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स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि और परिवारों को दिए सम्मान
Updated Tue, 12 Jun 2018 12:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
राजगढ़ (सिरमौर)।
राजगढ़ के हाब्बन में आयोजित हीरक जयंती समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को खासतौर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सम्मानित किया। इसमें पझौता आंदोलन के अग्रणी नायक वैद्य सूरत सिंह की धर्मपत्नी सुनैहरो देवी भी शामिल थीं।
हालांकि, सभी स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार समारोह में नहीं आ पाए थे लेकिन समिति ने कहा है कि जो परिवार किन्हीं कारणों से समारोह में नहीं आ पाए उन्हें स्मृति चिन्ह घर पहुंचाकर दिए जाएंगे।
पझौता स्वतंत्रता सेनानी समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी रहे कामना राम, वैद्य सूरत सिंह, चुंचू मियाँ, गुलाब सिंह, बस्ती राम, कली राम, चेत सिंह, घणु राम, पदमा राम, दीप राम, तुलसी राम मेहता, कमाल चंद, जाती राम, सूरत सिंह, सही राम, देवी सिंह, मेहर सिंह व जालम सिंह के परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
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जय प्रकाश चौहान ने बताया कि सभी 69 स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को स्मृति चिन्ह दिए जाएंगेे। जिनके परिवारों के सदस्य आज के समारोह में नहीं आ सके हैं उन्हें उनके घर जाकर यह दिए जाएंगे। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त आदित्य नेगी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र ठाकुर, जिला परिषद सदस्या शकुंतला प्रकाश, परीक्षा चौहान, एसडीएम नरेश वर्मा, डीएसपी दुष्यंत सरपाल आदि उपस्थित थे।
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रसायनिक खादों ने क्षीण की उर्वरकता
राजगढ़ (सिरमौर)। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि रसायनिक खेती का इतिहास मात्र 30-40 साल पुराना है। जबकि भारतीय कृषि का इतिहास दुनिया में सबसे पुराना है। अधिक उत्पाद के लालच में हमने जमीन की उर्वरा शक्ति को क्षीण कर दिया। पर्यावरण दूषित कर दिया और उत्पाद जहरयुक्त कर दिए। उन्होंने भारतीय नस्ल की गाय के पालन से प्राकृतिक कृषि करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक देसी गाय से 30 एकड़ भूमि पर कृषि की जा सकती है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।
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राजगढ़ (सिरमौर)।
राजगढ़ के हाब्बन में आयोजित हीरक जयंती समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को खासतौर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सम्मानित किया। इसमें पझौता आंदोलन के अग्रणी नायक वैद्य सूरत सिंह की धर्मपत्नी सुनैहरो देवी भी शामिल थीं।
हालांकि, सभी स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार समारोह में नहीं आ पाए थे लेकिन समिति ने कहा है कि जो परिवार किन्हीं कारणों से समारोह में नहीं आ पाए उन्हें स्मृति चिन्ह घर पहुंचाकर दिए जाएंगे।
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पझौता स्वतंत्रता सेनानी समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी रहे कामना राम, वैद्य सूरत सिंह, चुंचू मियाँ, गुलाब सिंह, बस्ती राम, कली राम, चेत सिंह, घणु राम, पदमा राम, दीप राम, तुलसी राम मेहता, कमाल चंद, जाती राम, सूरत सिंह, सही राम, देवी सिंह, मेहर सिंह व जालम सिंह के परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
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जय प्रकाश चौहान ने बताया कि सभी 69 स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को स्मृति चिन्ह दिए जाएंगेे। जिनके परिवारों के सदस्य आज के समारोह में नहीं आ सके हैं उन्हें उनके घर जाकर यह दिए जाएंगे। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त आदित्य नेगी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र ठाकुर, जिला परिषद सदस्या शकुंतला प्रकाश, परीक्षा चौहान, एसडीएम नरेश वर्मा, डीएसपी दुष्यंत सरपाल आदि उपस्थित थे।
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रसायनिक खादों ने क्षीण की उर्वरकता
राजगढ़ (सिरमौर)। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि रसायनिक खेती का इतिहास मात्र 30-40 साल पुराना है। जबकि भारतीय कृषि का इतिहास दुनिया में सबसे पुराना है। अधिक उत्पाद के लालच में हमने जमीन की उर्वरा शक्ति को क्षीण कर दिया। पर्यावरण दूषित कर दिया और उत्पाद जहरयुक्त कर दिए। उन्होंने भारतीय नस्ल की गाय के पालन से प्राकृतिक कृषि करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक देसी गाय से 30 एकड़ भूमि पर कृषि की जा सकती है। उन्होंने प्राकृतिक कृषि से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।
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