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Rampur Bushahar News: अफीम के पौधे उगाने के मामले में आनी का आरोपी बरी
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अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा
आनी के रुमाली गांव में 2020 को 5,560 अफीम के पौधे किए थे बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अफीम के पौधे उगाने के मामले में रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने आरोपी शादी लाल को बरी कर दिया है। आरोपी पर आनी थाना क्षेत्र के रुमाली गांव में 5,560 अफीम के पौधे उगाने का आरोप था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 18 के तहत आरोप को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
पुलिस ने 22 मई 2020 को रुमाली गांव में 5,560 अफीम के पौधे बरामद किए थे। जांच के दौरान पुलिस ने शादी लाल को खेत का मालिक बताया था। इसके आधार पर उसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 18 के तहत चालान पेश किया गया। अदालत में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह जमीन का मालिक नहीं है और उसने अफीम की खेती नहीं की है।
अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। आरोपी ने बचाव में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी वास्तव में खेत पर काबिज था या उसने वहां अफीम के पौधे उगाए थे।
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अभियोजन पक्ष ने दो स्वतंत्र गवाह भी पेश किए। दोनों गवाहों ने अदालत में अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तब पुलिस पौधों को जलाने वाली थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दोनों गवाहों को पक्षद्रोही घोषित कर दिया।
विशेष न्यायाधीश-द्वितीय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए शादी लाल को बरी कर दिया।
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आनी के रुमाली गांव में 2020 को 5,560 अफीम के पौधे किए थे बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अफीम के पौधे उगाने के मामले में रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने आरोपी शादी लाल को बरी कर दिया है। आरोपी पर आनी थाना क्षेत्र के रुमाली गांव में 5,560 अफीम के पौधे उगाने का आरोप था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 18 के तहत आरोप को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
पुलिस ने 22 मई 2020 को रुमाली गांव में 5,560 अफीम के पौधे बरामद किए थे। जांच के दौरान पुलिस ने शादी लाल को खेत का मालिक बताया था। इसके आधार पर उसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 18 के तहत चालान पेश किया गया। अदालत में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह जमीन का मालिक नहीं है और उसने अफीम की खेती नहीं की है।
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अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। आरोपी ने बचाव में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी वास्तव में खेत पर काबिज था या उसने वहां अफीम के पौधे उगाए थे।
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अभियोजन पक्ष ने दो स्वतंत्र गवाह भी पेश किए। दोनों गवाहों ने अदालत में अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तब पुलिस पौधों को जलाने वाली थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दोनों गवाहों को पक्षद्रोही घोषित कर दिया।
विशेष न्यायाधीश-द्वितीय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए शादी लाल को बरी कर दिया।