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श्री रेणुका में श्रीकृष्ण जन्म देख भावुक हुए लोग
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श्रीकृष्ण की किलकारियों से गूंजा निर्वाण आश्रम
ददाहू में हुआ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। रेणुका जी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में शनिवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर रेणुका जी तीर्थ का निर्वाण आश्रम भगवान श्रीकृष्ण की किलकारियों से गूंज उठा। बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण और वासुदेव की झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। कथा ब्यास आचार्य मोहन चंद्र त्रिपाठी ने कृष्ण जन्मोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि धरती पर बढ़ते पाप और अधर्म को नष्ट करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने मां देवकी की कोख से जन्म लिया। भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही काफी पराक्रमी और बलशाली थे। जब उन्हें मथुरा से नंद गांव ले जाया जा रहा था तो उनके पांव के स्पर्श से ही यमुना का वेग थम गया था। यहां तक कि भारी वर्षा के कारण शेषनाग भी छतरी की तरह तन कर उनकी सुरक्षा में साथ-साथ चलने लगे। पिता वासुदेव ने उन्हें अगली सुबह होने से पहले ही नंद गांव पहुंचकर यशोधा की गोद में भगवान श्रीकृष्ण को थमा दिया। संगीतमयी भागवत कथा का श्रद्धालु जमकर आनंद ले रहे हैं। शनिवार को श्रद्धालुओं को माखन मिसरी का प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर निर्वाण आश्रम के महंत स्वामी रेनेंद्र मुनि, सुखराम मुनि, रेणुका मुनि, बुद्ध, इतवार मुनि सहित अन्य संत महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।
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ददाहू में हुआ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। रेणुका जी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में शनिवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर रेणुका जी तीर्थ का निर्वाण आश्रम भगवान श्रीकृष्ण की किलकारियों से गूंज उठा। बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण और वासुदेव की झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। कथा ब्यास आचार्य मोहन चंद्र त्रिपाठी ने कृष्ण जन्मोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि धरती पर बढ़ते पाप और अधर्म को नष्ट करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने मां देवकी की कोख से जन्म लिया। भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही काफी पराक्रमी और बलशाली थे। जब उन्हें मथुरा से नंद गांव ले जाया जा रहा था तो उनके पांव के स्पर्श से ही यमुना का वेग थम गया था। यहां तक कि भारी वर्षा के कारण शेषनाग भी छतरी की तरह तन कर उनकी सुरक्षा में साथ-साथ चलने लगे। पिता वासुदेव ने उन्हें अगली सुबह होने से पहले ही नंद गांव पहुंचकर यशोधा की गोद में भगवान श्रीकृष्ण को थमा दिया। संगीतमयी भागवत कथा का श्रद्धालु जमकर आनंद ले रहे हैं। शनिवार को श्रद्धालुओं को माखन मिसरी का प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर निर्वाण आश्रम के महंत स्वामी रेनेंद्र मुनि, सुखराम मुनि, रेणुका मुनि, बुद्ध, इतवार मुनि सहित अन्य संत महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।