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सेब की बागवानी में प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े बागवान : कायथ
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रोहड़ू। कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिविर में किसानों और बागवानों को डॉ. नरेंद्र सिंह कायथ प्रधान वैज्ञानिक केवीके ने प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती प्रतिष्ठित सेब उत्पादक क्षेत्र में लोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने किसानों से अपील की कि अपने नियमित खेती के तरीकों में प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और प्रथाओं का पालन करें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के 40 प्रतिभागियों में रोहड़ू क्षेत्र के विभिन्न गांवों के प्रगतिशील किसान, महिला मंडल और पंचायत सदस्य शामिल हुए।
प्राकृतिक खेती पर तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों डॉ नागेंद्र पाल बुटेल, डॉ दिनेश कुमार शर्मा और डॉ अजय ब्राग्टा ने चलाए। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के व्याख्यान के अलावा कार्यक्रम में प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
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वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया कि रासायनिक कृषि अब मिट्टी, पशु और मानव स्वास्थ्य में बाधा बन रही है। समय की आवश्यकता प्राकृतिक खेती जो कृषि-पारिस्थितिक प्रणाली को संतुलित करने का कार्य करेगी।
उन्होंने सभी किसानों से अनुरोध किया कि वे शुरू में बगीचे के कुछ हिस्से में प्राकृतिक खेती करना शुरू करें। इसके बाद धीरे-धीरे बड़े क्षेत्र में इसका विस्तार करें। प्रशिक्षण शिविर के समापन पर केवीके के वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती करने, देश को गुणवत्तापूर्ण और जहर मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने और पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी लिया।
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती प्रतिष्ठित सेब उत्पादक क्षेत्र में लोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने किसानों से अपील की कि अपने नियमित खेती के तरीकों में प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और प्रथाओं का पालन करें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के 40 प्रतिभागियों में रोहड़ू क्षेत्र के विभिन्न गांवों के प्रगतिशील किसान, महिला मंडल और पंचायत सदस्य शामिल हुए।
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प्राकृतिक खेती पर तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों डॉ नागेंद्र पाल बुटेल, डॉ दिनेश कुमार शर्मा और डॉ अजय ब्राग्टा ने चलाए। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के व्याख्यान के अलावा कार्यक्रम में प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
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वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया कि रासायनिक कृषि अब मिट्टी, पशु और मानव स्वास्थ्य में बाधा बन रही है। समय की आवश्यकता प्राकृतिक खेती जो कृषि-पारिस्थितिक प्रणाली को संतुलित करने का कार्य करेगी।
उन्होंने सभी किसानों से अनुरोध किया कि वे शुरू में बगीचे के कुछ हिस्से में प्राकृतिक खेती करना शुरू करें। इसके बाद धीरे-धीरे बड़े क्षेत्र में इसका विस्तार करें। प्रशिक्षण शिविर के समापन पर केवीके के वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती करने, देश को गुणवत्तापूर्ण और जहर मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने और पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी लिया।