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भू-कटाव से रिहायशी मकानों को खतरा

Sun, 16 Sep 2018 10:46 PM IST
Updated Sun, 16 Sep 2018 10:46 PM IST
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भू-कटाव से रिहायशी मकानों को खतरा
नदी में भू-कटाव से पांच दर्जन घरों को खतरा
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मोगीनंद में सलानी नदी के किनारे बसे लोग दहशत में
अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के तहत अपर मोगीनंद इलाके में सलानी नदी के किनारे स्थित लगभग पांच दर्जन घरों को खतरा पैदा हो गया है। नदी की ओर तेजी से भू-कटाव होने के कारण अपर मोगीनंद क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। सलानी नदी में तेजी से हो रहे भू-कटाव का मुख्य कारण नदी में वर्षों से हो रहा अवैध खनन बताया जा रहा है। अस्सी और नब्बे के दशक में रिहायशी क्षेत्र से इस नदी की गहराई 30 से 35 फीट हुआ करती थी जो वर्तमान में बढ़कर लगभग दोगुनी हो चुकी है। ग्रामीण इस समस्या को वर्ष 2013 से सरकार और प्रशासन के समक्ष उठा रहे हैं लेकिन पांच वर्षों से उनकी यह समस्या नहीं सुलझ पाई।
क्या कहते हैं ग्रामीण
1 मोगीनंद निवासी बृजबाला ने बताया कि सलानी नदी से भू-कटाव तेजी से हो रहा है। इसकी वजह से उनके घर को खतरा पैदा हो गया है। यदि बरसात लगातार होती है तो पूरा परिवार दहशत में रहता है। जल्द इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
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2 सौभाग्यवान उर्फ गोलू ने बताया कि नदी में भू-कटाव के चलते नदी के किनारे बसे दर्जनों घरों की सुरक्षा दांव पर लगी है। प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या का निदान करना चाहिए।
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3 स्थानीय निवासी शमशेर सिंह का कहना है कि मोगीनंद में सलानी नदी का विलय मारकंडा नदी में होता है। दोनों नदियों में अवैध खनन कई वर्षों से हो रहा है। इसके परिणाम स्वरूप नदी की गहराई पहले की अपेक्षा दोगुनी हो गई है, जिससे रिहायशी इलाके को भारी खतरा पैदा हो गया है।
4 इकबाल मोहम्मद ने बताया कि नदी की ओर से रिहायशी इलाके की तरफ भू-कटाव होने से जान माल का खतरा पैदा हो गया है। इसका जल्द समाधान नहीं हुआ तो कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है।

5 स्थानीय निवासी परमजीत ने बताया कि सलानी की नदी के कारण काफी सालों से भू-कटाव हो रहा है। नदी का रुख रिहायशी इलाके की तरफ है। इस समस्या को पांच सालों से लगातार प्रशासन और सरकार के समक्ष रखा जा रहा है। कई बार मौका मुआयना करने अधिकारी भी आए लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं।
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