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डायरिया की चपेट में शिलाई के धंकौली गांव के लोग
Updated Tue, 04 Jul 2017 10:55 PM IST
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शिलाई (सिरमौर)। शिलाई उपमंडल के अंतर्गत धंकौली गांव के 26 परिवार के कई सदस्य उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए हैं। डायरिया की चपेट में आने से कई लोग शिलाई तो कई पांवटा अस्पताल में भर्ती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव का दौरा कर लोगों को जागरुक किया और साफ-सफाई रखने की सलाह दी। वहीं, पानी में भी क्लोरीनेशन करवा दिया गया है।
ग्राम पंचायत नाया के धंकौली गांव में पिछले एक सप्ताह से डायरिया फैला हुआ है। इस कारण 26 परिवारों के कुछ लोगों को छोड़कर लगभग सभी उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए हैं। हालांकि, इनमें से अधिकतर के स्वास्थ्य में अब सुधार हो गया है। मंगलवार को भी शिलाई अस्पताल में विभिन्न क्षेत्रों के छह मरीज पहुंचे। एक ही क्षेत्र में इतने लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। सोमवार को शिलाई खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एवी राघव के नेतृत्व में चिकित्सकों का एक दल धंकौली गांव पहुंचा। इस दल में डॉ. रिषिभा, डॉ. संतोष, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता व अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। चिकित्सकों ने गांव में दवाइयां बांटी तथा पानी को उबालकर पीने की सलाह दी। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एवी राघव ने बताया कि पेयजल स्रोत व भंडारण टैंकों की सफाई कर ब्लीचिंग पाउडर डालने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बारिश का पानी आईपीएच की योजना में मिलने से इस रोग की चपेट में लोग आ रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि धंकौली गांव में फैले डायरिया को लेकर विभाग अलर्ट है। तीन चार दिनों से वहां उल्टी-दस्त के मरीज आ रहे थे। विभाग ने पूरी टीम गांव भेजी है। बीएमओ स्वयं मौके पर गए हैं। ग्रामीणों को दवाइयां वितरित करने के बाद स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
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आईपीएच के सहायक अभियंता नितिन चिनौरी ने कहा कि क्षेत्र में डायरिया फैलने के बाद पानी के टैंकों की सफाई की गई है। बारिश का पानी योजना में मिलने की वजह से यह समस्या आई थी। पानी में क्लोरिनेशन कर दिया गया है। गांव में अब कोई नया मरीज नहीं है।
डायरिया होने पर बरतें यह सावधानी
-अपने आसपास के पेयजल स्रोतों को साफ सुथरा रखे। पानी का समय-समय पर क्लोरिनेशन करते रहें।
-प्राकृतिक जल स्रोत या बावड़ी का पानी पी रहे हैं तो 20 लीटर पानी में क्लोरीन की एक गोली जरूर डालें।
-यदि किसी परिवार के एक भी सदस्य को डायरिया है तो पूरा परिवार पानी उबालकर पीएं।
-बावड़ी और प्राकृतिक जल स्त्रोतों के इर्द-गिर्द सफाई का विशेष ध्यान रखे।
-खुले में शौच न करें। यदि डायरिया है तो उल्टी-दस्त आने पर शौचालय का ही प्रयोग करें।
-उल्टी-दस्त के बाद कमजोरी हो या चक्कर आने लगे तो अस्पताल में चिकित्सकों की सलाह लें।
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ग्राम पंचायत नाया के धंकौली गांव में पिछले एक सप्ताह से डायरिया फैला हुआ है। इस कारण 26 परिवारों के कुछ लोगों को छोड़कर लगभग सभी उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए हैं। हालांकि, इनमें से अधिकतर के स्वास्थ्य में अब सुधार हो गया है। मंगलवार को भी शिलाई अस्पताल में विभिन्न क्षेत्रों के छह मरीज पहुंचे। एक ही क्षेत्र में इतने लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। सोमवार को शिलाई खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एवी राघव के नेतृत्व में चिकित्सकों का एक दल धंकौली गांव पहुंचा। इस दल में डॉ. रिषिभा, डॉ. संतोष, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता व अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। चिकित्सकों ने गांव में दवाइयां बांटी तथा पानी को उबालकर पीने की सलाह दी। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एवी राघव ने बताया कि पेयजल स्रोत व भंडारण टैंकों की सफाई कर ब्लीचिंग पाउडर डालने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बारिश का पानी आईपीएच की योजना में मिलने से इस रोग की चपेट में लोग आ रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि धंकौली गांव में फैले डायरिया को लेकर विभाग अलर्ट है। तीन चार दिनों से वहां उल्टी-दस्त के मरीज आ रहे थे। विभाग ने पूरी टीम गांव भेजी है। बीएमओ स्वयं मौके पर गए हैं। ग्रामीणों को दवाइयां वितरित करने के बाद स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
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आईपीएच के सहायक अभियंता नितिन चिनौरी ने कहा कि क्षेत्र में डायरिया फैलने के बाद पानी के टैंकों की सफाई की गई है। बारिश का पानी योजना में मिलने की वजह से यह समस्या आई थी। पानी में क्लोरिनेशन कर दिया गया है। गांव में अब कोई नया मरीज नहीं है।
डायरिया होने पर बरतें यह सावधानी
-अपने आसपास के पेयजल स्रोतों को साफ सुथरा रखे। पानी का समय-समय पर क्लोरिनेशन करते रहें।
-प्राकृतिक जल स्रोत या बावड़ी का पानी पी रहे हैं तो 20 लीटर पानी में क्लोरीन की एक गोली जरूर डालें।
-यदि किसी परिवार के एक भी सदस्य को डायरिया है तो पूरा परिवार पानी उबालकर पीएं।
-बावड़ी और प्राकृतिक जल स्त्रोतों के इर्द-गिर्द सफाई का विशेष ध्यान रखे।
-खुले में शौच न करें। यदि डायरिया है तो उल्टी-दस्त आने पर शौचालय का ही प्रयोग करें।
-उल्टी-दस्त के बाद कमजोरी हो या चक्कर आने लगे तो अस्पताल में चिकित्सकों की सलाह लें।