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अंकों के आधार पर न किया जाए विद्यार्थियों का मूल्यांकन : जया रसाल
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रोहडू में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले शिक्षक। स्रोत: विभाग
रोहड़ू में शिक्षकों के लिए लगा दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन अभियान के तहत रोहड़ू में शिक्षकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर लगा। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में शिक्षा खंड जुब्बल, रोहड़ू, टिक्कर, रणसार (जांगला), छौहारा और डोडरा-क्वार के जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी व प्रवक्ता स्तर के शिक्षकों ने भाग लिया। शिविर का संचालन प्रशिक्षक जया रसाल की मौजूदगी में किया गया। जया रसाल ने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया तभी प्रभावी बन सकती है, जब विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर न किया जाए और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, सोचने की प्रक्रिया व समझ के स्तर को भी मापा जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को संतुलित प्रश्नपत्र बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 900 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण 11 सितंबर से 20 नवंबर तक 15 बैचों में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत अनिवार्य रूप से आयोजित किया गया है, ताकि प्रत्येक शिक्षक 21वीं सदी की शिक्षण पद्धतियों में दक्ष हो सके। दो दिवसीय कार्यशालाओं के दौरान शिक्षकों को ब्लूम टैक्सोनॉमी, एनसीएफ की दृष्टि और ज्ञान-समझ अनुप्रयोग फ्रेमवर्क के बारे में भी जानकारी दी गई। इस मौके पर हेमंत और ब्लॉक एमआईएस अधिकारी शिवेंद्र कौशल भी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन अभियान के तहत रोहड़ू में शिक्षकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर लगा। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में शिक्षा खंड जुब्बल, रोहड़ू, टिक्कर, रणसार (जांगला), छौहारा और डोडरा-क्वार के जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी व प्रवक्ता स्तर के शिक्षकों ने भाग लिया। शिविर का संचालन प्रशिक्षक जया रसाल की मौजूदगी में किया गया। जया रसाल ने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया तभी प्रभावी बन सकती है, जब विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर न किया जाए और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, सोचने की प्रक्रिया व समझ के स्तर को भी मापा जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को संतुलित प्रश्नपत्र बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 900 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण 11 सितंबर से 20 नवंबर तक 15 बैचों में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत अनिवार्य रूप से आयोजित किया गया है, ताकि प्रत्येक शिक्षक 21वीं सदी की शिक्षण पद्धतियों में दक्ष हो सके। दो दिवसीय कार्यशालाओं के दौरान शिक्षकों को ब्लूम टैक्सोनॉमी, एनसीएफ की दृष्टि और ज्ञान-समझ अनुप्रयोग फ्रेमवर्क के बारे में भी जानकारी दी गई। इस मौके पर हेमंत और ब्लॉक एमआईएस अधिकारी शिवेंद्र कौशल भी मौजूद रहे।