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Shimla Yug Murder Case: हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, युग के पिता विनोद ने दायर की एसएलपी

Fri, 12 Dec 2025 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 12 Dec 2025 06:00 AM IST
सार

Shimla Yug Murder Case: राजधानी शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले में युग के पिता विनोद गुप्ता ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एसएलपी दायर की है। पढ़ें पूरी खबर...

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Shimla Yug Murder Case High Court decision has been challenged in the Supreme Court
शिमला युग हत्याकांड मामला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले में हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में एसएलपी दायर की है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

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23 सितंबर को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए एक दोषी तेजिंद्र पाल को बरी कर दिया था, जबकि दो की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। विनोद गुप्ता ने कहा कि युग की हत्या में जिस आरोपी की प्रमुख संलिप्तता थी, उसे ही बरी कर दिया है। पांच सितंबर 2018 को चार साल के मासूम युग की हत्या मामले में जिला अदालत ने तेजिंद्र पाल, चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी को दोषी करार देने के बाद फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद मामला पुष्टिकरण के लिए हाईकोर्ट भेजा था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोषी चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया। सबूत के अभाव में तीसरे दोषी तेजिंद्र पाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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यह है मामला
शिमला के राम बाजार निवासी विनोद गुप्ता के बेटे युग का 14 जून 2014 को अपहरण किया गया था। सीआईडी जांच के अनुसार आरोपी उसे राम चंद्रा चौक के पास एक किराये के मकान में ले गए। यहां उन्होंने युग को यातनाएं दीं। हफ्ते भर मासूम को तड़पाने के बाद आरोपियों ने उसे भराड़ी में नगर निगम के पेयजल टैंक में जिंदा ही फेंक दिया। 22 अगस्त 2016 को विक्रांत बख्शी की निशानदेही पर सीआईडी ने टैंक के अंदर और बाहर से युग ही हड्डियां बरामद कीं। इसके बाद राम बाजार के चंद्र शर्मा और तेजिंद्र पाल की गिरफ्तारी हुई। 25 अक्तूबर 2016 को सभी साक्ष्य जुटाकर सीआईडी ने अदालत में चार्जशीट पेश की। ट्रायल में 100 से अधिक गवाहों की गवाही समेत अन्य साक्ष्य के आधार पर 5 सितंबर को जिला अदालत ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।

 
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