{"_id":"68d3d204e761167e3e006493","slug":"there-is-no-bridge-over-the-kurpan-ravine-causing-problems-for-residents-of-nithar-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-144559-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: एक साल से सादा, घराट और पोखरी में पुल की राह ताक रहे ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: एक साल से सादा, घराट और पोखरी में पुल की राह ताक रहे ग्रामीण
विज्ञापन
कुर्पण खड्ड पर बाढ़ से टूटा हुआ अस्थायी पुल। संवाद
कुर्पण खड्ड पर खतरे के बीच आवाजाही कर रहे बच्चे और ग्रामीण
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर की गड़ेज पंचायत के सादा, घराट और पोखरी गांव में बाढ़ में पुल बह गए थे। एक साल से ग्रामीण पुलों के निर्माण की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रोजाना स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों को खतरे के बीच कुर्पण खड्ड को पार करना पड़ता है। एक साल पहले कुर्पण खड्ड में बाढ़ आई थी, जिसमें कई पुल बह गए थे। इसमें से बागीपुल, केदस और डरोपा के पुल शामिल थे। इन तीनों पुल का निर्माण हो गया है, लेकिन सादा, घराट और पोखरी में पुलों का निर्माण नहीं हुआ है। इस कारण इन गांवों के विद्यार्थियों को कुर्पण खड्ड पार कर स्कूल और कॉलेज पहुंचना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों को खड्ड को पार करना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण कुलदीप, सुरेश, विपिन और महावीर का कहना है कि पुल का निर्माण नहीं होने से कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। अभी तक करीब तीन जगह छोटे पुल बनने थे, लेकिन उनका निर्माण नहीं हुआ। इस कारण आवाजाही करना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र के स्कूली बच्चे निरमंड में किराये के कमरे में रह रहे हैं। ग्रामीणों ने अस्थायी लकड़ी के पुल बनाए थे, लेकिन इस बार की बरसात में वे भी बह गए। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और पंचायत से शीघ्र पुलों के निर्माण करने की मांग उठाई है। उधर, गड़ेज पंचायत के प्रधान दारा सिंह कायथ ने बताया कि इस बारे में उपायुक्त कुल्लू और बीडीओ निरमंड को पत्राचार से अवगत करवाया गया है। मांग की गई है कि शीघ्र इन स्थानों पर पुल बनाएं जाएं। संवाद
विज्ञापन
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर की गड़ेज पंचायत के सादा, घराट और पोखरी गांव में बाढ़ में पुल बह गए थे। एक साल से ग्रामीण पुलों के निर्माण की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रोजाना स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों को खतरे के बीच कुर्पण खड्ड को पार करना पड़ता है। एक साल पहले कुर्पण खड्ड में बाढ़ आई थी, जिसमें कई पुल बह गए थे। इसमें से बागीपुल, केदस और डरोपा के पुल शामिल थे। इन तीनों पुल का निर्माण हो गया है, लेकिन सादा, घराट और पोखरी में पुलों का निर्माण नहीं हुआ है। इस कारण इन गांवों के विद्यार्थियों को कुर्पण खड्ड पार कर स्कूल और कॉलेज पहुंचना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों को खड्ड को पार करना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण कुलदीप, सुरेश, विपिन और महावीर का कहना है कि पुल का निर्माण नहीं होने से कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। अभी तक करीब तीन जगह छोटे पुल बनने थे, लेकिन उनका निर्माण नहीं हुआ। इस कारण आवाजाही करना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र के स्कूली बच्चे निरमंड में किराये के कमरे में रह रहे हैं। ग्रामीणों ने अस्थायी लकड़ी के पुल बनाए थे, लेकिन इस बार की बरसात में वे भी बह गए। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और पंचायत से शीघ्र पुलों के निर्माण करने की मांग उठाई है। उधर, गड़ेज पंचायत के प्रधान दारा सिंह कायथ ने बताया कि इस बारे में उपायुक्त कुल्लू और बीडीओ निरमंड को पत्राचार से अवगत करवाया गया है। मांग की गई है कि शीघ्र इन स्थानों पर पुल बनाएं जाएं। संवाद