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Rampur Bushahar News: हर बार आश्वासनों में राहत, सेब सीजन में खस्ताहाल सड़कें बन जाती हैं आफत
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जिला परिषद वार्ड नरैण की नरैण पंचायत में धंसती जा रही सडक़। संवाद
चुनावी मुद्दा : जिला परिषद वार्ड नरैण में कब दूर होंगी ग्रामीणों की मुश्किलें, अव्यवस्थाओं से जूझ रहे ग्रामीण
. 15 पंचायतों के ग्रामीण सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
. सेब बहुल क्षेत्र की सड़कें कई माह तक रहती हैं बंद, सेब सीजन हो रहा प्रभावित
. सेरीपुल, रामपुर-रोहड़ू, दरकाली समेत अन्य सड़कों की हालत बनी दयनीय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
शिमला जिला के जिला परिषद वार्ड नंबर-3 के ग्रामीण आज भी दशकों पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बात यातायात व्यवस्था की हो, किसानी-बागवानी, पशुपालन, शिक्षा या फिर स्वास्थ्य की। हर क्षेत्र में बिगड़ी व्यवस्था से ग्रामीण मायूस हैं। चुनाव के दौरान हर बार ग्रामीणों को बदहाल व्यवस्था को सुधारने के आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद ग्रामीणों की समस्याएं जस की तस रहती हैं। यहां सबसे अधिक समस्या खस्ताहा सड़कों से हैं। सेब सीजन के दौरान खस्ताहाल सड़कें बागवानों के लिए आफत बन जाती हैं। जिला परिषद वार्ड-3 नरैण भौगोलिक दृष्टि से काफी पिछड़ा और दुर्गम क्षेत्र है। वार्ड की अधिकांश पंचायतें दुर्गम और सीमांत क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। वार्ड में रामपुर और ननखड़ी विकास खंड की लैलन, मुनिश, भड़ावली, नरैण, बाहली, देवनगर, पलजारा, दत्तनगर, तकलेच, दरकाली और काशापाट, नीरथ, मझेवटी और थैली चकटी पंचायतें शामिल हैं। इन 15 पंचायतों में अधिकतर ग्रामीणों की आर्थिकी का साधन सेब उत्पादन है। हर वर्ष यहां सेब की 6 से 8 लाख पेटियों का उत्पादन होता है। बागवान वर्षभर सेब तैयार करने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन जब सेब को मंडी भेजने का समय आता है, तो मुख्य सड़कें बंद हो जाती हैं। 12/20 क्षेत्र को जोड़ने वाली तकलेच-देवठी सड़क बरसात के समय बंद हो जाती है। सेब सीजन के दौरान हर वर्ष सेरीपुल में कई-कई महीने तक सड़क बंद रहती है।
यही हाल रामपुर को रोहड़ू उपमंडल से जोड़ने वाली सड़क का है। नरैण में कई वर्षों से सड़क लगातार धंस रही है। क्षेत्र की दरकाली, भद्राश ब्रांदली और काशापाट सड़क की हालत भी बदतर बनी हुई है। ऐसे में हजारों बागवानों को अपनी नकदी फसल मंडी पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। बागवानों को अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक सड़कों का इस्तेमाल करना पड़ता है, लेकिन इन सड़कों पर फसल भेजने से बागवानों को खासी आर्थिक चपत लग रही है। हर साल बागवान सड़कों की दुर्दशा से जूझ रहे हैं।
यही हाल क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था का भी है। क्षेत्र के सीएचसी तकलेच, स्वास्थ्य केंद्र काशापाट, मुनिश और बाहली में चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। मामूली सी बीमारी पर भी 40 से 50 किलोमीटर का सफर तय कर रामपुर पहुंचना पड़ रहा है। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से सबसे अधिक परेशानी मरीजों को पेश आ रही है। पशु पालन विभाग की बात करें तो पशु चिकित्सालय तकलेच समेत कई औषधालयों में रिक्त पदों से पशुपालकों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। समय पर पशुओं को उपचार नहीं मिल पाता है। शिक्षा व्यवस्था का भी यही हाल है। क्षेत्र के काशापाट, तकलेच, मुनिश, नरैण, देवनगर सहित अन्य स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों से विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। इसके अलावा परियोजना प्रभावित पंचायतों के मसले भी अभी तक ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। एक दशक से भी अधिक समय गुजरने के बाद उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही।
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क्या कहते हैं वार्ड के मतदाता
- 12/20 क्षेत्र के प्रेम चौहान ने कहा कि सेब सीजन में हर वर्ष सेरीपुल, दरकाली और रामपुर-रोहड़ू सड़क बंद हो जाती है। बागवानों की करोड़ों की आर्थिकी सड़क बंद होने से फंस जाती है। जिला परिषद वार्ड के लोग सेब उत्पादन पर निर्भर हैं, लेकिन सड़कों की दयनीय हालत उनकी परेशानी बढ़ाने का काम कर रही है।
- भड़ावली पंचायत के राकेश चौहान ने कहा कि पंचायत में बनी जल विद्युत परियोजना के प्रभावित आज भी परियोजना से मिलने वाले लाभों से वंचित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जो उम्मीदवार जिला परिषद चुनकर आएगा, वह प्रभावितों की समस्याओं को समाधान करेगा।
- नरैण पंचायत के मतदाता अविनाश कायथ का कहना है कि क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। पशुपालकों को भी समय पर पशुओं के उपचार की सुविधा नहीं मिल रही। यातायात व्यवस्था भी चरमराई हुई है। स्कूलों के रिक्त पदों से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ी हुई हैं।
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. 15 पंचायतों के ग्रामीण सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
. सेब बहुल क्षेत्र की सड़कें कई माह तक रहती हैं बंद, सेब सीजन हो रहा प्रभावित
. सेरीपुल, रामपुर-रोहड़ू, दरकाली समेत अन्य सड़कों की हालत बनी दयनीय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
शिमला जिला के जिला परिषद वार्ड नंबर-3 के ग्रामीण आज भी दशकों पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बात यातायात व्यवस्था की हो, किसानी-बागवानी, पशुपालन, शिक्षा या फिर स्वास्थ्य की। हर क्षेत्र में बिगड़ी व्यवस्था से ग्रामीण मायूस हैं। चुनाव के दौरान हर बार ग्रामीणों को बदहाल व्यवस्था को सुधारने के आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद ग्रामीणों की समस्याएं जस की तस रहती हैं। यहां सबसे अधिक समस्या खस्ताहा सड़कों से हैं। सेब सीजन के दौरान खस्ताहाल सड़कें बागवानों के लिए आफत बन जाती हैं। जिला परिषद वार्ड-3 नरैण भौगोलिक दृष्टि से काफी पिछड़ा और दुर्गम क्षेत्र है। वार्ड की अधिकांश पंचायतें दुर्गम और सीमांत क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। वार्ड में रामपुर और ननखड़ी विकास खंड की लैलन, मुनिश, भड़ावली, नरैण, बाहली, देवनगर, पलजारा, दत्तनगर, तकलेच, दरकाली और काशापाट, नीरथ, मझेवटी और थैली चकटी पंचायतें शामिल हैं। इन 15 पंचायतों में अधिकतर ग्रामीणों की आर्थिकी का साधन सेब उत्पादन है। हर वर्ष यहां सेब की 6 से 8 लाख पेटियों का उत्पादन होता है। बागवान वर्षभर सेब तैयार करने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन जब सेब को मंडी भेजने का समय आता है, तो मुख्य सड़कें बंद हो जाती हैं। 12/20 क्षेत्र को जोड़ने वाली तकलेच-देवठी सड़क बरसात के समय बंद हो जाती है। सेब सीजन के दौरान हर वर्ष सेरीपुल में कई-कई महीने तक सड़क बंद रहती है।
यही हाल रामपुर को रोहड़ू उपमंडल से जोड़ने वाली सड़क का है। नरैण में कई वर्षों से सड़क लगातार धंस रही है। क्षेत्र की दरकाली, भद्राश ब्रांदली और काशापाट सड़क की हालत भी बदतर बनी हुई है। ऐसे में हजारों बागवानों को अपनी नकदी फसल मंडी पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। बागवानों को अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक सड़कों का इस्तेमाल करना पड़ता है, लेकिन इन सड़कों पर फसल भेजने से बागवानों को खासी आर्थिक चपत लग रही है। हर साल बागवान सड़कों की दुर्दशा से जूझ रहे हैं।
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यही हाल क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था का भी है। क्षेत्र के सीएचसी तकलेच, स्वास्थ्य केंद्र काशापाट, मुनिश और बाहली में चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। मामूली सी बीमारी पर भी 40 से 50 किलोमीटर का सफर तय कर रामपुर पहुंचना पड़ रहा है। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से सबसे अधिक परेशानी मरीजों को पेश आ रही है। पशु पालन विभाग की बात करें तो पशु चिकित्सालय तकलेच समेत कई औषधालयों में रिक्त पदों से पशुपालकों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। समय पर पशुओं को उपचार नहीं मिल पाता है। शिक्षा व्यवस्था का भी यही हाल है। क्षेत्र के काशापाट, तकलेच, मुनिश, नरैण, देवनगर सहित अन्य स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों से विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। इसके अलावा परियोजना प्रभावित पंचायतों के मसले भी अभी तक ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। एक दशक से भी अधिक समय गुजरने के बाद उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही।
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क्या कहते हैं वार्ड के मतदाता
- 12/20 क्षेत्र के प्रेम चौहान ने कहा कि सेब सीजन में हर वर्ष सेरीपुल, दरकाली और रामपुर-रोहड़ू सड़क बंद हो जाती है। बागवानों की करोड़ों की आर्थिकी सड़क बंद होने से फंस जाती है। जिला परिषद वार्ड के लोग सेब उत्पादन पर निर्भर हैं, लेकिन सड़कों की दयनीय हालत उनकी परेशानी बढ़ाने का काम कर रही है।
- भड़ावली पंचायत के राकेश चौहान ने कहा कि पंचायत में बनी जल विद्युत परियोजना के प्रभावित आज भी परियोजना से मिलने वाले लाभों से वंचित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जो उम्मीदवार जिला परिषद चुनकर आएगा, वह प्रभावितों की समस्याओं को समाधान करेगा।
- नरैण पंचायत के मतदाता अविनाश कायथ का कहना है कि क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। पशुपालकों को भी समय पर पशुओं के उपचार की सुविधा नहीं मिल रही। यातायात व्यवस्था भी चरमराई हुई है। स्कूलों के रिक्त पदों से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ी हुई हैं।

जिला परिषद वार्ड नरैण की नरैण पंचायत में धंसती जा रही सडक़। संवाद

जिला परिषद वार्ड नरैण की नरैण पंचायत में धंसती जा रही सडक़। संवाद

जिला परिषद वार्ड नरैण की नरैण पंचायत में धंसती जा रही सडक़। संवाद

जिला परिषद वार्ड नरैण की नरैण पंचायत में धंसती जा रही सडक़। संवाद

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