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रोहड़ू के गांवों में लोगों को नाम से जानते थे वीरभद्र सिंह
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रोहडू़। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन की सूचना के बाद विधानसभा क्षेत्र रोहडू़ के हर गांव में मातम का माहौल है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर आदमी उनको दिल से श्रद्धांजलि दे रहे है। वीरभद्र सिंह ने कई गरीबों को रोजगार दिया, गंभीर रोग से पीड़ित बेसहारा लोगों का अस्पताल में इलाज के करवाकर जीवन दिया है।
वीरभद्र सिंह की रोहडू़ विधानसभा क्षेत्र के हर गांव के हर घर से अपनी व्यक्तिगत पहुंच रही है और गांव में लोगों को नाम से पहचानते थे। रोहडू विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश भाग वर्ष 1990 तक प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों की सूची में शामिल था। यहां पर पूरी पब्बर घाटी को नदी को पार करने के लिए वाहन योग्य केवल एक पुल समोली था। आज नौ पुलों पर वाहन दौडे़ रहे हैं। नदी के दोनों ओर सड़कों से गांव जुडे़ है। पूरे विधानसभा क्षेत्र के केवल आठ से दस पंचायत मुख्यालय ही सड़क से जुडे़ थे।
वीरभद्र सिंह ने इस क्षेत्र में शिक्षा और सड़कों को विस्तार को पहली प्राथमिकता में रखा। वर्तमान में रोहडू विधानसभा क्षेत्र में बहु तकनीकीसंस्थान सहित, बी-फार्मेसी, संस्कृत और पीजी कॉलेज हैं। रोहडू में तीन विभागों के सर्किल ऑफिस और क्षेत्र की पंचायत मुख्यालय सड़क से जुड़ चुका।
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यही वजह है कि काम के दम पर उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में कभी चार-पांच दिन से अधिक चुनाव प्रचार नहीं किया। फिर भी वे पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड मतों से जीतते रहे। वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में रोहडू उपंडल से लेकर डोडरा क्वार के हर गांव का पैदल सफर किया। इससे पहले जुब्बल-कोटखाई से 1983 से लेकर 1990 तक विधानसभा चुनाव लडे़।
कई बार जनसभा में वीरभद्र सिंह गांव के कई बुजुर्गों और पंचायत प्रतिनिधियों का नाम पुकारते थे तो सुनने वालों को भी हैरानी हो जाते थे। यानी वीरभद्र सिंह के देन के कारण रोहडू के डोडरा क्वार तक सड़क बनी। हालांकि अभी कई गांव के लिए सड़के पक्की नहीं हो सकी। उनके निधन के बाद हर गांव में लोग मायूस है।
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वीरभद्र सिंह की रोहडू़ विधानसभा क्षेत्र के हर गांव के हर घर से अपनी व्यक्तिगत पहुंच रही है और गांव में लोगों को नाम से पहचानते थे। रोहडू विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश भाग वर्ष 1990 तक प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों की सूची में शामिल था। यहां पर पूरी पब्बर घाटी को नदी को पार करने के लिए वाहन योग्य केवल एक पुल समोली था। आज नौ पुलों पर वाहन दौडे़ रहे हैं। नदी के दोनों ओर सड़कों से गांव जुडे़ है। पूरे विधानसभा क्षेत्र के केवल आठ से दस पंचायत मुख्यालय ही सड़क से जुडे़ थे।
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वीरभद्र सिंह ने इस क्षेत्र में शिक्षा और सड़कों को विस्तार को पहली प्राथमिकता में रखा। वर्तमान में रोहडू विधानसभा क्षेत्र में बहु तकनीकीसंस्थान सहित, बी-फार्मेसी, संस्कृत और पीजी कॉलेज हैं। रोहडू में तीन विभागों के सर्किल ऑफिस और क्षेत्र की पंचायत मुख्यालय सड़क से जुड़ चुका।
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यही वजह है कि काम के दम पर उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में कभी चार-पांच दिन से अधिक चुनाव प्रचार नहीं किया। फिर भी वे पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड मतों से जीतते रहे। वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में रोहडू उपंडल से लेकर डोडरा क्वार के हर गांव का पैदल सफर किया। इससे पहले जुब्बल-कोटखाई से 1983 से लेकर 1990 तक विधानसभा चुनाव लडे़।
कई बार जनसभा में वीरभद्र सिंह गांव के कई बुजुर्गों और पंचायत प्रतिनिधियों का नाम पुकारते थे तो सुनने वालों को भी हैरानी हो जाते थे। यानी वीरभद्र सिंह के देन के कारण रोहडू के डोडरा क्वार तक सड़क बनी। हालांकि अभी कई गांव के लिए सड़के पक्की नहीं हो सकी। उनके निधन के बाद हर गांव में लोग मायूस है।