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Rampur Bushahar News: मकर संक्रांति पर्व पर बारिश-बर्फबारी के लिए इष्ट देवता से गुहार
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ठियोग के चिखड़ेश्वर महादेव मंदिर में आशीर्वाद लेने दूर दूर से पहुंचे लोग। संवाद
देवता चिखड़ेश्वर महाराज और जनोग मंदिर की देवठी में श्रद्धालुओं ने टेका माथा
श्रद्धालुओं ने देवताओं को घी-खिचड़ी का लगाया भोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। उपमंडल की चिखड़ेश्वर और जनोग देवठियों के अलावा अन्य देवठियों में सूखे से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने बारिश और बर्फबारी की गुहार लगाई। वहीं, इन देवठियों में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह होते ही श्रद्धालुओं का तांता अपने-अपने इष्ट देव के दर्शन के लिए लगना शुरू हो गया। वर्तमान में क्षेत्र में सूखे के हालात को देखते हुए श्रद्धालुओं ने देवताओं से पर्याप्त बारिश और बर्फबारी की कामना की। माघ माह की संक्रांति को वर्ष की सबसे उत्तम संक्रांति माना जाता है। इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के लोग विशेष रूप से देवता महाराज के दर्शन करने पहुंचे और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। परंपरा के अनुसार देवताओं को घी-खिचड़ी का भोग भी अर्पित किया गया। देवता चिखड़ेश्वर महाराज और जनोग मंदिर की देवठी में विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दूरदराज के गांवों से भी श्रद्धालु इन आस्था के केंद्रों में पहुंचे। मकर संक्रांति के अवसर पर देवठियों में आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना और अधिक प्रबल हुई। दिन भर मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचते रहे और माथा टेक कर आशीर्वाद लिया।
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श्रद्धालुओं ने देवताओं को घी-खिचड़ी का लगाया भोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। उपमंडल की चिखड़ेश्वर और जनोग देवठियों के अलावा अन्य देवठियों में सूखे से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने बारिश और बर्फबारी की गुहार लगाई। वहीं, इन देवठियों में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह होते ही श्रद्धालुओं का तांता अपने-अपने इष्ट देव के दर्शन के लिए लगना शुरू हो गया। वर्तमान में क्षेत्र में सूखे के हालात को देखते हुए श्रद्धालुओं ने देवताओं से पर्याप्त बारिश और बर्फबारी की कामना की। माघ माह की संक्रांति को वर्ष की सबसे उत्तम संक्रांति माना जाता है। इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के लोग विशेष रूप से देवता महाराज के दर्शन करने पहुंचे और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। परंपरा के अनुसार देवताओं को घी-खिचड़ी का भोग भी अर्पित किया गया। देवता चिखड़ेश्वर महाराज और जनोग मंदिर की देवठी में विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दूरदराज के गांवों से भी श्रद्धालु इन आस्था के केंद्रों में पहुंचे। मकर संक्रांति के अवसर पर देवठियों में आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना और अधिक प्रबल हुई। दिन भर मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचते रहे और माथा टेक कर आशीर्वाद लिया।