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श्री रेणुका जी में त्रिवेणी संगम पर उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Sun, 18 Nov 2018 10:35 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : amarujala
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ददाहू (सिरमौर)। ढोल-नगाड़े, नरसिंगे और बैंड बाजे की धुन। आकर्षक रूप से सुसज्जित पालकियों में विराजमान भगवान परशु राम। चारो ओर मां रेणुका और भगवान परशुराम के जयघोष। ददाहू से लेकर श्री रेणुका जी तक वातावरण भक्तिमय हो गया। जहां-जहां से शोभायात्रा लोगों ने पुष्पवर्षा कर अपने आराध्य देवता का स्वागत किया। वहीं, नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि की कामना की।
उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री रेणुका जी में रविवार को अंतरराष्ट्रीय रेणुका उत्सव शुरू हो गया। छह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान विभिन्न प्रकार के आयोजन होंगे। शाम को होने वाली सांस्कृतिक संध्या में स्टार कलाकारों के अलावा हिमाचल लोक कलाकार दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। रविवार को मां-पुत्र के प्रतीक इस उत्सव में शरीक होने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे। ददाहू बाजार के समीप गिरि नदी के पवित्र तट पर पहुंचीं देव पालकियां दोपहर बाद यहां से रेणुका के लिए रवाना हुईं। देर शाम रेणुका जी स्थित त्रिवेणी संगम पर मां और पुत्र का भव्य मिलन हुआ। इस भव्य मिलन को देखकर श्रद्धालुओं की भीड़ भाव-विभोर हो गई। मान्यता है कि वर्ष में एक बार पुत्र परशुराम अपनी मां रेणुका जी से मिलने के लिए यहां पहुंचते हैं।
अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले की चकाचौंध व साजो सजा से इस वर्ष जलाल पुल अछूता रह गया। धारटीधार क्षेत्र को ददाहू से जोड़ने वाले 280 मीटर लंबे इस पुल पर रंगरोगन करना तो दूर साफ-सफाई तक नहीं की गई। जबकि गिरि पुल को नई नवेली दुल्हन की तरह सजाया और संवारा गया है।
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अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले में पहले दिन यात्रियों को मुफ्त बस सेवा का लाभ नहीं मिल पाया। मेले के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ददाहू में गिरि नदी के किनारे उतार दिया गया। लेकिन, निगम की मुफ्त बस सेवा को बस अड्डे पर खड़ा रखा गया। रविवार को अपने वाहनों के माध्यम से बाहर से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को ददाहू से रेणुका तक पैदल सफर तय करना पड़ा। विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मेले तक पैदल सफर करने के लिए अस्थायी पुल का निर्माण भी नहीं किया गया और यात्रियों को मुफ्त बस सेवा का भी लाभ नहीं मिला।
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उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री रेणुका जी में रविवार को अंतरराष्ट्रीय रेणुका उत्सव शुरू हो गया। छह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान विभिन्न प्रकार के आयोजन होंगे। शाम को होने वाली सांस्कृतिक संध्या में स्टार कलाकारों के अलावा हिमाचल लोक कलाकार दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। रविवार को मां-पुत्र के प्रतीक इस उत्सव में शरीक होने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे। ददाहू बाजार के समीप गिरि नदी के पवित्र तट पर पहुंचीं देव पालकियां दोपहर बाद यहां से रेणुका के लिए रवाना हुईं। देर शाम रेणुका जी स्थित त्रिवेणी संगम पर मां और पुत्र का भव्य मिलन हुआ। इस भव्य मिलन को देखकर श्रद्धालुओं की भीड़ भाव-विभोर हो गई। मान्यता है कि वर्ष में एक बार पुत्र परशुराम अपनी मां रेणुका जी से मिलने के लिए यहां पहुंचते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले की चकाचौंध व साजो सजा से इस वर्ष जलाल पुल अछूता रह गया। धारटीधार क्षेत्र को ददाहू से जोड़ने वाले 280 मीटर लंबे इस पुल पर रंगरोगन करना तो दूर साफ-सफाई तक नहीं की गई। जबकि गिरि पुल को नई नवेली दुल्हन की तरह सजाया और संवारा गया है।
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अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले में पहले दिन यात्रियों को मुफ्त बस सेवा का लाभ नहीं मिल पाया। मेले के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ददाहू में गिरि नदी के किनारे उतार दिया गया। लेकिन, निगम की मुफ्त बस सेवा को बस अड्डे पर खड़ा रखा गया। रविवार को अपने वाहनों के माध्यम से बाहर से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को ददाहू से रेणुका तक पैदल सफर तय करना पड़ा। विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मेले तक पैदल सफर करने के लिए अस्थायी पुल का निर्माण भी नहीं किया गया और यात्रियों को मुफ्त बस सेवा का भी लाभ नहीं मिला।