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तीन विकास खंडों में 20 करोड़ की परियोजना होगी क्रियान्वित
Updated Tue, 13 Feb 2018 10:45 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
पर्यावरण, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सौजन्य से सिरमौर के तीन विकास खंडों पांवटा, पच्छाद और संगड़ाह में किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के लिए 20 करोड़ रुपये की परियोजना वर्ष-2020 तक क्रियान्वित की जा रही है। इसके तहत 30,880 किसान तथा बागवान लाभान्वित होंगे। उपायुक्त ललित जैन ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में आयोजित परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत तीनों खंडों के 30,880 किसानों, बागवानों को 2020 तक प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि किसान तथा बागवान परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती की बारीकियों को जानकर उन्नत खेती कर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकें।
पर्यावरण, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग शिमला के वित्त विशेषज्ञ लोकेंद्र ने कहा कि इस परियोजना के तहत तीनों विकास खंडों में सेब के लिए 30 हेक्टेयर, गुठलीदार पौधों के लिए 20 हेक्टेयर, नींबू प्रजाति के लिए 22 हेक्टेयर, अनार के लिए 21 हेक्टेयर तथा कीवी के पौधे रोपित करने के लिए 20 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इस परियोजना के तहत फलदार पौधे, गड्ढे खोदने, पौधरोपण, बाढ़ लगाने, कीटनाशक, फफूंद नाशक दवाइयों पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
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इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त आदित्य नेगी, उपनिदेशक उद्यान रामलाल कपिल, उपनिदेशक कृषि विद्या सागर, डीडीएम नाबार्ड गौरव शर्मा, परियोजना अधिकारी डीआरडीए देश लता के अतिरिक्त सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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नाहन (सिरमौर)।
पर्यावरण, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सौजन्य से सिरमौर के तीन विकास खंडों पांवटा, पच्छाद और संगड़ाह में किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के लिए 20 करोड़ रुपये की परियोजना वर्ष-2020 तक क्रियान्वित की जा रही है। इसके तहत 30,880 किसान तथा बागवान लाभान्वित होंगे। उपायुक्त ललित जैन ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में आयोजित परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत तीनों खंडों के 30,880 किसानों, बागवानों को 2020 तक प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि किसान तथा बागवान परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती की बारीकियों को जानकर उन्नत खेती कर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकें।
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पर्यावरण, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग शिमला के वित्त विशेषज्ञ लोकेंद्र ने कहा कि इस परियोजना के तहत तीनों विकास खंडों में सेब के लिए 30 हेक्टेयर, गुठलीदार पौधों के लिए 20 हेक्टेयर, नींबू प्रजाति के लिए 22 हेक्टेयर, अनार के लिए 21 हेक्टेयर तथा कीवी के पौधे रोपित करने के लिए 20 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इस परियोजना के तहत फलदार पौधे, गड्ढे खोदने, पौधरोपण, बाढ़ लगाने, कीटनाशक, फफूंद नाशक दवाइयों पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
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इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त आदित्य नेगी, उपनिदेशक उद्यान रामलाल कपिल, उपनिदेशक कृषि विद्या सागर, डीडीएम नाबार्ड गौरव शर्मा, परियोजना अधिकारी डीआरडीए देश लता के अतिरिक्त सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।