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पौड़ीवाला धाम यानि स्वर्ग की दूसरी पौड़ी
Updated Tue, 13 Feb 2018 08:28 PM IST
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शिवरात्रि स्पेशल--
पौड़ीवाला धाम यानि स्वर्ग की दूसरी पौड़ी
मान्यता : हर साल जौ के आकार के समान बढ़ जाता है शिवलिंग
स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी पौड़ीवाला में आज उमड़ेंगे हजारों शिवभक्त
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
महाज्ञानी, महान विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद लंकापति रावण अमरता चाहता था। घोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उसे अमर होने का राज बताया। इसके बाद रावण ने यहां चमत्कारी सीढ़ी बना दी, लेकिन फिर भी उसका सपना पूरा नहीं हो पाया। बात हो रही है स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी माने जाने वाले पौड़ीवाला शिवधाम की।
पांवटा-कालाअंब नेशनल हाइवे के किनारे नाहन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर पौड़ीवाला शिव मंदिर को जाने वाले रास्ते में इस इतिहास को स्वागत बोर्ड में दर्शाया गया है। पौड़ीवाला स्थित इस जगह में आज भी दूसरी पौड़ी विद्यमान है। कहते हैं कि पौड़ीवाला स्थित इस शिवमंदिर में शिव शंकर वास करते हैं और यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण करते हैं। यहां हर साल महाशिवरात्रि पर मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मान्यता है कि हर साल यहां शिवलिंग का आकार जौ समान बढ़ता है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ जाती है। पौड़ीवाला शिवधाम हिमाचल के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के लोगों का भी आस्था का मुख्य केंद्र है। बुधवार को पौड़ीवाला में महाशिवरात्रि मेला लगेगा। मंगलवार की रात से ही भंडारे आदि की तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।
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बाक्स
क्या कहतीं हैं जनश्रुतियां
जनश्रुति के अनुसार हिमाचल के पौड़ीवाला शिव मंदिर का इतिहास लंकापति रावण के साथ जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। कहते हैं ये कहानी उस समय की है, जब श्रीराम अयोध्या के राजा बनने वाले थे। उसी दौरान रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की।
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प्राचीन बावड़ी, जहां से रावण भरता था पानी
रावण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव शंकर भगवान प्रकट हुए और रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने अमरता का वरदान मांगा तो भगवान शिव ने उसे अमर होने की तरकीब बताई। ये तरकीब आसान नहीं थी। भगवान शिव ने कहा था कि रावण को एक ही दिन में पांच चमत्कारी सीढ़ियां बनानी होंगी। इसके बाद उसे अमरता और स्वर्ग में जाने का रास्ता मिल जाएगा लेकिन रावण दो ही सीढ़ियां तैयार कर सके।
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----------हितेश शर्मा
पौड़ीवाला धाम यानि स्वर्ग की दूसरी पौड़ी
मान्यता : हर साल जौ के आकार के समान बढ़ जाता है शिवलिंग
स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी पौड़ीवाला में आज उमड़ेंगे हजारों शिवभक्त
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
महाज्ञानी, महान विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद लंकापति रावण अमरता चाहता था। घोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उसे अमर होने का राज बताया। इसके बाद रावण ने यहां चमत्कारी सीढ़ी बना दी, लेकिन फिर भी उसका सपना पूरा नहीं हो पाया। बात हो रही है स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी माने जाने वाले पौड़ीवाला शिवधाम की।
पांवटा-कालाअंब नेशनल हाइवे के किनारे नाहन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर पौड़ीवाला शिव मंदिर को जाने वाले रास्ते में इस इतिहास को स्वागत बोर्ड में दर्शाया गया है। पौड़ीवाला स्थित इस जगह में आज भी दूसरी पौड़ी विद्यमान है। कहते हैं कि पौड़ीवाला स्थित इस शिवमंदिर में शिव शंकर वास करते हैं और यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण करते हैं। यहां हर साल महाशिवरात्रि पर मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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मान्यता है कि हर साल यहां शिवलिंग का आकार जौ समान बढ़ता है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ जाती है। पौड़ीवाला शिवधाम हिमाचल के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के लोगों का भी आस्था का मुख्य केंद्र है। बुधवार को पौड़ीवाला में महाशिवरात्रि मेला लगेगा। मंगलवार की रात से ही भंडारे आदि की तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।
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क्या कहतीं हैं जनश्रुतियां
जनश्रुति के अनुसार हिमाचल के पौड़ीवाला शिव मंदिर का इतिहास लंकापति रावण के साथ जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। कहते हैं ये कहानी उस समय की है, जब श्रीराम अयोध्या के राजा बनने वाले थे। उसी दौरान रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की।
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प्राचीन बावड़ी, जहां से रावण भरता था पानी
रावण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव शंकर भगवान प्रकट हुए और रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने अमरता का वरदान मांगा तो भगवान शिव ने उसे अमर होने की तरकीब बताई। ये तरकीब आसान नहीं थी। भगवान शिव ने कहा था कि रावण को एक ही दिन में पांच चमत्कारी सीढ़ियां बनानी होंगी। इसके बाद उसे अमरता और स्वर्ग में जाने का रास्ता मिल जाएगा लेकिन रावण दो ही सीढ़ियां तैयार कर सके।
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----------हितेश शर्मा