{"_id":"6acfb85f8ec8ba1d57020d38","slug":"relief-from-the-central-govt-additional-time-granted-to-address-shortcomings-in-road-construction-in-himachal-2026-10-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र सरकार ने दी राहत: जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण की कमियां दूर करने को मिलेगा अतिरिक्त समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र सरकार ने दी राहत: जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण की कमियां दूर करने को मिलेगा अतिरिक्त समय
Thu, 15 Oct 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 15 Oct 2026 05:30 AM IST
सार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़कों में गुणवत्ता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए निर्धारित छह महीने की अवधि कई मामलों में कम पड़ रही थी।
विज्ञापन
जनजातीय क्षेत्र की सड़क(फाइल)।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण सड़क निर्माण और मरम्मत के काम प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़कों में गुणवत्ता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए निर्धारित छह महीने की अवधि कई मामलों में कम पड़ रही थी। अब केंद्र सरकार ने गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों पर सुधारात्मक कार्रवाई पूरी करने और रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा बढ़ाकर एक साल कर दी है। इससे प्रदेश के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की कमियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
विज्ञापन
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी के निदेशक (परियोजना-तीन) सुनील कुमार ने पत्र से संशोधित समय-सीमा की जानकारी दी है। इसके तहत राष्ट्रीय गुणवत्ता निगरानीकर्ताओं के निरीक्षण में दर्ज आपत्तियों पर सुधारात्मक कार्रवाई पूरी करने और कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने के लिए अब निरीक्षण या रिपोर्ट की तारीख से एक साल का समय मिलेगा। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा जिले के पांगी-भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत करना चुनौतीपूर्ण है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, भारी बर्फबारी, भूस्खलन और प्रतिकूल मौसम के कारण कई बार निर्माण कार्य लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं। सर्दियों में सड़कें बंद होने से निर्माण सामग्री और मशीनरी पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गुणवत्ता निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को छह महीने के भीतर दूर करना कई मामलों में कठिन होता है।
विज्ञापन
तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए बदली समय-सीमा
राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी के अनुसार, छह महीने की समय-सीमा गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने और उन्हें लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने के लिए निर्धारित की थी। हालांकि, कुछ तकनीकी रूप से जटिल मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई पूरी करने और उसका सत्यापन करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है। प्रतिकूल मौसम और निर्माण स्थलों से जुड़ी परिस्थितियां भी काम पूरा करने में बाधा बनती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
कमियां दूर किए बिना भुगतान नहीं
समय-सीमा बढ़ाने के बावजूद गुणवत्ता नियंत्रण के प्रावधान लागू रहेंगे। कार्रवाई रिपोर्ट लंबे समय तक लंबित रहने पर ऑनलाइन प्रबंधन, निगरानी एवं लेखांकन प्रणाली (ओएमएमएएस) में भौतिक प्रगति दर्ज करने पर रोक लगाने का प्रावधान जारी रहेगा। गुणवत्ता संबंधी कमियां दूर नहीं करने पर भुगतान भी रोका जा सकता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि संशोधित समय-सीमा केवल निर्माणाधीन कार्यों पर लागू होगी। पहले से पूरे हो चुके कार्यों और ऐसी कमियों के मामलों में, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता, पुराने प्रावधान ही लागू रहेंगे।