{"_id":"5b13fe394f1c1b996e8b6351","slug":"101528036921-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक्सरे मशीन खराब, निजी क्लीनिकों में लग रही मोटी चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक्सरे मशीन खराब, निजी क्लीनिकों में लग रही मोटी चपत
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
डॉ. यशवंत सिंह मेडिकल कॉलेज नाहन में सुविधाओं के नाम पर सरकार कुछ खास नहीं जुटा पाई है। जिला अस्पताल की जगह मेडिकल कॉलेज बनाए जाने से लोगों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा लेकिन हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पुरानी आउट डेटिड मशीनरियों के सहारे प्रदेश का यह नया मेडिकल कॉलेज चल रहा है।
कॉलेज में प्रशिक्षु चिकित्सकों का दूसरा बैच चल रहा है लेकिन मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी नई मशीनरियां तक नहीं खरीदी गईं। परिणाम स्वरूप बार-बार मशीनरियां खराब होने से लोग निजी क्लीनिकों का रुख करने को विवश हैं।
अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन पहले से ही खराब चल रही है। जबकि पिछले करीब एक सप्ताह से मेडिकल कॉलेज में एक्सरे तक नहीं हो पा रहे। चिकित्सक के परामर्श के बाद मरीज निजी क्लीनिकों में मोटी फीस देकर एक्सरे करवाने को विवश हैं।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि एक्सरे मशीन में फिल्म प्रिंट नहीं हो रही। शुक्रवार को भी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक से परामर्श के बाद कई लोगों को निजी क्लीनिकों में एक्सरे करवाने पड़े। मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल की मशीनरियों से ही काम चलाया जा रहा है। सीटी स्कैन मशीन वर्षों पुरानी है जिसकी मरम्मत पर ही सालाना 15 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि एक्सरे मशीन भी जिला अस्पताल की ही चल रही है। इसके अलावा टीबी जांच को लगाई गई सीबीनॉट मशीन भी उस वक्त लगाई गई है, जब यहां जिला अस्पताल हुआ करता था।
बॉक्स के लिए---
पहले क्यों नहीं खरीदी र्गईं मशीनें
सवाल यह उठ रहा है कि मेडिकल कॉलेज शुरू करने से पहले यहां मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं। कॉलेज चलाने से पहले यदि मशीनरियां बदल दी जाती तो आज लोगों को इन दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। जिला अस्पताल को मर्ज किए बगैर ही नया मेडिकल कॉलेज अलग से बनता तो यहां की सुविधाओं में इजाफा हो जाता लेकिन जिला अस्पताल की जगह मेडिकल कॉलेज बनने के बाद चिकित्सक तो बढ़ गए, लेकिन मशीनें वही पुरानी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर कहते हैं कि मशीन एक्सरे मशीन ठीक है। उसका प्रिंटर काम नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एक्सरे किए जा रहे हैं। सिर्फ फिल्म नहीं मिल रही। वहीं, प्रिंसिपल डॉ. जयश्री ने बताया कि कॉलेज में एमसीआई के नियमानुसार नई मशीनरियां खरीदी जानी है। इस बारे सरकार से मामला उठाया गया है। कॉलेज में जो भी जरूरतें हैं, उनकी लिस्ट सरकार को दी गई है।
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)।
डॉ. यशवंत सिंह मेडिकल कॉलेज नाहन में सुविधाओं के नाम पर सरकार कुछ खास नहीं जुटा पाई है। जिला अस्पताल की जगह मेडिकल कॉलेज बनाए जाने से लोगों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा लेकिन हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। पुरानी आउट डेटिड मशीनरियों के सहारे प्रदेश का यह नया मेडिकल कॉलेज चल रहा है।
कॉलेज में प्रशिक्षु चिकित्सकों का दूसरा बैच चल रहा है लेकिन मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी नई मशीनरियां तक नहीं खरीदी गईं। परिणाम स्वरूप बार-बार मशीनरियां खराब होने से लोग निजी क्लीनिकों का रुख करने को विवश हैं।
विज्ञापन
अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन पहले से ही खराब चल रही है। जबकि पिछले करीब एक सप्ताह से मेडिकल कॉलेज में एक्सरे तक नहीं हो पा रहे। चिकित्सक के परामर्श के बाद मरीज निजी क्लीनिकों में मोटी फीस देकर एक्सरे करवाने को विवश हैं।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि एक्सरे मशीन में फिल्म प्रिंट नहीं हो रही। शुक्रवार को भी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक से परामर्श के बाद कई लोगों को निजी क्लीनिकों में एक्सरे करवाने पड़े। मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल की मशीनरियों से ही काम चलाया जा रहा है। सीटी स्कैन मशीन वर्षों पुरानी है जिसकी मरम्मत पर ही सालाना 15 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि एक्सरे मशीन भी जिला अस्पताल की ही चल रही है। इसके अलावा टीबी जांच को लगाई गई सीबीनॉट मशीन भी उस वक्त लगाई गई है, जब यहां जिला अस्पताल हुआ करता था।
बॉक्स के लिए---
पहले क्यों नहीं खरीदी र्गईं मशीनें
सवाल यह उठ रहा है कि मेडिकल कॉलेज शुरू करने से पहले यहां मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं। कॉलेज चलाने से पहले यदि मशीनरियां बदल दी जाती तो आज लोगों को इन दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। जिला अस्पताल को मर्ज किए बगैर ही नया मेडिकल कॉलेज अलग से बनता तो यहां की सुविधाओं में इजाफा हो जाता लेकिन जिला अस्पताल की जगह मेडिकल कॉलेज बनने के बाद चिकित्सक तो बढ़ गए, लेकिन मशीनें वही पुरानी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके पराशर कहते हैं कि मशीन एक्सरे मशीन ठीक है। उसका प्रिंटर काम नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एक्सरे किए जा रहे हैं। सिर्फ फिल्म नहीं मिल रही। वहीं, प्रिंसिपल डॉ. जयश्री ने बताया कि कॉलेज में एमसीआई के नियमानुसार नई मशीनरियां खरीदी जानी है। इस बारे सरकार से मामला उठाया गया है। कॉलेज में जो भी जरूरतें हैं, उनकी लिस्ट सरकार को दी गई है।