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रोहडू की तीन छात्राएं रोमानिया पहुंची
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। यूक्रेन में डाक्टरी की पढ़ाई करने गई रोहडू की तीन छात्राएं आखिरकार रोमानिया पहुंचने में कामयाब हो गईं हैं। करीब बीस घंटे शून्य तापमान के बीच भूखे-प्यासे रहकर इन छात्राओं ने विपरीत हालातों को हिम्मत से सामना किया।
सोमवार को बेटियों के रोमानिया पहुंच जाने की सूचना मिलने पर उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है, अब बच्चों की जान को खतरा कुछ कम हुआ है। बस अब उनके सकुशल घर पहुंचने की इंतजार है।
इन छात्राओं ने अपने परिजनों को बताया कि रविवार को देर रात तक बार्डर पर भारी हिमपात हो रहा था। उनके पास न खाने की व्यवस्था और न ही ठहरने की कोई व्यवस्था थी। करीब बीस घंटे तक बेहद विकट हालातों से जूझने के बाद सोमवार को उन्हें रोमानिया की सीमा में मिला।
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रोहडू के दलगांव निवासी ईश्वर सिंह बांष्टू ने बताया कि बेटी स्वाभी बांष्टू ने सोमवार सुबह यह शुभ सूचना दी। स्वाभी ने बताया कि उनके ग्रुप में रोहडू की तीनों छात्राएं रोमानिया की सीमा में प्रवेश कर चुकी हैं।
इस ग्रुप में भारतीय मूल के करीब 70 विद्यार्थी हैं। कुछ अभी सीमा पर ही फंसे हुए है। ईश्वर बांष्टू ने बताया कि बेटी की इस सूचना के बाद परिवार के लोगों ने राहत महसूस की है। उन्होंने कहा अब बेटी के सुरक्षित लौटने की उम्मीद बंधी है।
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रोहडू। यूक्रेन में डाक्टरी की पढ़ाई करने गई रोहडू की तीन छात्राएं आखिरकार रोमानिया पहुंचने में कामयाब हो गईं हैं। करीब बीस घंटे शून्य तापमान के बीच भूखे-प्यासे रहकर इन छात्राओं ने विपरीत हालातों को हिम्मत से सामना किया।
सोमवार को बेटियों के रोमानिया पहुंच जाने की सूचना मिलने पर उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है, अब बच्चों की जान को खतरा कुछ कम हुआ है। बस अब उनके सकुशल घर पहुंचने की इंतजार है।
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इन छात्राओं ने अपने परिजनों को बताया कि रविवार को देर रात तक बार्डर पर भारी हिमपात हो रहा था। उनके पास न खाने की व्यवस्था और न ही ठहरने की कोई व्यवस्था थी। करीब बीस घंटे तक बेहद विकट हालातों से जूझने के बाद सोमवार को उन्हें रोमानिया की सीमा में मिला।
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रोहडू के दलगांव निवासी ईश्वर सिंह बांष्टू ने बताया कि बेटी स्वाभी बांष्टू ने सोमवार सुबह यह शुभ सूचना दी। स्वाभी ने बताया कि उनके ग्रुप में रोहडू की तीनों छात्राएं रोमानिया की सीमा में प्रवेश कर चुकी हैं।
इस ग्रुप में भारतीय मूल के करीब 70 विद्यार्थी हैं। कुछ अभी सीमा पर ही फंसे हुए है। ईश्वर बांष्टू ने बताया कि बेटी की इस सूचना के बाद परिवार के लोगों ने राहत महसूस की है। उन्होंने कहा अब बेटी के सुरक्षित लौटने की उम्मीद बंधी है।