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डीएफओ ने बेटे को सरकारी स्कूल में किया दाखिल
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ददाहू (सिरमौर)। डीएफओ रेणुका ने अपनी बेटे का दाखिला सरकारी नर्सरी स्कूल में करवाकर एक मिसाल पेश की है।
डीएफओ श्रेष्ठानंद ने शनिवार को अपने इकलौते बच्चे भार्गव शर्मा का दाखिला राजकीय केंद्रीय आदर्श पाठशाला ददाहू में करवाया। नवरात्र एवं नव विक्रमी संवत के शुभारंभ पर वह शनिवार को अपनी पत्नी अमिता शर्मा और बेटे को लेकर जब प्राथमिक स्कूल ददाहू पहुंचे तो स्कूल स्टाफ भी दंग रह गया। उन्होंने अपने चार साल के बच्चे को नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाकर स्वयं उसे कक्षा तक छोड़ा। श्रेष्ठानंद शर्मा ने बताया कि सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाना उनकी मजबूरी नहीं है। उनकी मानसिकता सरकारी स्कूलों से जुड़ी है। वह स्वयं भी पहली से जमा दो तक नेरवा के सरकारी स्कूल में पढ़कर ही इस पद पर पहुंचे हैं। इससे आगे की पढ़ाई उन्होंने नौणी विवि से प्राप्त की है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की सीमा से सटे शिमला जिला के छिछरौला गांव के रहने वाले श्रेष्ठानंद शर्मा ने बताया कि नेरवा में उनके पिता पूर्ण चंद शर्मा की दर्जी की दुकान थी, जो अब एक प्रगतिशील किसान हैं। उनके गांव में आज तक भी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। घरेलू परिस्थितियां ऐसी थी कि सरकारी स्कूल से ही शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी।
उधर, प्राथमिक स्कूल ददाहू की सीएचटी शांति चौहान और बीआरसी मनोज कुमार ने बताया कि एक उच्च अधिकारी के पद पर होने के बावजूद भी उनका यह प्रयास प्रेरणादायक है। उनके इस कदम से अन्य सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सीख मिलेगी। अधिकतर लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की ओर अग्रसर होंगे।
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डीएफओ श्रेष्ठानंद ने शनिवार को अपने इकलौते बच्चे भार्गव शर्मा का दाखिला राजकीय केंद्रीय आदर्श पाठशाला ददाहू में करवाया। नवरात्र एवं नव विक्रमी संवत के शुभारंभ पर वह शनिवार को अपनी पत्नी अमिता शर्मा और बेटे को लेकर जब प्राथमिक स्कूल ददाहू पहुंचे तो स्कूल स्टाफ भी दंग रह गया। उन्होंने अपने चार साल के बच्चे को नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाकर स्वयं उसे कक्षा तक छोड़ा। श्रेष्ठानंद शर्मा ने बताया कि सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाना उनकी मजबूरी नहीं है। उनकी मानसिकता सरकारी स्कूलों से जुड़ी है। वह स्वयं भी पहली से जमा दो तक नेरवा के सरकारी स्कूल में पढ़कर ही इस पद पर पहुंचे हैं। इससे आगे की पढ़ाई उन्होंने नौणी विवि से प्राप्त की है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की सीमा से सटे शिमला जिला के छिछरौला गांव के रहने वाले श्रेष्ठानंद शर्मा ने बताया कि नेरवा में उनके पिता पूर्ण चंद शर्मा की दर्जी की दुकान थी, जो अब एक प्रगतिशील किसान हैं। उनके गांव में आज तक भी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। घरेलू परिस्थितियां ऐसी थी कि सरकारी स्कूल से ही शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी।
उधर, प्राथमिक स्कूल ददाहू की सीएचटी शांति चौहान और बीआरसी मनोज कुमार ने बताया कि एक उच्च अधिकारी के पद पर होने के बावजूद भी उनका यह प्रयास प्रेरणादायक है। उनके इस कदम से अन्य सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सीख मिलेगी। अधिकतर लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की ओर अग्रसर होंगे।
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