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स्कूल में मनेगा शहीद कल्याण सिंह मेला, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी
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शिलाई (सिरमौर)। शहीद कल्याण मेमोरियल प्रतियोगिता का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज करते हुए शहीद कल्याण सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खेल मैदान में मेले को लगाने की अनुमति दे दी है। अब 24 से 26 मई तक मेले का आयोजन स्कूल के खेल मैदान में किया जाएगा।
गौरतलब हो कि शहीद कल्याण मेमोरियल प्रतियोगिता व मेले के आयोजन को लेकर सरकार से स्कूल परिसर में अनुमति की गुहार लगाई गई थी। लेकिन, सरकार ने मेला कमेटी के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके चलते मेला कमेटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां सरकार ने नियमों का हवाला देकर स्कूल परिसर के अंदर मेला न लगाने की बात कही। लेकिन, जिरह के बाद उच्च न्यायालय ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया और मेला कमेटी को स्कूल परिसर में मेला लगाने की अनुमति प्रदान कर दी। इससे समूचे लाधी क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
बता दें कि शहीद कल्याण सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में ऑपरेशन विजय को सफल बनाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इसके बाद से वर्ष 2000 से शहीद के नाम से विकास खंड की पंचायत हलाहां के स्कूल मैदान में मेले का आयोजन किया जाता रहा। यहां शहीद की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इस प्रतिमा पर शहीद के जन्मदिवस पर लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं। यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है।
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हैरानी की बात यह है कि दो हजार से वर्ष 2004 तक मेले की सभी तैयारियां जिला प्रशासन की ओर से की जाती रहीं। खर्च भी प्रशासन ही उठाता रहा। लेकिन 2004 के बाद प्रशासन ने इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा। इसके बाद मेला कमेटी ही इसका खर्च उठा रही है।
हद तो इस वर्ष तब हुई जब सरकार ने मेले के लिए इजाजत देने से इंकार कर दिया। जबकि सीसे स्कूल व सड़क का नाम भी शहीद कल्याण सिंह नाम पर ही रखा गया है।
मेला कमेटी के अध्यक्ष कुंदन सिंह चौहान, सचिव जालम सिंह कन्याल, जंगली राम मालवीय, केलव राम सरस्वती, भारत भूषण मोइिल, बिशन सिंह, दौलत राम, जीत सिंह, केदार सिंह, लायक राम ने कहा कि प्रशासन ने क्षेत्र की तो अनदेखी की ही है, शहीदों को भी नहीं छोड़ा है। 2004 के बाद से प्रशासन यहां कोई देखरेख नहीं कर रहा है। उल्टा सरकार ने इस साल मेले की अनुमति देने से भी इंकार कर दिया। इसके चलते उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने मेले की अनुमति दे दी है। अब 24 मई से सीसी स्कूल शहीद कल्याण सिंह मैदान में मेले का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली से लोजामानल, नाया पंजोड़ व हलाहां क्षेत्र के लोग आहत हुए हैं।
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गौरतलब हो कि शहीद कल्याण मेमोरियल प्रतियोगिता व मेले के आयोजन को लेकर सरकार से स्कूल परिसर में अनुमति की गुहार लगाई गई थी। लेकिन, सरकार ने मेला कमेटी के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके चलते मेला कमेटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां सरकार ने नियमों का हवाला देकर स्कूल परिसर के अंदर मेला न लगाने की बात कही। लेकिन, जिरह के बाद उच्च न्यायालय ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया और मेला कमेटी को स्कूल परिसर में मेला लगाने की अनुमति प्रदान कर दी। इससे समूचे लाधी क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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बता दें कि शहीद कल्याण सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में ऑपरेशन विजय को सफल बनाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इसके बाद से वर्ष 2000 से शहीद के नाम से विकास खंड की पंचायत हलाहां के स्कूल मैदान में मेले का आयोजन किया जाता रहा। यहां शहीद की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इस प्रतिमा पर शहीद के जन्मदिवस पर लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं। यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है।
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हैरानी की बात यह है कि दो हजार से वर्ष 2004 तक मेले की सभी तैयारियां जिला प्रशासन की ओर से की जाती रहीं। खर्च भी प्रशासन ही उठाता रहा। लेकिन 2004 के बाद प्रशासन ने इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा। इसके बाद मेला कमेटी ही इसका खर्च उठा रही है।
हद तो इस वर्ष तब हुई जब सरकार ने मेले के लिए इजाजत देने से इंकार कर दिया। जबकि सीसे स्कूल व सड़क का नाम भी शहीद कल्याण सिंह नाम पर ही रखा गया है।
मेला कमेटी के अध्यक्ष कुंदन सिंह चौहान, सचिव जालम सिंह कन्याल, जंगली राम मालवीय, केलव राम सरस्वती, भारत भूषण मोइिल, बिशन सिंह, दौलत राम, जीत सिंह, केदार सिंह, लायक राम ने कहा कि प्रशासन ने क्षेत्र की तो अनदेखी की ही है, शहीदों को भी नहीं छोड़ा है। 2004 के बाद से प्रशासन यहां कोई देखरेख नहीं कर रहा है। उल्टा सरकार ने इस साल मेले की अनुमति देने से भी इंकार कर दिया। इसके चलते उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने मेले की अनुमति दे दी है। अब 24 मई से सीसी स्कूल शहीद कल्याण सिंह मैदान में मेले का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली से लोजामानल, नाया पंजोड़ व हलाहां क्षेत्र के लोग आहत हुए हैं।