फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The court acquitted three accused in a theft case

Rampur Bushahar News: अदालत ने चोरी के मामले में तीन आरोपियों को बरी किया

Thu, 08 Oct 2026 11:16 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
अदालत ने गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं
विज्ञापन

चोरी का सामान बरामद करने वाले एएसआई को भी अदालत में पेश नहीं किया

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने चोरी के एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा। यह मामला 2014 में सैंज में ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य सामान की चोरी से संबंधित था। शिकायतकर्ता ने 23 मई 2014 को सैंज पुलिस चौकी में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उसने बताया था कि उसकी फर्म से दो ऑक्सीजन सिलिंडर, एक लोहे की बेंच और एक वजन मशीन गायब थी। जांच के दौरान पुलिस ने रामपुर में एक बोलेरो कैंपर और मोटरसाइकिल से कथित चोरी का सामान बरामद किया। आरोपियों सुरेंद्र मेहता, राजेश कुमार और पुष्पेंद्र पर भारतीय दंड संहिता की धारा 379 और 34 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में सात गवाहों की जांच की। हालांकि, अदालत ने पाया कि किसी भी गवाह ने आरोपियों को चोरी करते हुए नहीं देखा था। अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों की शृंखला को पूरा करने में विफल रहा। अदालत ने गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं। इन विरोधाभासी बयानों ने अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह पैदा किया। अदालत ने कहा कि मौके पर उनकी उपस्थिति या वाहन को रोकने का कोई दस्तावेज नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि आरोपियों के बयानों के गवाहों की जांच नहीं की गई। इसके अलावा, कथित चोरी का सामान रामपुर पुलिस स्टेशन के एएसआई ने बरामद किया था। अदालत ने कहा कि एएसआई इस तथ्य को साबित करने के लिए सबसे अच्छे व्यक्ति थे, लेकिन उनकी भी जांच नहीं की गई। उनकी अनुपस्थिति में चोरी की संपत्ति की बरामदगी साबित नहीं हो सकी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के अपराध को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की शृंखला अधूरी रह गई। अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला संदेह के घेरे में है। किसी भी ठोस सबूत के अभाव में आरोपियों को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं होगा। इन परिस्थितियों में, अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed