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बोहल-निगाली क्षेत्र में पर्यटन की हैं अपार संभावनाएं
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:46 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सतौन (सिरमौर)।
क्षेत्र में पड़ रही भीष्ण गर्मी के बीच शिलाई की कमरऊ तहसील के बोहल, निगाली क्षेत्र इन दिनों लोगों के लिए जन्नत बने हुए हैं। निचले इलाकों से लोग यहां सैर सपाटे को पहुंच रहे हैं। बोहल और निगाली में जिला का सबसे बड़ा जंगल है जिसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। यहां का वातावरण सुहावना है। तपती गर्मी में तो यह क्षेत्र किसी जन्नत से कम नहीं लेकिन अफसोस है कि सरकार इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं कर पाई है।
उल्लेखनीय है कि एनएच 707 पर तिलोरधार से 3 किमी दूरी पर यह बोहल गांव बसा है। यहां से लोग बद्रीनाथ, केदारनाथ, चूड़धार की चोटियां देख सकते हैं। यहां पर दिन में 28 डिग्री तापमान रहता है। इन दिनों भी लोग यहां रजाई ओढ़ कर सोते हैं।
क्षेत्र के गुमान शर्मा, दिनेश शर्मा, ज्ञान चंद शर्मा, राजेंद्र शर्मा ने बताया कि यहां की संपर्क सड़क सही नहीं है। इस सड़क को तिलोरधार से बनोर तक निकाला गया है जिससे सीधा उत्तराखंड तक जाया जा सकता है लेकिन प्रदेश सरकार की अनदेखी से यह क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया।
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उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र प्रदेश के किसी भी पर्यटन क्षेत्र से अधिक खूबसूरत है। यहां से हिमाचल की बर्फीली चोटियों को भी देखा जा सकता है। यहां सेब के पौधे लगाए जा रहे हैं। बागवानी के लिए यह उत्तम जगह है।
ग्रामीणों ने बताया कि बावजूद इसके इस क्षेत्र को विकसित करने की ओर कोई ध्यान नहीं है। मुख्यमंत्री के आगमन पर वह एक ज्ञापन इस संदर्भ में उन्हें सौंपेंगे।
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सतौन (सिरमौर)।
क्षेत्र में पड़ रही भीष्ण गर्मी के बीच शिलाई की कमरऊ तहसील के बोहल, निगाली क्षेत्र इन दिनों लोगों के लिए जन्नत बने हुए हैं। निचले इलाकों से लोग यहां सैर सपाटे को पहुंच रहे हैं। बोहल और निगाली में जिला का सबसे बड़ा जंगल है जिसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। यहां का वातावरण सुहावना है। तपती गर्मी में तो यह क्षेत्र किसी जन्नत से कम नहीं लेकिन अफसोस है कि सरकार इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं कर पाई है।
उल्लेखनीय है कि एनएच 707 पर तिलोरधार से 3 किमी दूरी पर यह बोहल गांव बसा है। यहां से लोग बद्रीनाथ, केदारनाथ, चूड़धार की चोटियां देख सकते हैं। यहां पर दिन में 28 डिग्री तापमान रहता है। इन दिनों भी लोग यहां रजाई ओढ़ कर सोते हैं।
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क्षेत्र के गुमान शर्मा, दिनेश शर्मा, ज्ञान चंद शर्मा, राजेंद्र शर्मा ने बताया कि यहां की संपर्क सड़क सही नहीं है। इस सड़क को तिलोरधार से बनोर तक निकाला गया है जिससे सीधा उत्तराखंड तक जाया जा सकता है लेकिन प्रदेश सरकार की अनदेखी से यह क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया।
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उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र प्रदेश के किसी भी पर्यटन क्षेत्र से अधिक खूबसूरत है। यहां से हिमाचल की बर्फीली चोटियों को भी देखा जा सकता है। यहां सेब के पौधे लगाए जा रहे हैं। बागवानी के लिए यह उत्तम जगह है।
ग्रामीणों ने बताया कि बावजूद इसके इस क्षेत्र को विकसित करने की ओर कोई ध्यान नहीं है। मुख्यमंत्री के आगमन पर वह एक ज्ञापन इस संदर्भ में उन्हें सौंपेंगे।
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