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भूमि से वंचित कृषकों को मिले 5 बीघा शामलात भूमि: चौहान
Updated Wed, 18 Oct 2017 07:24 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र
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नाहन (सिरमौर)। शामलात भूमि में हिस्सेदारी न मिलने पर दलित विकास संगठन ने राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में दलित विकास संगठन ने सरकारों के खिलाफ गहरा रोष जताया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जो राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में उनकी मांगें पूरी करने का वायदा करेगा, उसी को समर्थन मिलेगा।
पत्रकारवार्ता में संगठन के संयोजक बीरबल व सदस्य सुंदर सिंह ने कहा कि शामलात भूमि को भू मालिकों को वापस करने के लिए 2001 में एक कानून बना। इससे सीधे तौर पर दलित समुदाय की आजीविका पर गहरा असर पड़ा। इस कानून से भूमिहीन व मुजायरों को नजर अंदाज किया गया। गरीब लोगों के समक्ष पशुचारे की भी समस्या पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 से पहले दलित व गरीब भूमि के मालिक नहीं मुजायरे होते थे जो सीलिंग एक्ट 1972 में भूमि के मालिक बने लेकिन 2001 में तत्कालीन सरकार ने एक कानून बनाकर मुजायरों को दरकिनार कर दिया।
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इससे दलितों की आर्थिकी पर भी गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि 26 जनवरी 1950 की समय सीमा हटाकर भूमालिकों को शामलात भूमि में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। 1972 से पहले के मुजायरों को भू मालिकों के समान शामलात भूमि में हिस्सा मिले। भूमि से वंचित जिन परिवारों के पास कृषि भूमि नहीं है, उन्हें 5 बीघा शामलात भूमि दी जाए। साथ ही जहां पर शामलात भूमि का बंटवारा हुआ है, वहां पर वंचित परिवारों के लिए चरागाह की व्यवस्था भी की जाए।
उन्होंने कहा कि जितनी जमीन के दलित मालिक हैं, उतने ही अनुपात में शामलात भूमि में भी उनकी हिस्सेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि जो भी राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में दलितों की इन मांगों को शामिल करेगा, विधानसभा चुनाव में उन्हें ही समर्थन दिया जाएगा। इस मौके पर विजेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, चंदन सिंह, लायकराम, नेत्र सिंह व नारायण सिंह आदि उपस्थित रहे।
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पत्रकारवार्ता में संगठन के संयोजक बीरबल व सदस्य सुंदर सिंह ने कहा कि शामलात भूमि को भू मालिकों को वापस करने के लिए 2001 में एक कानून बना। इससे सीधे तौर पर दलित समुदाय की आजीविका पर गहरा असर पड़ा। इस कानून से भूमिहीन व मुजायरों को नजर अंदाज किया गया। गरीब लोगों के समक्ष पशुचारे की भी समस्या पैदा हो गई है।
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उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 से पहले दलित व गरीब भूमि के मालिक नहीं मुजायरे होते थे जो सीलिंग एक्ट 1972 में भूमि के मालिक बने लेकिन 2001 में तत्कालीन सरकार ने एक कानून बनाकर मुजायरों को दरकिनार कर दिया।
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इससे दलितों की आर्थिकी पर भी गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि 26 जनवरी 1950 की समय सीमा हटाकर भूमालिकों को शामलात भूमि में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। 1972 से पहले के मुजायरों को भू मालिकों के समान शामलात भूमि में हिस्सा मिले। भूमि से वंचित जिन परिवारों के पास कृषि भूमि नहीं है, उन्हें 5 बीघा शामलात भूमि दी जाए। साथ ही जहां पर शामलात भूमि का बंटवारा हुआ है, वहां पर वंचित परिवारों के लिए चरागाह की व्यवस्था भी की जाए।
उन्होंने कहा कि जितनी जमीन के दलित मालिक हैं, उतने ही अनुपात में शामलात भूमि में भी उनकी हिस्सेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि जो भी राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में दलितों की इन मांगों को शामिल करेगा, विधानसभा चुनाव में उन्हें ही समर्थन दिया जाएगा। इस मौके पर विजेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, चंदन सिंह, लायकराम, नेत्र सिंह व नारायण सिंह आदि उपस्थित रहे।