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केंद्र सरकार की नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर : सभा
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आनी में किसान सभा के सम्मेलन में मौजूद सदस्य। स्रोत : सभा
26 नवंबर को आनी में लंबित मुद्दों को लेकर होगा प्रदर्शन
आनी में सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों को लेकर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी में हिमाचल किसान सभा आनी इकाई का एक दिवसीय सम्मेलन जिला कुल्लू के सचिव नारायण चौहान की अध्यक्षता में हुआ। सम्मेलन में कई मुद्दों पर चर्चा हुई और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया। नारायण चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों और नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण आज किसान की खेती संकट में जा रहीं है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की जमीनें और घर बह गए हैं। घर बनाने के लिए जमीन नहीं बची है। हिमाचल किसान सभा का अध्यक्ष प्रताप ठाकुर ने कहा कि 26 नवंबर को आनी में प्रदर्शन होगा। भूमि से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। भाजपा की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2000 में लैंड रेवेन्यू एक्ट में धारा 163-ए को जोड़ा था और वर्ष 2002 में संशोधित नियम के तहत 20 बीघा भूमि पर कब्जे को नियमित करने का प्रावधान किया था। प्रदेश के किसान और बागवान आसपास सरकारी भूमि पर पुश्तों से खेती कर रहे हैं और लाखों लोगों ने आवेदन किया था। अब 23 साल बाद 5 अगस्त को फैसला आया है, जिसमें अब इसको रद्द कर दिया है। कहा कि उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ हिमाचल किसान सभा सुप्रीम कोर्ट भी गई, जिसमें किसानों को राहत मिली और साथ ही अपील की है कि गरीब किसानों को पांच बीघा भूमि दी जाएं। उन्होंने सभी लोगों से अपील है कि 26 नवंबर को होने वाले प्रदर्शन में सभी भाग लें। इस मौके पर हिमाचल किसान सभा आनी के सचिव गीता राम, हिमाचल सेब उत्पादक संघ सचिव हेमराज, टीकम, वीर सिंह, केहर सिंह, दलीप ठाकुर, मुकेश कुमार, मिलाप, रोशन, लायक राम, लच्छम दास, गोपाल, परस राम, डोला सिंह, दौलत, रामकृष्ण और भगत राम सहित अन्य मौजूद रहे।
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आनी में सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों को लेकर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी में हिमाचल किसान सभा आनी इकाई का एक दिवसीय सम्मेलन जिला कुल्लू के सचिव नारायण चौहान की अध्यक्षता में हुआ। सम्मेलन में कई मुद्दों पर चर्चा हुई और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया। नारायण चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों और नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण आज किसान की खेती संकट में जा रहीं है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की जमीनें और घर बह गए हैं। घर बनाने के लिए जमीन नहीं बची है। हिमाचल किसान सभा का अध्यक्ष प्रताप ठाकुर ने कहा कि 26 नवंबर को आनी में प्रदर्शन होगा। भूमि से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। भाजपा की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2000 में लैंड रेवेन्यू एक्ट में धारा 163-ए को जोड़ा था और वर्ष 2002 में संशोधित नियम के तहत 20 बीघा भूमि पर कब्जे को नियमित करने का प्रावधान किया था। प्रदेश के किसान और बागवान आसपास सरकारी भूमि पर पुश्तों से खेती कर रहे हैं और लाखों लोगों ने आवेदन किया था। अब 23 साल बाद 5 अगस्त को फैसला आया है, जिसमें अब इसको रद्द कर दिया है। कहा कि उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ हिमाचल किसान सभा सुप्रीम कोर्ट भी गई, जिसमें किसानों को राहत मिली और साथ ही अपील की है कि गरीब किसानों को पांच बीघा भूमि दी जाएं। उन्होंने सभी लोगों से अपील है कि 26 नवंबर को होने वाले प्रदर्शन में सभी भाग लें। इस मौके पर हिमाचल किसान सभा आनी के सचिव गीता राम, हिमाचल सेब उत्पादक संघ सचिव हेमराज, टीकम, वीर सिंह, केहर सिंह, दलीप ठाकुर, मुकेश कुमार, मिलाप, रोशन, लायक राम, लच्छम दास, गोपाल, परस राम, डोला सिंह, दौलत, रामकृष्ण और भगत राम सहित अन्य मौजूद रहे।