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Rampur Bushahar News: ओलावृष्टि से हुए नुकसान का एसडीएम ने लिया जायजा
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सेब, मटर और फूलगोभी समेत अन्य फसलों का लिया जायजा
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ओलावृष्टि के कारण फसलों और बागवानी को हुए नुकसान का निरीक्षण करने के लिए एसडीएम डॉ. शशांक गुप्ता ने बढि़याना गांव का दौरा किया। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए फसलों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई। पिछले दिनों उपमंडल की कई पंचायतों में ओलावृष्टि के कारण किसानों-बागवानों की मटर, फूलगोभी और सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इन दिनों किसान खेतों में मटर, फ्रासबीन और फूलगोभी की तैयार फसल को तोड़ने का काम कर रहे थे। यह फसलें पूरे साल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करती हैं और सेब सीजन में होने वाले खर्चों की भरपाई करने में सहायक सिद्ध होती है। इन दिनों फसलों के बेहतर दाम मिलने से किसान खुश नजर आ रहे थे। मटर 50 रुपये, फ्रासबीन 70 और फूलगोभी को 12 रुपये प्रति किलो के भाव मिल रहे थे, लेकिन ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। ओले के बड़े आकार होने के कारण सब्जियों की पत्तियों तक को नुकसान पहुंचा है, वहीं सेब की फसल को भी खासा नुकसान हुआ है। ओलों से बिना जालियों वाले सेब के पेड़ों से फल जमीन गिर गए हैं। बागवानों ने जिन पेड़ों में जालियां लगाई थीं, उनमें कम नुकसान हुआ है। चिखड़ पंचायत के रूनकली गांव के नरेंद्र शर्मा के अनुसार, ओले के कारण मटर और गोभी की अधिकतर फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। देवरीघाट पंचायत के अलोटी गांव के महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी सेब की फसल तबाह हो गई है। कम ऊंचाई वाले क्षेत्र होने के कारण इस तरह की ओलावृष्टि कभी देखी नहीं थी। इस वजह से सेब के पेड़ों पर बागवान जालियां नहीं लगाते हैं। इसके अलावा मटर और गोभी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आने वाले समय में फ्रासबीन की खेती करने के लिए भी मेहनत करने का मन नहीं बना पा रहे हैं। इसी तरह कई अन्य इलाकों से भी खड़ी फसलों के नुकसान की खबरें सामने आ रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ओलावृष्टि के कारण फसलों और बागवानी को हुए नुकसान का निरीक्षण करने के लिए एसडीएम डॉ. शशांक गुप्ता ने बढि़याना गांव का दौरा किया। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए फसलों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई। पिछले दिनों उपमंडल की कई पंचायतों में ओलावृष्टि के कारण किसानों-बागवानों की मटर, फूलगोभी और सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इन दिनों किसान खेतों में मटर, फ्रासबीन और फूलगोभी की तैयार फसल को तोड़ने का काम कर रहे थे। यह फसलें पूरे साल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करती हैं और सेब सीजन में होने वाले खर्चों की भरपाई करने में सहायक सिद्ध होती है। इन दिनों फसलों के बेहतर दाम मिलने से किसान खुश नजर आ रहे थे। मटर 50 रुपये, फ्रासबीन 70 और फूलगोभी को 12 रुपये प्रति किलो के भाव मिल रहे थे, लेकिन ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। ओले के बड़े आकार होने के कारण सब्जियों की पत्तियों तक को नुकसान पहुंचा है, वहीं सेब की फसल को भी खासा नुकसान हुआ है। ओलों से बिना जालियों वाले सेब के पेड़ों से फल जमीन गिर गए हैं। बागवानों ने जिन पेड़ों में जालियां लगाई थीं, उनमें कम नुकसान हुआ है। चिखड़ पंचायत के रूनकली गांव के नरेंद्र शर्मा के अनुसार, ओले के कारण मटर और गोभी की अधिकतर फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। देवरीघाट पंचायत के अलोटी गांव के महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी सेब की फसल तबाह हो गई है। कम ऊंचाई वाले क्षेत्र होने के कारण इस तरह की ओलावृष्टि कभी देखी नहीं थी। इस वजह से सेब के पेड़ों पर बागवान जालियां नहीं लगाते हैं। इसके अलावा मटर और गोभी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। आने वाले समय में फ्रासबीन की खेती करने के लिए भी मेहनत करने का मन नहीं बना पा रहे हैं। इसी तरह कई अन्य इलाकों से भी खड़ी फसलों के नुकसान की खबरें सामने आ रही है।