{"_id":"6a4e2dd19e8fc4e21003543c","slug":"team-returning-from-shrikhand-submits-report-to-sdm-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1032-164281-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: श्रीखंड से लौटे दल ने एसडीएम को सौंपी रिपोर्ट\nफांचा से श्रीखंड तक धार्मिक यात्रा मार्ग सही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: श्रीखंड से लौटे दल ने एसडीएम को सौंपी रिपोर्ट फांचा से श्रीखंड तक धार्मिक यात्रा मार्ग सही
विज्ञापन
फांचा से श्रीखंड यात्रा मार्ग पर नहीं मिला कचरा। स्रोत : प्रशासन
यात्रा मार्ग में शकरांडा से श्रीखंड महादेव की चढ़ाई सबसे मुश्किल
सात सदस्यीय दल ने 3 और 4 जुलाई को किया था यात्रा मार्ग का सर्वे
स्पा भावी, मजबौन को रात्रि विश्राम, शकरांडा में आराम स्थल विकसित करने का सुझाव
सर्वे के दौरान रास्ते में कहीं भी नहीं मिला कचरा, पर्यावरण की दृष्टि से रास्ता साफ
दल ने की व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की सिफारिश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ज्यूरी से वाया फांचा श्रीखंड महादेव तीर्थयात्रा को फिर से संचालित करने की योजना जल्द धरातल पर उतर सकती है। 3 और 4 जुलाई को अटल बिहारी माउंटेनियरिंग संस्थान मनाली की अगुवाई में गए दल ने फांचा से श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग को तीर्थ यात्रा करने की दृष्टि से सही ठहराया है। हालांकि, दल ने बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को जाने की अनुमति देने से पहले कुछ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े उपाय करने की सलाह दी गई। दल ने कुछ विशेष व्यवस्थाओं और व्यापक तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली लागू करने की सिफारिश भी की है। अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड अलाइड स्पोर्ट्स मनाली के सीनियर माउंटेनियरिंग सुपरवाइजर अनिरुद्ध चौहान की अगुवाई में दल ने श्रीखंड यात्रा मार्ग का तकनीकी तौर पर निरीक्षण किया। इस दल ने यात्रा मार्ग, रात्रि ठहराव स्थल, रास्तों को विकसित करने समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने के सुझाव दिए हैं। अब यह प्रस्ताव उपायुक्त शिमला को भेजा जाएगा। सब सही रहा, तो जल्द ही इस यात्रा के शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। श्रीखंड से लौटे दल ने एसडीएम को यात्रा मार्ग की रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में दल ने बताया कि यात्रा मार्ग में सबसे मुश्किल हिस्सा शकरांडा और मजबौन के बीच है, जहां संकरे रास्ते, पत्थर-मिट्टी का मलबा, बर्फ और नदी-नालों को पार करने की जगह और पत्थर गिरने का खतरा बना है। यहां रास्ते को मैनुअल रूप से चौड़ा करने, सुरक्षा रस्सियां और सुरक्षात्मक बाड़ लगाने और तीर्थयात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने की जरूरत है। फील्ड सर्वे के आधार पर स्पाभावी को हॉल्ट स्टेशन के तौर पर सुझाया गया है, जहां रात में रुकने और ऊंचाई के अनुकूल ढलने की सुविधा हो। वहीं, श्रीखंड महादेव की अंतिम चढ़ाई से पहले रात में रुकने और ऊंचाई के अनुकूल ढलने के लिए मजबौन को हाल्ट स्टेशन और शकरांडा को आराम और जलपान केंद्र के तौर पर सुझाया गया है।
यात्रा मार्ग के स्थितियों की जुटाईं जानकारियां
इस सात सदस्यीय निरीक्षण दल में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड अलाइड स्पोर्ट्स मनाली के प्रतिनिधि, वन विभाग के कर्मी और स्थानीय युवक शामिल रहे। दल ने यात्रा मार्ग के स्थितियों की जानकारियां जुटाईं। दल ने पर्वतारोहण सुरक्षा, तीर्थयात्रियों की आवाजाही, बचाव की तैयारी, बुनियादी ढांचे की जरूरतों और पर्यावरण की स्थिरता के नजरिये से रास्ते का आकलन किया। दल ने फांचा से श्रीखंड महादेव तक के रास्ते का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान रास्ते की हालत, जमीन की बनावट, पानी की उपलब्धता, ऊंचाई, जीपीएस कोऑर्डिनेट्स, कम्युनिकेशन नेटवर्क, खतरनाक हिस्सों और रुकने की जगहों के लिए संभावित स्थानों के बारे में जानकारी जुटाई।
व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली लागू करना जरूरी
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रिपोर्ट में एक व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली की सिफारिश की गई है। इसमें यात्रियों के पंजीकरण, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग, मेडिकल स्क्रीनिंग, चेकपॉइंट की निगरानी और मुश्किल हिस्सों से गुजरते समय नियंत्रित आवाजाही पर बल दिया गया है। इस सर्वेक्षण के दौरान रास्ते में कहीं भी कचरा या ठोस अपशिष्ट नहीं देखा गया, जिससे पता चलता है कि यह रास्ता पर्यावरण की दृष्टि से बिल्कुल साफ-सुथरा है। यह सलाह दी जाती है कि भविष्य में विकास कार्य पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किए जाएं। साथ ही इस क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक पवित्रता, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को भी सुरक्षित रखा जाए।
विज्ञापन
फांचा से श्रीखंड की दूरी 14 किलोमीटर, कुल 11 घंटे की यात्रा
श्रीखंड गए दल ने फांचा से लेकर श्रीखंड महादेव के लिए कुल 14 किलोमीटर की दूरी तय की है। इस दूरी को तय करने में भले ही दो दिन लगें, लेकिन यात्री इस यात्रा को कुल 11 घंटे की पैदल चढ़ाई कर पूरा कर पाएंगे। दल की रिपोर्ट के मुताबिक फांचा से फांचा कंडा की दूरी 3 किलोमीटर है। फांचा कंडा से स्पाभावी की दूरी 4 किलोमीटर, स्पाभावी से शकरांडा की दूरी 3 किलोमीटर, शकरांडा से मजबौन की दूरी 1.5 किलोमीटर और मजबौन से श्रीखंड महादेव की दूरी 2.5 किलोमीटर है।
फांचा से श्रीखंड महादेव यात्रा को पुन: संचालित करने और इस मार्ग को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की योजना है। दल ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसे उपायुक्त शिमला को भेजा जा रहा है। अब उपायुक्त ही इस यात्रा के संचालन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने बारे अंतिम निर्णय लेंगे।
- हर्ष अमरेंद्र सिंह, एसडीएम रामपुर
विज्ञापन
सात सदस्यीय दल ने 3 और 4 जुलाई को किया था यात्रा मार्ग का सर्वे
स्पा भावी, मजबौन को रात्रि विश्राम, शकरांडा में आराम स्थल विकसित करने का सुझाव
सर्वे के दौरान रास्ते में कहीं भी नहीं मिला कचरा, पर्यावरण की दृष्टि से रास्ता साफ
दल ने की व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की सिफारिश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। ज्यूरी से वाया फांचा श्रीखंड महादेव तीर्थयात्रा को फिर से संचालित करने की योजना जल्द धरातल पर उतर सकती है। 3 और 4 जुलाई को अटल बिहारी माउंटेनियरिंग संस्थान मनाली की अगुवाई में गए दल ने फांचा से श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग को तीर्थ यात्रा करने की दृष्टि से सही ठहराया है। हालांकि, दल ने बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को जाने की अनुमति देने से पहले कुछ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े उपाय करने की सलाह दी गई। दल ने कुछ विशेष व्यवस्थाओं और व्यापक तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली लागू करने की सिफारिश भी की है। अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड अलाइड स्पोर्ट्स मनाली के सीनियर माउंटेनियरिंग सुपरवाइजर अनिरुद्ध चौहान की अगुवाई में दल ने श्रीखंड यात्रा मार्ग का तकनीकी तौर पर निरीक्षण किया। इस दल ने यात्रा मार्ग, रात्रि ठहराव स्थल, रास्तों को विकसित करने समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने के सुझाव दिए हैं। अब यह प्रस्ताव उपायुक्त शिमला को भेजा जाएगा। सब सही रहा, तो जल्द ही इस यात्रा के शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। श्रीखंड से लौटे दल ने एसडीएम को यात्रा मार्ग की रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में दल ने बताया कि यात्रा मार्ग में सबसे मुश्किल हिस्सा शकरांडा और मजबौन के बीच है, जहां संकरे रास्ते, पत्थर-मिट्टी का मलबा, बर्फ और नदी-नालों को पार करने की जगह और पत्थर गिरने का खतरा बना है। यहां रास्ते को मैनुअल रूप से चौड़ा करने, सुरक्षा रस्सियां और सुरक्षात्मक बाड़ लगाने और तीर्थयात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने की जरूरत है। फील्ड सर्वे के आधार पर स्पाभावी को हॉल्ट स्टेशन के तौर पर सुझाया गया है, जहां रात में रुकने और ऊंचाई के अनुकूल ढलने की सुविधा हो। वहीं, श्रीखंड महादेव की अंतिम चढ़ाई से पहले रात में रुकने और ऊंचाई के अनुकूल ढलने के लिए मजबौन को हाल्ट स्टेशन और शकरांडा को आराम और जलपान केंद्र के तौर पर सुझाया गया है।
यात्रा मार्ग के स्थितियों की जुटाईं जानकारियां
इस सात सदस्यीय निरीक्षण दल में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड अलाइड स्पोर्ट्स मनाली के प्रतिनिधि, वन विभाग के कर्मी और स्थानीय युवक शामिल रहे। दल ने यात्रा मार्ग के स्थितियों की जानकारियां जुटाईं। दल ने पर्वतारोहण सुरक्षा, तीर्थयात्रियों की आवाजाही, बचाव की तैयारी, बुनियादी ढांचे की जरूरतों और पर्यावरण की स्थिरता के नजरिये से रास्ते का आकलन किया। दल ने फांचा से श्रीखंड महादेव तक के रास्ते का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान रास्ते की हालत, जमीन की बनावट, पानी की उपलब्धता, ऊंचाई, जीपीएस कोऑर्डिनेट्स, कम्युनिकेशन नेटवर्क, खतरनाक हिस्सों और रुकने की जगहों के लिए संभावित स्थानों के बारे में जानकारी जुटाई।
विज्ञापन
व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली लागू करना जरूरी
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रिपोर्ट में एक व्यापक तीर्थ यात्रा प्रबंधन प्रणाली की सिफारिश की गई है। इसमें यात्रियों के पंजीकरण, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग, मेडिकल स्क्रीनिंग, चेकपॉइंट की निगरानी और मुश्किल हिस्सों से गुजरते समय नियंत्रित आवाजाही पर बल दिया गया है। इस सर्वेक्षण के दौरान रास्ते में कहीं भी कचरा या ठोस अपशिष्ट नहीं देखा गया, जिससे पता चलता है कि यह रास्ता पर्यावरण की दृष्टि से बिल्कुल साफ-सुथरा है। यह सलाह दी जाती है कि भविष्य में विकास कार्य पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किए जाएं। साथ ही इस क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक पवित्रता, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को भी सुरक्षित रखा जाए।
विज्ञापन
फांचा से श्रीखंड की दूरी 14 किलोमीटर, कुल 11 घंटे की यात्रा
श्रीखंड गए दल ने फांचा से लेकर श्रीखंड महादेव के लिए कुल 14 किलोमीटर की दूरी तय की है। इस दूरी को तय करने में भले ही दो दिन लगें, लेकिन यात्री इस यात्रा को कुल 11 घंटे की पैदल चढ़ाई कर पूरा कर पाएंगे। दल की रिपोर्ट के मुताबिक फांचा से फांचा कंडा की दूरी 3 किलोमीटर है। फांचा कंडा से स्पाभावी की दूरी 4 किलोमीटर, स्पाभावी से शकरांडा की दूरी 3 किलोमीटर, शकरांडा से मजबौन की दूरी 1.5 किलोमीटर और मजबौन से श्रीखंड महादेव की दूरी 2.5 किलोमीटर है।
फांचा से श्रीखंड महादेव यात्रा को पुन: संचालित करने और इस मार्ग को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की योजना है। दल ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसे उपायुक्त शिमला को भेजा जा रहा है। अब उपायुक्त ही इस यात्रा के संचालन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने बारे अंतिम निर्णय लेंगे।
- हर्ष अमरेंद्र सिंह, एसडीएम रामपुर

फांचा से श्रीखंड यात्रा मार्ग पर नहीं मिला कचरा। स्रोत : प्रशासन

फांचा से श्रीखंड यात्रा मार्ग पर नहीं मिला कचरा। स्रोत : प्रशासन

फांचा से श्रीखंड यात्रा मार्ग पर नहीं मिला कचरा। स्रोत : प्रशासन