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अल्ट्रासाउंड तो दूर एक्सरे तक की नहीं सुविधा
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:49 PM IST
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शिलाई (सिरमौर)।
हजारों की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाले उपमंडल शिलाई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लोगों को पर्याप्त सेवाएं नहीं मिल रही। हालात यह है कि इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे तक नहीं हो रहे।
इलाके में कोई निजी लैब भी नहीं है जिस वजह से लोगों को विभिन्न टेस्ट, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कई किलोमीटर दूर पांवटा अस्पताल या नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में शिलाई की स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा गूंजने लगा है।
शिलाई की स्वास्थ्य सुविधाओं पर संतोष नहीं किया जा सकता। गायनी विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से यहां की महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। लोगों की मांग है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित किए जाएं लेकिन राजनीतिज्ञों ने इस पर गौर नहीं किया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में महज दो ही चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। जबकि यहां की आबादी के हिसाब से यहां पर चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को भरने के साथ ही और पद सृजित किए जाने चाहिए।
इस अस्पताल में शिलाई ही नहीं बल्कि उत्तराखंड से भी कुछ पंचायतों के लोग इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में डेंटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ का होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने की वजह से लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। अस्पताल में एक्सरे तक की कोई सुविधा नहीं है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर पांवटा का रुख करना पड़ता है, जहां समय की बर्बादी के साथ ही उनका खर्चा भी अधिक हो रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी यहां नितांत आवश्यकता है।
बॉक्स के लिए---
गर्भवती महिलाओं को दिक्कत
इलाके की गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। अस्पताल में न तो गायनी विशेषज्ञ है और न ही अल्ट्रासाउंड। इस वजह से गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पांवटा साहिब पहुंचाना पड़ रहा है। यहां तक कि कई लोग तो उत्तराखंड के देहरादून जाने को विवश हो रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सरे तकनीशियन की जल्द तैनाती हो रही है। जबकि शिशु रोग विशेषज्ञ का वहां पर पद सृजित नहीं है।
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हजारों की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाले उपमंडल शिलाई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लोगों को पर्याप्त सेवाएं नहीं मिल रही। हालात यह है कि इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे तक नहीं हो रहे।
इलाके में कोई निजी लैब भी नहीं है जिस वजह से लोगों को विभिन्न टेस्ट, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कई किलोमीटर दूर पांवटा अस्पताल या नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में शिलाई की स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा गूंजने लगा है।
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शिलाई की स्वास्थ्य सुविधाओं पर संतोष नहीं किया जा सकता। गायनी विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से यहां की महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। लोगों की मांग है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित किए जाएं लेकिन राजनीतिज्ञों ने इस पर गौर नहीं किया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में महज दो ही चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। जबकि यहां की आबादी के हिसाब से यहां पर चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को भरने के साथ ही और पद सृजित किए जाने चाहिए।
इस अस्पताल में शिलाई ही नहीं बल्कि उत्तराखंड से भी कुछ पंचायतों के लोग इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में डेंटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ का होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने की वजह से लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। अस्पताल में एक्सरे तक की कोई सुविधा नहीं है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर पांवटा का रुख करना पड़ता है, जहां समय की बर्बादी के साथ ही उनका खर्चा भी अधिक हो रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी यहां नितांत आवश्यकता है।
बॉक्स के लिए---
गर्भवती महिलाओं को दिक्कत
इलाके की गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। अस्पताल में न तो गायनी विशेषज्ञ है और न ही अल्ट्रासाउंड। इस वजह से गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पांवटा साहिब पहुंचाना पड़ रहा है। यहां तक कि कई लोग तो उत्तराखंड के देहरादून जाने को विवश हो रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सरे तकनीशियन की जल्द तैनाती हो रही है। जबकि शिशु रोग विशेषज्ञ का वहां पर पद सृजित नहीं है।