतजार करती रहीं। लाइन में खड़ी महिलाओं ने अपने नाम बताने से तो इंकार कर दिया लेकिन कई महिलाओं ने बताया कि वह दो-तीन दिनों से लगातार आ रही हैं। जांच के लिए नंबर नहीं लग रहा।
बॉक्स के लिए--
कोई लाइन में तो कोई फर्श पर बैठीं रहीं
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी के बाहर महिलाओं के बैठने तक की माकूल व्यवस्था नहीं है। गायनी में अधिकतर गर्भवती महिलाएं ही पहुंचती हैं। ऐसे में कुछ फर्श पर बैठी अपनी बारी का इंतजार करती रहीं तो कुछ खड़े-खड़े लाइनों में डटी रहीं।
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क्या कहते हैं चिकित्सक
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर का कहना है कि अस्पताल में वर्तमान में दो ही स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। नाइट ऑफ के चलते बुधवार को एक ही तैनात रहीं। एक चिकित्सक ने त्यागपत्र दे दिया है तो एक अस्वस्थ चल रहे हैं। जबकि एक चिकित्सक छुट्टी पर चल रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के बारे में आला अधिकारियों को भी पत्राचार किया गया है।