फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Trade between Shipki-La and Tibet has been going on since before independence

Rampur Bushahar News: शिपकी-ला और तिब्बत के बीच आजादी से पहले से होता था व्यापार

Tue, 10 Jun 2025 07:48 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jun 2025 07:48 PM IST
विज्ञापन
Trade between Shipki-La and Tibet has been going on since before independence
ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव
ग्राउंड रिपोर्ट
विज्ञापन

सीमा के साथ सटे गांव के लोगों ने दोबारा व्यापार शुरू करने की उठाई मांग, पर्यटन को लगेंगे पंख
साल 2019 में कोरोना और डोकलाम घटना के बाद व्यापार हुआ बंद


धर्मेद्र सिंह बोज्ञाटो
शिपकी-ला (किन्नौर)। चीन-तिब्बत सीमा से सटे शिपकी-ला अब पर्यटकों को नया अनुभव देगा। सैलानियों के यहां पहुंचने से जहां पर्यटन को पंख लगेंगे, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। जिले के अंतिम छोर शिपकी-ला और चीन अधिकृत तिब्बत के बीच आजादी के पहले से व्यापार होता था, लेकिन 2019 में कोरोना व डोकलाम घटना के बाद व्यापार बंद कर दिया गया। इसके बाद से पर्यटकों को यहां आने की अनुमति नहीं थी।
केवल स्थानीय लोग ही बाॅर्डर तक जा पाते थे। पर्यटक नेशनल हाईवे से खाप, नाको जा सकते थे। बाॅर्डर तक जाने की उन्हें अनुमति नहीं थी। शिपकी-ला से किन्नौर जिले के लोग घोड़े पर सवार होकर सीमा पार करके तिब्बत पहुंचते थे। व्यापार का यह मुख्य रास्ता था। शिपकी-ला वही स्थान है, जिसके नीचे से सतलुज नदी भारत में प्रवेश करती है। किन्नौर जिला के लोग चावल, गुड़, नारियल का तेल, रिफाइंड तेल और दाल समेत अन्य सामान लेकर तिब्बत जाते थे। इस सामान के बदले लोग तिब्बत से चिग्गू नस्ल के बकरे लाते थे। यह विशेष किस्म का बकरा होता है। इससे पश्मीना निकलता है, जो काफी महंगा बिकता है। इसके अलावा सूखा पनीर, याक, घोड़े, ऊन, मक्खन, चाइनीज क्राॅकरी, थर्मस आदि सामान लेकर आते थे। संवाद
विज्ञापन

सीमा पर 1967 में चौकी का उद्घाटन
- साल 1962 में शिपकी-ला में सीमा पर पुलिस की चौकी स्थापित की गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1967 में इस चौकी का उद्घाटन किया था। उस वक्त शिपकी-ला को एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल ) घोषित किया गया। इसके बावजूद साल 1994 तक व्यापार बिना रोक-टोक के होता रहा। साल 1994 में यहां कस्टम विभाग की ब्रांच स्थापित कर दी गई। इसके बाद कारोबार पर कर का भुगतान करना पड़ता था। 2019 तक यह व्यापार होता रहा। तहसीलदार पूह ट्रेड पास बनाते थे। इसके बाद स्थानीय लोग व्यापार के लिए तिब्बत जा सकते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीन रियासतों के बीच हुई थी संधि
- नमज्ञा पंचायत के प्रधान बलदेव नेगी ने बताया कि लद्दाख, रामपुर बुशहर और गुगे (तिब्बत) तीन रियासतों के बीच संधि हुई थी। लाउछे नामक स्थान जो आज तिब्बत में है, वहां यह संधि हुई थी। यह बात उन्होंने अपने बुजुर्गों से ही सुनी है। ये संधि आपस में व्यापार को लेकर हुई थी। कहा जाता है कि संधि के दौरान कसम खाई थी कि जब तक मानसरोवर झील का पानी सूख न जाए, काला कौआ सफेद न हो जाए और सबसे ऊंची चोटी रियोपुर्गुल मैदान न बन जाए, तब तक व्यापार चलता रहेगा।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग

पेमाला था पुराना नाम

- नमज्ञा पंचायत के पूर्व प्रधान नोरबू छोरिया ने बताया कि शिपकी-ला का पुराना नाम पेमाला (साझा द्वार) था। इसे साझा धार भी कहा जाता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल ) घोषित किया। इसका पत्थर आज भी वहां पर मौजूद है। उसके बाद बॉर्डर पुलिस ने इसका नाम शिपकी-ला रखा।
शिपकी-ला से मानसरोवर तक जाने के लिए मार्ग

नमज्ञा गांव की महिला मंडल प्रधान सरस्वती नेगी ने बताया कि मानसरोवर तक जाने के लिए शिपकी-ला से मार्ग है। चीन की सड़क शिपकी गांव तक है। बीच में 4 किलोमीटर का रास्ता है। घोड़े पर 15 दिन का समय कैलाश मानसरोवर तक लगता था। यह रास्ता व्यापार के लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया था। अब गांव के युवाओं को रोेजगार के अवसर अवसर खुलेंगे।
भारत-तिब्बत व्यापार दोबारा हो शुरू
किन्नौर-इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन वाया शिपकी-ला के अध्यक्ष हिशे नेगी ने बताया कि भारत-तिब्बत व्यापार को एक बार फिर से शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपा है। व्यापार शुरू होने से दोनों देशों के बीच मित्रता का संबंध बना रहेगा।
ख्रुशी से झूमे नमज्ञा गांव के युवा
नमज्ञा गांव के युवा एवं पूह ब्लॉक यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उर्गन यांगफेल ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार शिपकी-ला बॉर्डर टूरिज्म के लिए खोला गया। इससे पूरे गांव में युवाओं में खुशी की लहर है। युवाओं को अब पर्यटन व्यवसाय में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। 9 जून 1968 को ऐतिहासिक दिन था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाईएस परमार शिपकी-ला पहुंचे थे। उसके बाद अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पहुंचे हैं। केंद्र सरकार से आग्रह है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा भी जल्द शुरू की जाए।



हिमाचल प्रदेश की तरफ से तिब्बत को 36 वस्तुएं होती थीं निर्यात
सालों से तिब्बत को 36 वस्तुएं निर्यात की जाती थीं और तिब्बत से 20 वस्तुएं हिमाचल में आयात होती थीं। इस तरह से दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंध चल रहा था। नमज्ञा गांव के लोगों का कहना है कि एक बार फिर से सरकार यहां के लोगों को आपस में इस तरह का व्यापार करने की छूट प्रदान करे। भारत से तिब्बत के लिए कृषि उपकरण कंबल, कॉपर प्रोडक्ट, कपड़े, टेक्सटाइल, साइकिल, कॉफी, चाय, बारले राइस ड्राई फ्रूट, फ्रेश वेजिटेबल्स, वेजिटेबल ऑयल, गुड़, मिश्री, तंबाकू सिगरेट, फूड्स एग्रो केमिकल, लोकल हर्ब्स, डाइस मसाले, जूते, स्टेशनरी समेत कई वस्तुएं निर्यात की जाती थीं। तिब्बत से ऊन, गोट पशमीना, गोट स्क्रीन शिप स्किन, भेड़ें, घोड़े, नमक, मक्खन सिल्क और रेडीमेड गारमेंट्स के साथ स्थानीय जड़ी-बूटियों बनी दवाइयां लाते थे।

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

ग्राम पंचायत नमज्ञा के प्रधान बलदेव

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed