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Shimla: 109 साल बाद सत्यानंद स्टोक्स के पोते दिखा रहे बागवानों को राह, बागवानी सचिव पालरासू ने भी की सराहना

Sat, 08 Nov 2025 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा विश्वास भारद्वाज, शिमला।
विश्वास भारद्वाज, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 08 Nov 2025 06:00 AM IST
सार

शिमला के थानाधार में जिस जगह सेब का पहला पौधा लगाया था, वहीं उनके पोते विजय स्टोक्स ने वैज्ञानिक पद्धति से बगीचा तैयार किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Shimla After 109 years Satyanand Stokes grandson is showing the way to gardeners
सेब बागवानी को लेकर चर्चा करते बागवानी विभाग के सचिव सी पालरासू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल में सेब के जनक सत्यानंद स्टोक्स के पोते प्रदेश के बागवानों को राह दिखा रहे हैं। शिमला के थानाधार में जिस जगह सेब का पहला पौधा लगाया था, वहीं उनके पोते विजय स्टोक्स ने वैज्ञानिक पद्धति से बगीचा तैयार किया है। विजय स्टोक्स के थानाधार स्थित बगीचे में अभी भी पौधे सेब से लदे हैं। इस सेब सीजन में अल्टरनेरिया से जहां अगस्त में ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में सेब के पेेड़ों से पत्ते झड़ गए थे, विजय स्टोक्स के बगीचे में इसका कोई प्रभाव नहीं दिखता।

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थानाधार में विजय स्टोक्स के बगीचे का प्रबंधन देखकर प्रदेश के बागवानी सचिव सी पालरासू भी हैरान रह गए। स्टोन फ्रूट कॉन्क्लेव के बाद बागवानी विभाग के सचिव सी पालरासु ने आईआईटी कानपुर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर 86 वर्षीय विजय स्टोक्स के बगीचे का दौरा कर उनकी बागवानी तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। विजय स्टोक्स ने बताया कि सही गुरु, सही किस्म और सही पौध (प्लांटिंग मटीरियल) ही सफल बागवानी का मंत्र है। यदि बगीचे में विशेषज्ञों की सलाह से काम किया जाए, ऊंचाई और जलवायु के अनुसार सही किस्म लगाई जाए और विश्वसनीय पौध लगाई जाए तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता।

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विजय स्टोक्स ने कहा कि देश और विदेश के जानकार वैज्ञानिकों ने बगीचा लगाने और सेब उगाने को लेकर उन्हें जो बताया, उन्होंने सिर्फ वही किया। बागवानी विभाग के सचिव सी पालरासु ने बताया कि विजय स्टोक्स ने बेहतर तरीके से बगीचा तैयार किया है। विजय का मंत्र है कि जानकार वैज्ञानिक की सलाह से जो बागवानी करेगा, वही सफल होगा। बागवानी विभाग भी प्रदेश के बागवानों से यही आग्रह कर रहा है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली जानकारी से बचें और अपने नजदीकी बागवानी विशेषज्ञ की सलाह पर ही काम करें।

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सत्यानंद स्टोक्स अमेरिका से लाए थे सेब के पौधे
हिमाचल में सेब की 5,000 करोड़ रुपये की आर्थिकी का श्रेय सत्यानंद स्टोक्स को जाता है। उन्होंने अमेरिका के लुसियाना से पौधे लाकर थानाधार के बारूबाग में 6 नवंबर 1916 को सेब का बगीचा तैयार किया था। सेब की तीन किस्मों रेड, रॉयल व गोल्डन डिलिशियस से हिमाचल में सेब बागवानी की शुरुआत हुई। सत्यानंद स्टोक्स का वास्तविक नाम सैमुअल एवास स्टोक्स था। उनका जन्म 16 अगस्त 1882 को अमेरिका में हुआ। उनके पिता इंजीनियर थे। सत्यानंद हिमाचल की पूर्व बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स के ससुर थे। सत्यानंद स्टोक्स ने दो बीघा जमीन पर सेब की व्यावसायिक खेती शुरू की थी और स्थानीय लोगों को भी अपनी जमीन में सेब लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
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