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किसानों के लिए आर्थिकी का जरिया बनी कालीजीरी
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:33 PM IST
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योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)।
जिला सिरमौर के पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों कालीजीरी की बंपर पैदावार ने इन दिनों किसानों के लिए भारी राहत प्रदान की है। इससे किसानों को अच्छी आमदनी के साथ-साथ आर्थिकी भी सुदृढ़ हो रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल किसानों को कालीजीरी के बाजार में अच्छे भाव मिल रहे हैं।
ददाहू बाजार के आढ़ती इस कालीजीरी को दिल्ली व पंजाब की नामी मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। कालीजीरी की बंपर फसल होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई किसानों ने कालीजीरी का उत्पादन नकदी फसल के रूप में शुरू कर दिया है।
पिछले कई वर्षों से अदरक व अन्य नकदी फसलों से मुंह मोड़ चुके किसानों का रुख अब कालीजीरी की खेती की तरफ बढ़ रहा है। कालीजीरी के उत्पादन में खास बात यह भी है कि इस फसल को जंगली जानवर छूते तक नहीं हैं। वहीं कम मेहनत में ही यह खेती तैयार हो जाती है। इसका स्वाद कड़वा होने के कारण बंदर भी इस फसल को नहीं खा पाते। लिहाजा किसान बेखौफ होकर इसका उत्पादन कर अच्छी आय प्राप्त करने में जुटे हैं।
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गिरिपार के रोनहाट, जरवा, गत्ताधार व सैंज के अलावा सैनधार इलाके के लगभग सभी गांवों में कालीजीरी की खेती की जाती है। जून-जुलाई माह में इसकी बिजाई के बाद अक्तूबर व नवंबर माह में इसकी फसल तैयार हो जाती है। वर्तमान समय में कालीजीरी के भाव 230 रुपये तक पहुंच गए हैं जो किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रहा है। उल्लेखनीय है कि कालीजारी को औषधि के रूप में आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
जम्मू-काश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान में भी कालीजीरी की भारी मांग रहती है। इससे जानवरों के लिए कई दवाएं भी बनती हैं। उधर, ददाहू के एक व्यवसायी जयपाल गर्ग ने बताया कि इस बार कालीजीरी की बंपर पैदावार हुई है। इस जीरी को पड़ोसी राज्यों की अनाज मंडियों के साथ-साथ औषधीय संस्थानों में पहुंचाया जा रहा है। बाहरी राज्यों में इसकी कीमत 230 रुपये प्रति किलो है।
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ददाहू (सिरमौर)।
जिला सिरमौर के पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों कालीजीरी की बंपर पैदावार ने इन दिनों किसानों के लिए भारी राहत प्रदान की है। इससे किसानों को अच्छी आमदनी के साथ-साथ आर्थिकी भी सुदृढ़ हो रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल किसानों को कालीजीरी के बाजार में अच्छे भाव मिल रहे हैं।
ददाहू बाजार के आढ़ती इस कालीजीरी को दिल्ली व पंजाब की नामी मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। कालीजीरी की बंपर फसल होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई किसानों ने कालीजीरी का उत्पादन नकदी फसल के रूप में शुरू कर दिया है।
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पिछले कई वर्षों से अदरक व अन्य नकदी फसलों से मुंह मोड़ चुके किसानों का रुख अब कालीजीरी की खेती की तरफ बढ़ रहा है। कालीजीरी के उत्पादन में खास बात यह भी है कि इस फसल को जंगली जानवर छूते तक नहीं हैं। वहीं कम मेहनत में ही यह खेती तैयार हो जाती है। इसका स्वाद कड़वा होने के कारण बंदर भी इस फसल को नहीं खा पाते। लिहाजा किसान बेखौफ होकर इसका उत्पादन कर अच्छी आय प्राप्त करने में जुटे हैं।
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गिरिपार के रोनहाट, जरवा, गत्ताधार व सैंज के अलावा सैनधार इलाके के लगभग सभी गांवों में कालीजीरी की खेती की जाती है। जून-जुलाई माह में इसकी बिजाई के बाद अक्तूबर व नवंबर माह में इसकी फसल तैयार हो जाती है। वर्तमान समय में कालीजीरी के भाव 230 रुपये तक पहुंच गए हैं जो किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रहा है। उल्लेखनीय है कि कालीजारी को औषधि के रूप में आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
जम्मू-काश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान में भी कालीजीरी की भारी मांग रहती है। इससे जानवरों के लिए कई दवाएं भी बनती हैं। उधर, ददाहू के एक व्यवसायी जयपाल गर्ग ने बताया कि इस बार कालीजीरी की बंपर पैदावार हुई है। इस जीरी को पड़ोसी राज्यों की अनाज मंडियों के साथ-साथ औषधीय संस्थानों में पहुंचाया जा रहा है। बाहरी राज्यों में इसकी कीमत 230 रुपये प्रति किलो है।
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